श्री शीतलाष्टमी व्रत: महत्व, परंपरा और अचूक उपाय
प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतलाष्टमी मनाई जाती है, लेकिन आषाढ़ माह की अष्टमी का विशेष महत्व है। इस दिन माताएं परिवार के अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्रत रखती हैं। रास्ते के पत्थर को ‘पथवारी माता’ (शीतला माता का स्वरूप) मानकर पूजा की जाती है और देवी मां को बासी भोजन (बसोड़ा) का भोग लगाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
जीवन की विभिन्न समस्याओं को दूर करने के लिए शीतलाष्टमी के विशेष उपाय:
- नौकरी में परेशानी के लिए: स्नान के बाद शीतला चालीसा का पाठ करें और देवी को पुष्प अर्पित करें।
- लंबी आयु और बेहतर स्वास्थ्य के लिए: ‘मृणाल तन्तु सदृशीं नाभि हृन्मध्य संस्थिताम्। यस्त्वां संचिन्त येद्देवि तस्य मृत्युर्न जायते।।’ मंत्र का जाप करें।
- परिवार की खुशहाली के लिए: ‘शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता। शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नम:’ मंत्र का जाप करें।
- तरक्की और कामयाबी के लिए: शीतला माता के सामने घी का दीपक जलाएं और आरती करें। दूध-चावल की खीर का भोग लगाकर बच्चों में बांटें।
- सुख-समृद्धि के लिए: देवी के 9 अक्षरों वाले मंत्र ‘ऊँ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः’ का 108 बार जाप करें।
- बिजनेस को खतरों से बचाने के लिए: नीम के पेड़ के पास जाकर देवी मां का ध्यान करें और रोली-चावल से पेड़ की पूजा करें।
- जीवनसाथी की परेशानी दूर करने के लिए: घर के बाहर पश्चिम दिशा में नीम का पेड़ लगाएं और उसकी देखभाल करें।
- समस्याओं को दूर कर जीवन में मिठास लाने के लिए: नीम की 21 पत्तियों की माला बनाकर देवी मां को अर्पित करें।
- अनजाने में हुई गलती और रोगों के भय से मुक्ति के लिए: ‘वन्देSहं शीतलां देवीं सर्वरोग भय अपहाम्…’ या ‘न मन्त्रो नौषधं तस्य पापरोगस्य…’ मंत्र का जाप करें।
जुलाई 2026 की एकादशी: योगिनी और देवशयनी
हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। इसे करने से सभी संकट दूर होते हैं और आर्थिक संपन्नता आती है। जुलाई 2026 में दो प्रमुख एकादशी पड़ रही हैं:
पहली: योगिनी एकादशी (10 जुलाई 2026) आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी का व्रत करने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य मिलता है। यह निर्जला और देवशयनी एकादशी के बीच आती है।
- तिथि प्रारंभ: 10 जुलाई, सुबह 08:16 बजे
- तिथि समापन: 11 जुलाई, सुबह 05:22 बजे
- पारण का शुभ समय: 11 जुलाई 2026 को दोपहर 02:03 बजे से 04:42 बजे तक।
दूसरी: देवशयनी एकादशी (25 जुलाई 2026) आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है।
- महत्व: इसी दिन से भगवान विष्णु का शयनकाल प्रारंभ हो जाता है और ‘चातुर्मास’ की शुरुआत होती है।
- नियम: अगले चार माह तक कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं, लेकिन पूजा-पाठ, जप-तप और दान के लिए यह समय अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। 4 महीने बाद देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु जागते हैं।


























































