आज दिनांक 16 सितंबर 2026, बुधवार को वैदिक ज्योतिष के अनुसार सभी नौ ग्रह अपनी-अपनी राशियों और नक्षत्रों में स्थित हैं। आज का सबसे महत्वपूर्ण ग्रह परिवर्तन चंद्रमा का है, जो तुला राशि से निकलकर वृश्चिक राशि में प्रवेश कर चुके हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार वृश्चिक चंद्रमा की नीच राशि है, इसलिए इस गोचर के दौरान मन की बेचैनी, भावनात्मक उतार-चढ़ाव और निर्णय लेने में असमंजस की स्थिति बन सकती है। हालांकि इस स्थिति पर कर्क राशि में स्थित देवगुरु बृहस्पति की पूर्ण अमृत दृष्टि पड़ रही है, जिससे नीचभंग राजयोग का निर्माण माना जा रहा है। यही कारण है कि चंद्रमा के कमजोर माने जाने वाले गोचर के बावजूद कई राशियों के लिए धन, करियर, प्रतिष्ठा और नए अवसरों के संकेत बन रहे हैं।
इसी बीच सूर्य भी अपनी राशि बदलने की तैयारी में हैं। सूर्य 17 सितंबर को सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे और वहां 17 अक्टूबर तक रहेंगे। कन्या राशि में पहले से मौजूद बुध के साथ सूर्य की युति से बुधादित्य योग बनेगा। इसलिए 16 सितंबर का दिन केवल वर्तमान चंद्र गोचर के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि अगले दो दिनों में होने वाले सूर्य और मंगल के राशि परिवर्तन की पृष्ठभूमि भी तैयार कर रहा है।
📊 ग्रह गोचर और नक्षत्र चार्ट (16.09.2026)
| क्र.सं. | ग्रह | वर्तमान राशि | वर्तमान नक्षत्र | आगामी राशि परिवर्तन |
|---|---|---|---|---|
| 1 | सूर्य | सिंह | उत्तराफाल्गुनी | 17 सितंबर 2026 को सुबह 07:47 बजे कन्या राशि में प्रवेश |
| 2 | चंद्रमा | तुला, इसके बाद वृश्चिक | विशाखा, इसके बाद अनुराधा | आज ही वृश्चिक राशि में प्रवेश |
| 3 | मंगल | मिथुन | पुनर्वसु | 18 सितंबर 2026 को शाम 05:03 बजे कर्क राशि में प्रवेश |
| 4 | बुध | कन्या — स्वराशि | हस्त/चित्रा | 26 सितंबर 2026 को दोपहर 12:31 बजे तुला राशि में प्रवेश |
| 5 | गुरु | कर्क — उच्च राशि | पुष्य/आश्लेषा | 2026 के अंत तक कर्क राशि में दीर्घकालिक गोचर |
| 6 | शुक्र | तुला — स्वराशि | स्वाति/विशाखा | अक्टूबर 2026 में वृश्चिक राशि में प्रवेश |
| 7 | शनि | मीन | उत्तरभाद्रपद | 2026 में मीन राशि में ही रहेंगे, वक्री अवस्था में |
| 8 | राहु | कुंभ | शतभिषा | वक्री चाल के कारण 2026 में कुंभ राशि में ही रहेंगे |
| 9 | केतु | सिंह | मघा/पूर्वाफाल्गुनी | वक्री चाल के कारण 2026 में सिंह राशि में ही रहेंगे |
चंद्रमा का आज का गोचर
- सुबह 10:49 बजे तक: चंद्रमा तुला राशि में
- सुबह 10:49 बजे के बाद: चंद्रमा वृश्चिक राशि में
- सुबह तक नक्षत्र: विशाखा
- इसके बाद: अनुराधा नक्षत्र
- चंद्रमा की स्थिति: वृश्चिक राशि में नीच
- विशेष प्रभाव: कर्क राशि में स्थित गुरु की दृष्टि के कारण नीचभंग राजयोग का निर्माण
16 सितंबर को चंद्रमा तुला राशि की यात्रा पूरी करने के बाद वृश्चिक राशि में प्रवेश कर रहे हैं। ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं, मानसिक स्थिति और माता का कारक माना जाता है। वृश्चिक राशि में चंद्रमा को नीच स्थिति में माना जाता है। ऐसे में व्यक्ति के भीतर छिपी चिंताएं, असुरक्षा, भावनात्मक संवेदनशीलता और मन में चल रहे पुराने विषय अधिक सक्रिय हो सकते हैं।
