पाकिस्तान में हाल के सालों में पुलिस और सिक्योरिटी फोर्स को निशाना बनाकर किए गए हमलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। देश के भीतर लगातार सुरक्षा बलों पर घात लगाकर जानलेवा आतंकवादी हमले किए जा रहे हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस ज्यादातर हिंसा के लिए मुख्य रूप से पाकिस्तानी तालिबान को ही कसूरवार ठहराया है। इसके अलावा पाकिस्तानी तालिबान से जुड़े अन्य छोटे आतंकवादी ग्रुप्स को भी इन हमलों के लिए जिम्मेदार माना गया है। लगातार बढ़ते ये हमले पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ी और गंभीर चुनौती बन चुके हैं।
कराची में रेंजर्स पर हमला: इस नए ग्राउंड ऑपरेशन से ठीक एक दिन पहले पाकिस्तान के बड़े शहर कराची में एक भीषण हमला हुआ था। वहां बंदूकों और आधुनिक विस्फोटकों से लैस आतंकवादियों ने पैरामिलिट्री रेंजर्स के रीजनल हेडक्वार्टर को सीधे निशाना बनाया था। इस अचानक हुए आतंकी हमले में पाकिस्तानी सेना के तीन जवानों की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने भी त्वरित जवाबी कार्रवाई करते हुए वहां मौजूद तीन हमलावरों को मार गिराया था। साथ ही सेना ने एक और जिंदा हमलावर को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की थी।
अफगान नागरिक की गिरफ्तारी: कराची हमले के बाद गिरफ्तार किए गए उस अकेले हमलावर की पहचान सेना ने एक अफगान नागरिक के तौर पर की है। इस गिरफ्तारी ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच के सुरक्षा विवाद को और ज्यादा हवा दे दी है। पाकिस्तानी तालिबान से अलग हुए गुट जमात-उल-अहरार ने शनिवार रात एक बयान जारी किया था। इस लिखित बयान में उन्होंने कराची में हुए रेंजर्स हेडक्वार्टर हमले की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ली थी। इस घटना के बाद पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गई थीं और जवाबी कार्रवाई की तैयारी की गई।
टीटीपी और तालिबान का संबंध: इन्फॉर्मेशन मिनिस्टर तरार ने कहा कि अफगान बॉर्डर पर नए ऑपरेशन में पाकिस्तानी तालिबान के ठिकानों को निशाना बनाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तानी तालिबान को ही मुख्य रूप से टीटीपी के नाम से जाना जाता है। यह पाकिस्तानी तालिबान असल में अफगान तालिबान से अलग एक स्वतंत्र मिलिटेंट ग्रुप के रूप में काम करता है। हालांकि ये दोनों ग्रुप अलग हैं, लेकिन इसके बावजूद ये दोनों आपस में बेहद करीबी सहयोगी माने जाते हैं। गौरतलब है कि अफगान तालिबान साल 2021 में पड़ोसी देश अफगानिस्तान में दोबारा सत्ता में वापस आ गया था।
फरवरी से जारी खूनी जंग: पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सेनाएं एक दूसरे पर इस साल फरवरी के महीने से ही लगातार हमले कर रही हैं। फरवरी से लेकर अब तक इस बॉर्डर पार की लड़ाई में दोनों तरफ के सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं। इस विवाद की शुरुआत में पाकिस्तान ने अफगान इलाके में घुसकर बड़ी एयरस्ट्राइक की थी। उस पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक के बाद अफगानिस्तान की सेना ने भी सीमा पर कड़े जवाबी हमले किए थे। तब से दोनों देशों के बीच सीमा पर लगातार गोलाबारी और सैन्य झड़पें देखने को मिल रही हैं।
सीजफायर का उल्लंघन: दोनों पड़ोसी देशों के बीच सीमा पर जारी यह खूनी जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है। इस्लामाबाद ने इस पूरी स्थिति को पड़ोसी देशों के बीच एक खुली लड़ाई के रूप में परिभाषित किया है। सीजफायर के तमाम समझौतों के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई बड़ा सुधार देखने को नहीं मिला है। टीटीपी जैसे आतंकी संगठन इस पूरे विवाद में सबसे अहम नाम बनकर उभरे हैं जो लगातार सक्रिय हैं। पाकिस्तान की इस नई जवाबी कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध का खतरा और ज्यादा गहरा गया है।





































