हाल ही में हुए घातक सैन्य हमलों के बाद दोनों देश अब हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी इस शांति समझौते को बचाने के लिए मंगलवार को महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। यह अहम बैठक कतर की राजधानी दोहा में उच्च स्तरीय अधिकारियों के बीच आयोजित की जाएगी। यह घटनाक्रम संघर्ष विराम के अंतरिम समझौते की घोषणा के ठीक ग्यारह दिन बाद सामने आया है। पिछले कुछ दिनों में हुए हमलों के कारण इस समझौते के पूरी तरह से टूटने का खतरा मंडरा रहा था।
जलमार्ग पर उत्पन्न हुआ विवाद – इस पूरे शांति समझौते में सबसे बड़ा गतिरोध स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के समुद्री मार्ग को लेकर बना हुआ है। शुरुआती सहमति के तहत ईरान ने इस जलमार्ग से वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का वादा किया था। इसके बदले में अमेरिका भी ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने पर सहमत हुआ था। इस बीच ईरान ने मांग की कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाज सीधे ईरानी अधिकारियों से समन्वय स्थापित करें। अमेरिका ने ईरान की इस नई मांग को मूल समझौते का स्पष्ट उल्लंघन मानकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
हॉटलाइन शुरू होने में देरी – पिछले हफ्ते स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच एक और महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में अमेरिकी सेना और ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के बीच सहमति बनी थी। दोनों पक्षों ने भविष्य के टकराव टालने के लिए एक सीधी सैन्य हॉटलाइन बनाने पर अपनी रजामंदी दी थी। हालांकि, तमाम सहमतियों के बावजूद यह सीधी सैन्य हॉटलाइन अब तक सुचारू रूप से शुरू नहीं हो सकी है। संचार के इस सीधे माध्यम के अभाव में दोनों देशों के बीच गलतफहमियां और अधिक बढ़ गई हैं।
दोहा बैठक का मुख्य उद्देश्य – दोहा में होने वाली इस आपातकालीन बैठक का मुख्य उद्देश्य मौजूदा समुद्री विवाद को जल्द सुलझाना है। यह बैठक स्विट्जरलैंड के परमाणु कार्यक्रम वाले एजेंडे से हटकर पूरी तरह से जहाजों की आवाजाही पर केंद्रित होगी। दोनों पक्ष स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही का स्थायी समाधान खोजने का प्रयास करेंगे। इस बैठक का परिणाम यह तय करेगा कि यह शांति समझौता आगे टिक पाएगा या नहीं। फिलहाल दोनों पक्षों ने युद्ध टालने के लिए कूटनीति को एक और मौका देने का फैसला किया है।
अमेरिकी तकनीकी दल का नेतृत्व – कतर की राजधानी में होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक के लिए अमेरिका ने अपनी विशेष तैयारी की है। इस अहम वार्ता में भाग लेने वाले अमेरिकी तकनीकी दल का नेतृत्व निक स्टीवर्ट द्वारा किया जाएगा। निक स्टीवर्ट की टीम ईरानी अधिकारियों के सामने अमेरिकी चिंताओं और जलमार्ग की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से रखेगी। यह दल मूल समझौते की शर्तों को बिना किसी अतिरिक्त बदलाव के लागू करवाने पर अपना जोर देगा। वार्ता की सफलता काफी हद तक दोनों पक्षों के तकनीकी दलों की आपसी समझ और लचीलेपन पर निर्भर करेगी।
भविष्य की कूटनीतिक राह – इस समय दोनों देश एक बार फिर एक दूसरे पर किसी भी तरह के हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। वाशिंगटन और तेहरान के बीच यह अंतरिम संघर्ष विराम पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र की शांति के लिए आवश्यक है। कूटनीतिक वार्ता के जरिए दोनों पक्ष अब युद्ध के मुहाने से वापस लौटने की गंभीर कोशिश कर रहे हैं। अगर यह वार्ता विफल होती है, तो दोनों देश फिर से एक बड़े विनाशकारी युद्ध की तरफ बढ़ सकते हैं। पूरी दुनिया की नजरें इस वक्त दोहा में होने वाली इस उच्च स्तरीय शांति बैठक के नतीजों पर टिकी हुई हैं।





