हालांकि आज की ग्रह स्थिति में एक महत्वपूर्ण राहत भी है। कर्क राशि में स्थित देवगुरु बृहस्पति की पांचवीं पूर्ण अमृत दृष्टि वृश्चिक राशि के चंद्रमा पर पड़ रही है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इससे नीचभंग राजयोग बनता है। इसका अर्थ यह माना जाता है कि शुरुआत में मानसिक दबाव या भावनात्मक अस्थिरता महसूस होने के बावजूद परिस्थितियां धीरे-धीरे बेहतर दिशा में जा सकती हैं और करियर, धन तथा उपलब्धियों के अवसर सामने आ सकते हैं।
चंद्रमा की नक्षत्र स्थिति
- विशाखा नक्षत्र: सुबह के समय, चंद्रमा के तुला से वृश्चिक की ओर बढ़ने के दौरान
- विशाखा का चौथा चरण: वृश्चिक क्षेत्र से संबंधित
- इसके बाद: अनुराधा नक्षत्र
- विशाखा नक्षत्र के स्वामी: देवगुरु बृहस्पति
विशाखा नक्षत्र उपलब्धि, लक्ष्य प्राप्ति, शक्ति और महत्वाकांक्षा से जुड़ा माना जाता है। चंद्रमा के इस नक्षत्र से गुजरने के दौरान व्यक्ति किसी लक्ष्य को लेकर अधिक गंभीर हो सकता है। गुरु की दृष्टि के कारण योजनाओं को सही दिशा देने और भविष्य से जुड़े आर्थिक या करियर संबंधी निर्णयों पर विचार करने का अवसर मिल सकता है।
चंद्रमा के नीच होने का प्रभाव
वृश्चिक राशि में चंद्रमा को ज्योतिष में कमजोर स्थिति में माना जाता है। इस दौरान मन में अचानक विचारों की अधिकता, भावनात्मक उतार-चढ़ाव, असुरक्षा या किसी बात को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। नींद प्रभावित होने या मानसिक थकान महसूस होने की संभावना भी बताई जाती है।
दूसरी ओर, यही स्थिति व्यक्ति को गहराई से सोचने, किसी विषय की तह तक जाने और शोध या रहस्यमयी विषयों में रुचि लेने के लिए प्रेरित कर सकती है। इसलिए यह गोचर केवल चुनौतीपूर्ण नहीं माना जाता, बल्कि आत्मचिंतन और गहन विश्लेषण के लिए भी उपयोगी हो सकता है।
वर्तमान गोचर का मन, स्वास्थ्य और करियर पर असर
चंद्रमा मन और भावनाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए वृश्चिक में उनके गोचर के दौरान मानसिक भटकाव या बेचैनी महसूस हो सकती है। माता के स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की सलाह दी जाती है। देर रात तक जागने और अनियमित दिनचर्या से बचना बेहतर रहेगा।
करियर और व्यापार के क्षेत्र में स्थिति अपेक्षाकृत सकारात्मक रह सकती है। विशाखा नक्षत्र की ऊर्जा और गुरु की दृष्टि महत्वाकांक्षी योजनाओं को आगे बढ़ाने में सहायता कर सकती है। वित्तीय योजना, करियर की रणनीति और भविष्य के लक्ष्यों पर गंभीरता से काम करने के लिए यह समय उपयोगी माना जा रहा है।
नीचभंग राजयोग से किन राशियों को विशेष लाभ
मकर राशि
मकर राशि के जातकों के लिए चंद्रमा लाभ भाव में गोचर कर रहे हैं। पुराने रुके हुए धन की वापसी, कारोबारी क्षेत्र में लाभकारी समझौता और सरकारी क्षेत्र से जुड़े कामों में सफलता के संकेत हैं। आय के नए रास्ते खुल सकते हैं। लंबे समय से अटके किसी आर्थिक मामले में भी आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।
कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों के लिए यह गोचर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। चंद्रमा पांचवें भाव में होने और राशि स्वामी होने के कारण संतान, शिक्षा, रचनात्मकता और आर्थिक स्थिति से जुड़े मामलों में सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। संतान की ओर से शुभ समाचार मिलने की संभावना है। शिक्षा और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी अवसर बन सकते हैं।
मीन राशि
