सनातन धर्म में ईश्वर की आराधना, पूजा-पाठ और व्रत का विशेष धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व है। अक्सर श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठता है कि भगवान की पूजा खड़े होकर करनी चाहिए या बैठकर? इसके साथ ही, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी व्रत की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और इस दिन बनने वाले दुर्लभ योगों का विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है:
पूजा-पाठ के शास्त्रीय नियम: खड़े होकर या बैठकर?
धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, पूजा-पाठ की अलग-अलग क्रियाओं के लिए बैठने और खड़े होने के स्पष्ट नियम बनाए गए हैं:
1. नियमित पूजा बैठकर ही क्यों करें?
- स्थिरता और एकाग्रता: नियमित ध्यान, जप, मन्त्रोच्चार और पूजा-अर्चना हमेशा आसन पर बैठकर करनी चाहिए। बैठकर पूजा करने से शरीर स्थिर रहता है और मन भटकता नहीं है, जिससे एकाग्रता बनी रहती है।
- आसन का प्रयोग: पूजा के दौरान सीधे जमीन पर नहीं बैठना चाहिए। हमेशा साफ और सूती या ऊनी आसन का उपयोग करें। पूजा संपन्न होने के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर प्रणाम करने का विधान है।
2. कौन से कार्य खड़े होकर करने चाहिए?
- आरती: भगवान की आरती हमेशा अपने स्थान पर खड़े होकर, पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ करनी चाहिए।
- परिक्रमा: देव-प्रतिमा या पूजा स्थल की परिक्रमा भी खड़े होकर ही की जाती है।
3. दिशा और स्वच्छता के नियम
- शुभ दिशा: पूजा करते समय साधक का मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना सबसे शुभ माना जाता है।
- पवित्र वस्तुओं का आदर: शालिग्राम, शिवलिंग, शंख, जनेऊ और देवी-देवताओं की मूर्तियों को कभी भी सीधे नंगे फर्श या जमीन पर न रखें। इन्हें हमेशा साफ कपड़े, पात्र या आसन पर स्थापित करें।
- सिर ढंकना: पूजा और आरती के समय सिर ढंकना ईश्वर के प्रति श्रद्धा, सम्मान और नम्रता का प्रतीक है।
अजा एकादशी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त एवं धार्मिक महत्व
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है, जिससे पापों का नाश, आत्मशुद्धि और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
एकादशी तिथि एवं व्रत पारण समय
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 06 सितंबर 2026 (रविवार) को शाम 07:29 बजे से
- एकादशी तिथि समाप्त: 07 सितंबर 2026 (सोमवार) को शाम 05:03 बजे तक
- व्रत की तिथि: उदयातिथि के अनुसार अजा एकादशी का व्रत 07 सितंबर 2026 (सोमवार) को रखा जाएगा।
- व्रत पारण का शुभ समय: 8 सितंबर 2026 (मंगलवार) को सुबह 06:02 AM से 08:33 AM तक
अजा एकादशी के शुभ मुहूर्त (07 सितंबर 2026)
| मुहूर्त | समय |
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 04:52 AM से 05:38 AM तक |
| प्रातः सन्ध्या | सुबह 05:15 AM से 06:25 AM तक |
| अभिजित मुहूर्त | दोपहर 12:12 PM से 01:01 PM तक |
| अमृत काल | दोपहर 03:59 PM से शाम 05:29 PM तक |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 06:48 PM से 07:11 PM तक |
| सायाह्न सन्ध्या | शाम 06:48 PM से 07:58 PM तक |
अजा एकादशी पर बनने वाले दुर्लभ ज्योतिषीय योग
वर्ष 2026 की अजा एकादशी पर कई अत्यंत शुभ और दुर्लभ ग्रहों के योग बन रहे हैं, जो इस दिन के महत्व को कई गुना बढ़ा देते हैं:
- नक्षत्र योग: दिन की शुरुआत पुनर्वसु नक्षत्र के साथ होगी और रात्रि में पुष्य नक्षत्र रहेगा।
- गजकेसरी योग: चंद्रमा और बृहस्पति की युति से अत्यंत शुभ ‘गजकेसरी योग’ का निर्माण होगा।
- मालव्य योग: शुक्र ग्रह के अपनी स्वराशि (तुला) में रहने से पंचमहापुरुष योगों में से एक ‘मालव्य योग’ बनेगा।
- भद्र योग: बुध ग्रह अपनी उच्च राशि (कन्या) में स्थित होकर ‘भद्र योग’ का निर्माण करेंगे।
अजा एकादशी के विशेष उपाय:
- इस दिन तुलसी पत्र अर्पित कर भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल मिलता है।
- जो लोग किसी कारणवश उपवास नहीं रख सकते, वे भगवान विष्णु के महामंत्रों (‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’) का जप करके भी पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।
नोट- अजा एकादशी के बारे में पूर्ण जानकारी के लिए दिनांक 05.09.2026 खरी कसौटी का धर्म-संसार में दिये गये लेख को देखे














































