राम मंदिर चढ़ावा घोटाला मामले के उजागर होने के बाद से ही पवित्र नगरी अयोध्या की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक गलियारों में भारी हड़कंप मचा हुआ है। इस हाई प्रोफाइल मामले में सख्त रुख अपनाते हुए तकनीकी विभाग ने चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा की पास बनाने वाली मुख्य डिजिटल आईडी को पूरी तरह बंद कर दिया है। वीआईपी दर्शन पास बनाने की प्रणाली में इन तीनों के नाम से जेनेरेट की गई आईडी को ब्लॉक करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि गड़बड़ी बहुत बड़े स्तर पर की जा रही थी। अब इन ब्लॉक की जा चुकी आईडी की मदद से भविष्य में किसी भी प्रकार का लॉगिन या पास जनरेशन करना पूरी तरह असंभव हो गया है।
पास श्रेणियों का दुरुपयोग गौरतलब है कि राम मंदिर में आम और खास श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन पास और विशिष्ट दर्शन पास नाम से दो तरह के विशेष पास जारी करने की व्यवस्था काफी समय से लागू थी। इस व्यवस्था के तहत सभी ट्रस्टियों को यह विशेषाधिकार दिया गया था कि वे अपने नाम की आईडी से श्रद्धालुओं के लिए यह पास आसानी से जारी करवा सकें। लेकिन जांच में यह बात सामने आई है कि इस पवित्र और सुगम दर्शन व्यवस्था का कुछ लोगों द्वारा अपने निजी फायदे के लिए जमकर गलत इस्तेमाल किया गया। भगवान के दर्शन के लिए बनाए गए इन दोनों श्रेणियों के पासों का उपयोग ट्रस्ट की पवित्रता को ताक पर रखकर केवल पैसे कमाने के एक अवैध साधन के रूप में किया जाने लगा था।
टिन्नू यादव ने कमाए लाखों इस पूरे फर्जीवाड़े और पास घोटाले की जांच में टिन्नू यादव नामक एक आरोपी की बहुत ही मुख्य और बेहद संदिग्ध भूमिका खुलकर दुनिया के सामने आई है। पुलिस चार्जशीट के मुताबिक टिन्नू यादव ने ट्रस्टियों के इसी ऑनलाइन सिस्टम का बहुत ही चालाकी से फायदा उठाया और बिना किसी वैध अनुमति के सैकड़ों की संख्या में विशिष्ट दर्शन पास सिस्टम से अवैध रूप से जारी करवा दिए। इसके साथ ही इस बात के भी पुख्ता सबूत मिले हैं कि चंपत राय और अनिल मिश्रा के कई नजदीकी लोग भी इस पूरे गोरखधंधे में टिन्नू यादव का साथ दे रहे थे। इन अवैध पासों को वीआईपी दर्शन के नाम पर जरूरतमंद श्रद्धालुओं को महंगे दामों पर बेचकर आरोपियों ने लाखों रुपये की मोटी कमाई की थी।
सिफारिशी पासों का अंत कंप्यूटर डेटा के विश्लेषण से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि जिन तीन आईडी से मंदिर के इतिहास में सबसे ज्यादा पास जारी हुए थे, वे चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा की ही थीं। इसी गंभीर तथ्य को आधार बनाकर प्रशासनिक अधिकारियों ने इन तीनों ही आईडी को तत्काल प्रभाव से बंद करने का एक बहुत बड़ा और कड़ा फैसला लिया। अब चूंकि ये तीनों ही लोग इस महत्वपूर्ण ट्रस्ट की आंतरिक व्यवस्था और सदस्यता से पूरी तरह बाहर हो चुके हैं, इसलिए अब इनकी किसी भी तरह की लिखित या मौखिक सिफारिश पर किसी भी व्यक्ति को सुगम या वीआईपी दर्शन का कोई पास नहीं मिलेगा। इस कार्रवाई से मंदिर प्रशासन ने यह साफ संदेश दिया है कि दर्शन व्यवस्था में अब किसी भी प्रकार का वीआईपी कल्चर या भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्राण प्रतिष्ठा के बाद से चोरी अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों द्वारा श्रद्धापूर्वक चढ़ाए गए चढ़ावे और चंदे के पैसे में हेराफेरी का यह बहुत ही बड़ा और गंभीर मामला जून दो हजार छब्बीस में आधिकारिक रूप से सामने आया था। जांच रिपोर्ट के अनुसार बाईस जनवरी दो हजार चौबीस को जब भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी, तभी से दानपात्रों से चढ़ावे की इस भारी धनराशि को लगातार चोरी करके गायब किया जा रहा था। इस पूरे सिंडिकेट में शामिल शातिर अपराधी रोज की गिनती के समय बहुत ही सफाई से नोटों की गड्डियों को पार कर देते थे। इस तरह करोड़ों रुपये की इस पावन धनराशि का गबन लंबे समय तक बिना किसी रोक-टोक के बहुत ही बेखौफ तरीके से चलता रहा था।
महामंत्री और सदस्य का इस्तीफा चढ़ावा चोरी के इस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस प्रशासन ने अब तक इस मामले में कुल आठ मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस कथित महास्कैम और गबन के गंभीर आरोपों की आंच जब सीधे ट्रस्ट के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंची, तो श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शक्तिशाली महामंत्री चंपत राय और अहम सदस्य अनिल मिश्रा को भी अपनी भारी फजीहत का सामना करना पड़ा। बढ़ते नैतिक और सामाजिक दबाव के बीच इन दोनों ही बड़े पदाधिकारियों ने आखिरकार अपने-अपने पदों से पूरी तरह से अपना त्यागपत्र दे दिया। ट्रस्ट ने भी इस बेहद नाजुक स्थिति को समझते हुए बिना किसी देरी के उनके इस इस्तीफे को तुरंत और पूरी तरह स्वीकार कर लिया है।

























































