इस खूंखार गैंग के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अमेरिकी एजेंसी FBI ने हाल ही में Operation Hard Ball नामक एक विशेष अभियान चलाया था। इस गुप्त ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य Lawrence Bishnoi गैंग के विदेशी नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करना और अपराधियों को पकड़ना था। FBI ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर बहुत ही सुनियोजित तरीके से इस बड़े और महत्वपूर्ण ऑपरेशन को सफलता के साथ अंजाम दिया। इस बड़ी कार्रवाई का सीधा असर इस गैंग के अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशनों और उनकी अवैध कमाई पर बड़े पैमाने पर पड़ने वाला है। इस अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई से पूरी दुनिया में फैले संगठित आपराधिक गिरोहों के बीच एक बहुत ही सख्त और कड़ा संदेश गया है।
कैलिफोर्निया में बड़ी धरपकड़ FBI और उसके सहयोगी बलों ने सात जुलाई को America के California समेत कई अन्य प्रमुख जगहों पर यह विशेष ऑपरेशन चलाया। इस भारी छापेमारी के दौरान जांच एजेंसियों ने सख्त कार्रवाई करते हुए कुल बीस संदिग्ध लोगों को तुरंत अपनी हिरासत में ले लिया है। हिरासत में लिए गए इन सभी आरोपियों के पास से तलाशी के दौरान भारी मात्रा में पूरी तरह से प्रतिबंधित सामान बरामद किया गया है। जांच एजेंसियों ने इनके ठिकानों से कई तरह के खतरनाक हथियार और बड़ी मात्रा में अवैध ड्रग्स भी भारी तादाद में जब्त किए हैं। इस बड़ी धरपकड़ से America में इस कुख्यात गैंग के सक्रिय गुर्गों और उनके गैरकानूनी अड्डों का बहुत बड़ा खुलासा हुआ है।
गोल्डी बराड़ पर घोषित हुआ इनाम गैंग के मुख्य सरगनाओं के साथ-साथ अमेरिकी एजेंसियों ने कुख्यात गैंगस्टर Goldy Brar के खिलाफ भी बहुत ही सख्त एक्शन लिया है। विदेश में बैठकर अपराध का बड़ा नेटवर्क चलाने वाले Goldy Brar पर अमेरिकी जांच एजेंसियों ने एक बहुत बड़ा इनाम घोषित किया है। एजेंसियों ने इस वांटेड गैंगस्टर की गिरफ्तारी जल्द सुनिश्चित करने के लिए उसके ऊपर पचास हजार डॉलर का भारी इनाम रखा है। भारतीय मुद्रा के अनुसार यह इनामी राशि लगभग तैंतालीस लाख रुपये के बराबर है जो कि उस पर कसा गया एक बड़ा कानूनी शिकंजा है। इस इनामी घोषणा के बाद इस वांटेड अपराधी के छिपने के ठिकाने कम हो गए हैं और उसकी गिरफ्तारी की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं।
जेल से होता था नेटवर्क का संचालन जांच एजेंसियों के विस्तृत दावों के मुताबिक Lawrence Bishnoi भारत की जेल में बंद होने के बावजूद अपना खौफनाक गैंग लगातार चलाता था। वह मोबाइल फोन और इंटरनेट कॉलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए जेल के अंदर से ही अपने गुर्गों को सख्त निर्देश देता था। आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए वह लगातार इंटरनेट कॉलिंग के माध्यम से अपने विदेशी साथियों के साथ संपर्क में रहता था। जेल की सलाखों के पीछे से भी उसका यह सारा संचार नेटवर्क बहुत ही बेखौफ और बिना किसी बड़ी रुकावट के सुचारू रूप से चल रहा था। इसी तकनीक का सीधा फायदा उठाकर वह विदेश में बैठे अपने साथियों के साथ मिलकर भारत और अन्य देशों में अपराधों की साजिश रचता था।
सोशल मीडिया से फैलाया जाता था डर यह शातिर गैंग अपने बड़े अपराध करने के बाद आम जनता में अपना खौफ कायम करने के लिए सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल करता था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि गैंग के सदस्य किसी भी बड़ी हिंसक घटना को अंजाम देने के तुरंत बाद उसकी जिम्मेदारी ऑनलाइन ले लेते थे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हिंसक घटनाओं की जिम्मेदारी लेकर और धमकी भरे पोस्ट डालकर लोगों में भारी डर का माहौल फैलाया जाता था। इस ऑनलाइन खौफ का सीधा फायदा उठाकर यह गैंग अपने रंगदारी के अवैध धंधे को बहुत ही आसानी से बिना रुकावट के बढ़ाता था। अब अमेरिकी जांच एजेंसियों की इस जांच के बाद गैंग के सोशल मीडिया पर फैलाए जाने वाले इस डर पर भी भारी लगाम लगने वाली है।
करोड़ों की रंगदारी का खौफनाक खेल America की जांच एजेंसी का दावा है कि यह गैंग दुनिया भर के अमीर कारोबारियों और समाज के चर्चित लोगों को मुख्य रूप से अपना निशाना बनाता था। इन हाई प्रोफाइल लोगों को डरा-धमकाकर यह आपराधिक गिरोह उनसे करोड़ों रुपये की भारी भरकम रंगदारी की लगातार मांग करता था। बड़े कारोबारियों से रंगदारी मांगने के लिए गैंग के सदस्य खासतौर पर व्हाट्सऐप और वॉयस मैसेज का सबसे अधिक इस्तेमाल करते थे। मांगे गए पैसे देने से साफ इनकार करने पर इन रसूखदार लोगों को सीधे तौर पर जान से मारने की खौफनाक धमकियां दी जाती थीं। अब अमेरिकी एजेंसियों की इस ताजा कार्रवाई के बाद इस खूंखार गैंग के इस पूरे खौफनाक खेल का अंत होने की उम्मीद पूरी तरह से जग गई है।


























