मीन राशि के जातकों के लिए चंद्रमा भाग्य भाव से संबंधित प्रभाव दे रहे हैं। आध्यात्मिक यात्रा, लंबी यात्रा या धार्मिक गतिविधियों के अवसर बन सकते हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है। नौकरी बदलने या नए करियर विकल्प तलाशने वालों को अनुकूल अवसर मिल सकते हैं।
कन्या राशि
कन्या राशि के जातकों के लिए चंद्रमा पराक्रम भाव में प्रभाव डाल रहे हैं। बातचीत करने की शैली प्रभावशाली रहेगी और अपनी बात दूसरों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में सफलता मिल सकती है। भाई-बहनों का सहयोग प्राप्त होगा। छोटी यात्राएं लाभकारी साबित हो सकती हैं।
इन राशियों के लिए सामान्य रहेगा चंद्र गोचर
सिंह राशि
चंद्रमा चौथे भाव में होने से घर-परिवार से जुड़ा कोई पुराना विषय सुलझ सकता है। हालांकि माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता हो सकती है। भूमि और भवन से संबंधित निवेश में जल्दबाजी न करें। घर के सुख-सुविधा संबंधी मामलों पर खर्च हो सकता है।
तुला राशि
चंद्रमा दूसरे भाव में आने के कारण धन और परिवार से जुड़े फैसले महत्वपूर्ण रहेंगे। आर्थिक मामलों में दबाव महसूस हो सकता है। बातचीत के दौरान वाणी पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा, क्योंकि तीखे शब्द पारिवारिक विवाद को जन्म दे सकते हैं। निवेश के लिहाज से दिन सामान्य रह सकता है।
वृषभ राशि
चंद्रमा सातवें भाव में होने से जीवनसाथी या कारोबारी साझेदार के साथ विचारों में अंतर हो सकता है। करियर में प्रगति की संभावना बनी रहेगी, लेकिन मानसिक तनाव महसूस हो सकता है। साझेदारी के मामलों में स्पष्ट संवाद रखना जरूरी होगा।
कुंभ राशि
चंद्रमा दसवें भाव में होने से काम का बोझ बढ़ सकता है। मेहनत के परिणामस्वरूप प्रशंसा भी मिल सकती है। अधिकारियों के साथ संबंध सामान्य और संतुलित बनाए रखना आवश्यक होगा। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ने की संभावना है।
इन राशियों को विशेष सावधानी बरतनी होगी
वृश्चिक राशि
चंद्रमा आपकी ही राशि के प्रथम भाव में गोचर कर रहे हैं और यहां उन्हें नीच माना जाता है। इस कारण भावनात्मक उतार-चढ़ाव, बेचैनी, अनजाना भय और निर्णय लेने में असमंजस हो सकता है। व्यक्तिगत या कारोबारी मामलों में जल्दबाजी से बड़ा फैसला लेने से बचें।
मेष राशि
चंद्रमा आठवें भाव में होने से स्वास्थ्य और अचानक आने वाली परिस्थितियों को लेकर सावधानी जरूरी होगी। जोखिम भरे निवेश और सट्टेबाजी से दूरी रखें। गुप्त विरोधियों से सावधान रहें और वाहन चलाते समय विशेष सतर्कता बरतें।
धनु राशि
चंद्रमा बारहवें भाव में होने से खर्च बढ़ सकता है। अनावश्यक यात्रा या अतिरिक्त खर्च सामने आने की संभावना है। नींद में परेशानी और मानसिक थकान महसूस हो सकती है। आर्थिक मामलों में बजट बनाकर चलना बेहतर रहेगा।
मिथुन राशि
चंद्रमा छठे भाव में होने के कारण स्वास्थ्य, कर्ज और विरोधियों से जुड़े मामलों में सतर्क रहना होगा। कर्ज का लेन-देन सोच-समझकर करें। मौसमी बीमारी और पेट से जुड़ी समस्या को नजरअंदाज न करें।
नीच चंद्रमा के प्रभाव को संतुलित करने के उपाय
- भगवान शिव की आराधना: शिवलिंग पर गंगाजल मिश्रित जल या कच्चा दूध अर्पित करें।
- मंत्र जाप: संध्याकाल में “ॐ सों सोमाय नमः” या “ॐ नमः शिवाय” का 108 बार जाप करें।
- सफेद वस्तुओं का दान: चावल, दूध, मिश्री या सफेद वस्त्र का दान करें।
