शनिवार रात करीब साढ़े आठ बजे आतंकियों ने एक अहम सुरक्षा मुख्यालय पर अचानक से बड़ा हमला कर दिया। यह हमला शहर के एक बहुत ही घनी आबादी वाले इलाके में योजनाबद्ध तरीके से किया गया। मुख्यालय परिसर के पास आतंकियों ने सबसे पहले भयानक धमाके किए, जिससे स्थानीय लोग सहम गए। धमाकों के तुरंत बाद आतंकी अंधाधुंध गोलियां चलाते हुए परिसर के अंदर दाखिल हो गए। सुरक्षाबलों ने भी तुरंत मोर्चा संभालते हुए आतंकियों को रोकने के लिए अपनी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।
जवाबी कार्रवाई में मौतें मुख्यालय के भीतर घुसने के बाद सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच करीब डेढ़ घंटे तक भीषण गोलीबारी हुई। इस लंबे और खतरनाक एनकाउंटर के दौरान चार वीर सुरक्षाकर्मियों की दुखद मौत हो गई। हालांकि, सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के चलते छह आतंकियों को भी वहीं ढेर कर दिया गया। बलों ने अपनी बहादुरी दिखाते हुए एक अन्य हमलावर को मौके से जिंदा पकड़ लिया। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान आसपास के सभी रास्तों को आम जनता के लिए बंद कर दिया गया था।
हमले की जिम्मेदारी इस जानलेवा और खौफनाक हमले की जिम्मेदारी जमात-उल-अहरार नामक एक खतरनाक आतंकी संगठन ने ली है। यह संगठन दरअसल एक अन्य प्रतिबंधित चरमपंथी समूह का ही एक बेहद हिंसक और सक्रिय गुट है। इस आतंकी गुट का मुख्य प्रभाव खैबर पख्तूनख्वा जैसे उत्तर-पश्चिमी प्रांतों में सबसे ज्यादा देखने को मिलता है। यह संगठन लंबे समय से देश के नागरिकों और सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर हमले करता आ रहा है। सरकारी अधिकारियों पर भी इस संगठन द्वारा पहले कई बार जानलेवा और बड़े हमले किए जा चुके हैं।
भारत का आधिकारिक बयान इस घटना के बाद पड़ोसी देश ने बिना किसी सबूत के भारत पर अपनी भड़ास निकाली। इन झूठे आरोपों का जवाब देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपना आधिकारिक और कड़ा बयान जारी किया। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमने इन बेबुनियाद आरोपों वाली रिपोर्ट को देखा है। भारत सरकार इन सभी झूठे दावों और मनगढ़ंत कहानियों को पूरी तरह से सिरे से खारिज करती है। पड़ोसी देश को अपनी कमियों को छिपाने के लिए दूसरों पर झूठे आरोप लगाना तुरंत बंद कर देना चाहिए।
अपनी नीति बदले पाकिस्तान भारतीय प्रवक्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पड़ोसी मुल्क को सबसे पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उसे अपनी ही सरजमीं पर मौजूद और पल रहे आतंकी ढांचे के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए। देश की सरकारी नीति के तौर पर आतंकवाद का इस्तेमाल करने की पुरानी आदत को अब छोड़ना होगा। जब तक आतंकी संगठनों को पनाह मिलती रहेगी, तब तक ऐसी हिंसक घटनाएं रुकना असंभव है। शांति बहाली के लिए आतंकवाद के खिलाफ ईमानदारी से कार्रवाई करना सबसे ज्यादा जरूरी हो गया है।
अफगानिस्तान के साथ विवाद यह बड़ा आतंकी हमला ऐसे वक्त में हुआ है जब सीमा पार के पड़ोसी देश के साथ भारी तनाव जारी है। सेना लगातार आरोप लगा रही है कि पड़ोसी मुल्क की सरकार आतंकियों को पनाह और मदद दे रही है। इसके जवाब में सेना ने सीमा पार चल रहे कथित आतंकी प्रशिक्षण शिविरों पर कई बार कड़ी कार्रवाई भी की है। अक्टूबर के महीने के बाद से इस बड़े शहर में होने वाला यह पहला सबसे भीषण आतंकी हमला है। इससे पहले हुए एक आत्मघाती हमले में दो विदेशी इंजीनियरों की भी दर्दनाक मौत हो चुकी है।





































