राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर मीडिया लगातार सच्चाई सामने लाने का प्रयास कर रही है। इसी क्रम में एबीपी न्यूज़ के संवाददाता विशाल पांडेय ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों से सवाल किए। उन्होंने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी से इस पूरे विवाद पर जवाब मांगना चाहा। पत्रकार का उद्देश्य चोरी के मामले में ट्रस्ट के रुख को जनता के सामने रखना था। लेकिन इस सामान्य पूछताछ के दौरान माहौल अचानक से बेहद गर्म और तनावपूर्ण हो गया।
कोषाध्यक्ष का गुस्सा: संवाददाता द्वारा सवाल पूछे जाने पर गोविंद देव गिरी अचानक से बुरी तरह भड़क गए। उनका गुस्सा इतना बढ़ गया कि उनके समर्थकों ने पत्रकार से जबरन माइक छीनने की कोशिश शुरू कर दी। वहां मौजूद समर्थकों के साथ-साथ सुरक्षाकर्मियों ने भी संवाददाता के साथ सरेआम बदसलूकी की। हद तो तब हो गई जब खुद कोषाध्यक्ष ने भी आगे बढ़कर पत्रकार के माइक को हाथ लगाया। जब संवाददाता ने इस अभद्रता का कड़ा विरोध किया, तब जाकर समर्थक थोड़ा पीछे हटे।
जिम्मेदारी पर सीधा सवाल: यह पूरा विवाद संवाददाता विशाल पांडेय द्वारा पूछे गए एक सीधे और स्पष्ट सवाल के बाद शुरू हुआ। संवाददाता ने कोषाध्यक्ष से पूछा था कि क्या चढ़ावा चोरी के इस मामले में बतौर कोषाध्यक्ष उनकी कोई जिम्मेदारी है। पद की गरिमा और कार्यभार को देखते हुए मीडिया द्वारा यह एक अत्यंत स्वाभाविक प्रश्न पूछा गया था। इसी सवाल ने कोषाध्यक्ष और उनके समर्थकों को पूरी तरह से असहज कर दिया। विरोध शांत होने के बाद अंततः गोविंद देव गिरी को इस सवाल का जवाब देना ही पड़ा।
जवाबदेही की स्वीकारोक्ति: पत्रकार के कड़े विरोध के बाद गोविंद देव गिरी ने अपने गुस्से पर काबू पाते हुए जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि ट्रस्ट के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी निश्चित रूप से बनती है। इसी के साथ उन्होंने यह भी माना कि इस मामले में उनकी भी पूरी जिम्मेदारी है। उनका यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि ट्रस्ट के पदाधिकारी अपनी नैतिक जवाबदेही से भाग नहीं सकते। हालांकि, अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के तुरंत बाद उन्होंने अपने बचाव में भी तर्क दिए।
इस्तीफे से साफ इनकार: जिम्मेदारी की बात कबूलने के तुरंत बाद संवाददाता ने उनसे उनके इस्तीफे को लेकर अगला सवाल कर दिया। पत्रकार ने पूछा कि क्या वह इस चोरी की घटना के बाद अपने पद से इस्तीफा देंगे। इस प्रश्न पर पलटवार करते हुए गिरी ने कहा कि वह आखिर इस्तीफा क्यों देंगे। उन्होंने साफ कर दिया कि उनका इस चोरी की घटना से कोई भी सीधा संबंध नहीं है। उनका यह जवाब दर्शाता है कि वह इस विवाद के चलते अपना पद छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।
कार्यक्षेत्र की सफाई: अपने इस्तीफे से इनकार करते हुए कोषाध्यक्ष ने अपने कार्यक्षेत्र और अपनी ड्यूटी की सीमाएं स्पष्ट कीं। उन्होंने बताया कि उनका काम केवल बैंक अकाउंट में आने वाले पैसे का हिसाब-किताब रखना होता है। उन्होंने कहा कि हुंडी या दानपात्र में जो नकदी की गिनती हो रही थी, उससे उनका कोई लेना-देना नहीं है। उनके मुताबिक, दानपात्र की गिनती की प्रक्रिया से न तो उनका संबंध पहले था और न आज है। इस तरह उन्होंने दानपात्र से हुई चोरी की सीधी जिम्मेदारी से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया।

























