- चांदी के पात्र का प्रयोग: पीने के पानी के लिए चांदी के गिलास का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- रात्रि जागरण से बचें: देर रात तक जागने के बजाय पर्याप्त नींद लें।
- माता का आशीर्वाद: माता या माता समान महिला का आशीर्वाद लें।
17 सितंबर को सूर्य बदलेंगे राशि
सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करने वाले हैं। दिए गए विवरण के अनुसार सूर्य का यह राशि परिवर्तन 17 सितंबर 2026 को होगा और इसके बाद सूर्य करीब 17 अक्टूबर तक कन्या राशि में रहेंगे। कन्या राशि में बुध की मौजूदगी के कारण सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग बनेगा।
सूर्य को आत्मविश्वास, नेतृत्व, प्रशासन, प्रतिष्ठा और मान-सम्मान का कारक माना जाता है। इसलिए सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश से नौकरी, प्रशासन, शिक्षा, व्यापार और नेतृत्व से जुड़े विषयों में अलग-अलग राशियों पर प्रभाव पड़ने की संभावना बताई गई है। मीन राशि में स्थित शनि की दृष्टि के कारण यह प्रभाव सभी राशियों के लिए समान नहीं रहेगा।
सूर्य गोचर से मेष से मीन तक प्रभाव
मेष: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों और विदेश या घर से दूर रहने वालों को लाभ मिल सकता है। कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम और व्यापार में प्रगति के संकेत हैं। प्रेम संबंधों में संयम रखना होगा।
वृषभ: विद्यार्थियों को बेहतर परिणाम के लिए पढ़ाई पर विशेष ध्यान देना होगा। नकारात्मक विचारों से बचें। बातचीत के दौरान वाणी पर नियंत्रण रखें और विवाद से दूर रहें।
मिथुन: भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा। पड़ोसियों के साथ अनावश्यक विवाद से बचें। माता के स्वास्थ्य पर ध्यान दें और घरेलू वातावरण में शांति बनाए रखें। फिजूलखर्ची रोकना जरूरी होगा।
कर्क: यह गोचर भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि कर सकता है। रुके हुए सरकारी काम पूरे होने के संकेत हैं। कार्यक्षेत्र में होने वाला बदलाव आपके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
सिंह: आर्थिक लेन-देन में सावधानी रखें। सामाजिक और पारिवारिक कामों पर खर्च बढ़ सकता है। खान-पान का ध्यान रखें, पेट से जुड़ी परेशानी या चोट की संभावना से सावधान रहें।
कन्या: आपकी राशि में सूर्य के आने के साथ शनि और राहु के प्रभाव के कारण मानसिक दबाव बढ़ सकता है। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने से बचें और स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
तुला: ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार से जुड़े लोगों के लिए समय लाभकारी रह सकता है। कोर्ट से जुड़े मामलों में सफलता, आर्थिक लाभ और संतान की उन्नति के संकेत हैं। विद्यार्थियों को मेहनत का फल मिल सकता है।
वृश्चिक: लाभ भाव में सूर्य का प्रभाव आय और उपलब्धियों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। अटके काम पूरे होंगे, व्यापार में विस्तार होगा और नौकरी में पदोन्नति या वेतन वृद्धि की संभावना बन सकती है। सामाजिक सम्मान भी बढ़ सकता है।
धनु: कार्यक्षेत्र में प्रगति के नए रास्ते खुल सकते हैं। पिता का सहयोग मिलेगा। पारिवारिक व्यापार और कानूनी मामलों में सफलता के संकेत हैं, लेकिन घर के वातावरण में संयम बनाए रखना जरूरी होगा।
