नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाकों में आई अचानक बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई है, जिसमें नेपाल में 165 से अधिक मौतों की पुष्टि हो चुकी है और 500 से ज्यादा लोग लापता हैं। वहीं चीन के सीमावर्ती हिस्से में तीन लोगों की मौत हुई है और 265 लोग लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल टूरिज्म बोर्ड के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, प्रभावित इलाकों से कुल 579 यात्री (466 विदेशी और 113 नेपाली) लापता हैं। नेपाल-चीन सीमा के रसुवागढ़ी में भोटेकोशी नदी की बाढ़ से कई इलाके पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं।
नेपाली प्रधानमंत्री द्वारा हवाई और जमीनी निरीक्षण: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह बाढ़ से हुए भारी नुकसान का जायजा लेने के लिए सड़क के रास्ते बाढ़ प्रभावित इलाके नुवाकोट के लिए ऑन-साइट इंस्पेक्शन पर निकल गए हैं। पीएम मुख्य रूप से नुवाकोट और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करेंगे। उन्हें बुनियादी ढांचे को पहुंचे नुकसान की जानकारी दी जाएगी और वह स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा बलों और जन प्रतिनिधियों के साथ तुरंत राहत कार्य चलाने, अवरुद्ध रास्तों को साफ करने और रेस्क्यू ऑपरेशन्स को तेज करने पर चर्चा करेंगे।
विभिन्न भारतीय राज्यों के नागरिकों की स्थिति: इस त्रासदी में भारत के विभिन्न राज्यों के 300 से अधिक नागरिक लापता हैं, जिनकी तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। तमिलनाडु के कुल 57 लोग यात्रा पर थे, जिनमें से 37 लापता हैं और 20 से संपर्क हो चुका है। महाराष्ट्र के सात पर्यटकों में से मुंबई और पुणे के दो-दो लोग सुरक्षित पाए गए हैं, जबकि बाकी तीन की खोज जारी है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, केरल, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक के कई नागरिक बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे या लापता हैं।
विदेशी दूतावासों और राज्यों के हेल्पलाइन नंबर: बाढ़ में फंसे भारतीय नागरिकों और उनके परिजनों की मदद के लिए हेल्पलाइन सेवा स्थापित की गई है। चीन स्थित भारतीय दूतावास से 0086 185 1428 4905 तथा काठमांडू दूतावास से +977 985 131 6807 / +977 970 910 7500 पर संपर्क किया जा सकता है। तिब्बत में स्थानीय सहायता हेतु 0086 139 8999 0012 नंबर उपलब्ध कराया गया है। कर्नाटक सरकार ने भी अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1070 और 080-22253707 सक्रिय कर दिया है।
भारत द्वारा मानवीय सहायता की आपूर्ति: भारत सरकार ने पड़ोसी देश नेपाल में आई इस भीषण प्राकृतिक आपदा के समय तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया है। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर के अनुसार, भारत ने दवाइयां, भोजन के पैकेट और 37.5 टन मानवीय सहायता व आपदा राहत सामग्री (HADR) लेकर दूसरी विशेष फ्लाइट नेपाल के लिए रवाना कर दी है। मलबे में दबे और फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए बचाव दल लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हुए हैं ताकि अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।
अंतरराष्ट्रीय संवेदना और वैश्विक प्रभाव: संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नेपाल और चीन में आई इस भीषण बाढ़ पर दुख प्रकट करते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सरकार के नेतृत्व में चलाए जा रहे राहत कार्यों का पूर्ण समर्थन कर रहा है। तिब्बत से शुरू हुई इस बाढ़ ने बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिसमें एक दर्जन से अधिक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स क्षतिग्रस्त हो गए हैं और कई प्रमुख पुल बह जाने से संपर्क मार्ग पूरी तरह से कट गए हैं।














