मकर: काम में जल्दबाजी न करें। भाग्य का सहयोग धीरे-धीरे मिलेगा। वरिष्ठ अधिकारियों की सलाह को महत्व दें। पिता के स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें।
कुंभ: व्यापार में नया निवेश करने से पहले अच्छी तरह विचार करें। जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचें। स्वास्थ्य थोड़ा कमजोर रह सकता है और वाहन चलाते समय सावधानी जरूरी होगी।
मीन: वैवाहिक जीवन में तालमेल बनाए रखना जरूरी होगा। गुस्से पर नियंत्रण रखें और पुराने विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास करें। ग्राहकों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने से व्यापार सामान्य गति से चलता रहेगा।
वृषभ राशि पर सूर्य गोचर का विशेष प्रभाव
सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश वृषभ राशि के लिए विद्या, संतान और पारिवारिक सुख से जुड़े मामलों में सकारात्मक संकेत दे सकता है। संतान पक्ष से सुख मिलने की संभावना है और जीवनसाथी के साथ संबंधों में मजबूती आ सकती है। संपत्ति और वाहन से जुड़े मामलों में भी अनुकूल स्थिति बन सकती है। घर, जमीन या संपत्ति में निवेश की योजना बनाने वालों के लिए यह समय महत्वपूर्ण हो सकता है।
मिथुन राशि पर सूर्य गोचर का विशेष प्रभाव
17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक का समय मिथुन राशि वालों के लिए कई क्षेत्रों में अवसर लेकर आ सकता है। भवन और वाहन से जुड़े लाभ के संकेत हैं। माता-पिता का सहयोग मिलेगा। लेखन, पत्रकारिता, मीडिया, संपादन, जनसंपर्क, विपणन, सामग्री निर्माण, सामाजिक माध्यम, शिक्षण, खेल, विज्ञापन और संचार से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिल सकता है। इस अवधि में अपनी अलग पहचान बनाने के अवसर भी मिलेंगे।
वृश्चिक राशि पर सूर्य गोचर का विशेष प्रभाव
वृश्चिक राशि वालों के लिए सूर्य का यह परिवर्तन आय और आर्थिक उपलब्धियों के लिहाज से महत्वपूर्ण रह सकता है। धन लाभ के अवसर बन सकते हैं और लंबे समय से पूरी न हुई इच्छा पूरी होने की संभावना है। पदोन्नति, सम्मान या पहचान की प्रतीक्षा कर रहे लोगों को सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। नेतृत्व क्षमता मजबूत होगी और कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारी संभालने का अवसर मिल सकता है। पैतृक संपत्ति या पुराने आर्थिक मामलों में भी प्रगति संभव है।
धनु राशि पर सूर्य गोचर का विशेष प्रभाव
सूर्य का यह गोचर धनु राशि वालों के करियर के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। प्रशासनिक कार्य पूरे होने के संकेत हैं। विदेश यात्रा, लंबी यात्रा, उच्च शिक्षा या विदेश में नौकरी की दिशा में प्रयास करने वालों के लिए अवसर बन सकते हैं। इस दौरान आपकी वाणी प्रभावशाली रहेगी और संचार क्षमता का लाभ करियर में मिल सकता है।
18 सितंबर को मंगल का राशि परिवर्तन
सूर्य के बाद मंगल भी राशि परिवर्तन करेंगे। मंगल 18 सितंबर 2026 को शाम 5:03 बजे मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, जहां उन्हें नीच राशि का माना जाता है। इसलिए 17 और 18 सितंबर के बीच होने वाले सूर्य और मंगल के इन लगातार राशि परिवर्तनों का ज्योतिषीय महत्व बढ़ जाता है।
मंगल के इस परिवर्तन के बाद ऊर्जा, साहस, क्रोध, भूमि-संपत्ति, तकनीकी कार्य और निर्णय क्षमता से जुड़े विषयों पर प्रभाव देखने को मिल सकता है। व्यक्तिगत कुंडली में मंगल की स्थिति के अनुसार इसका प्रभाव अलग-अलग हो सकता है।
16 सितंबर 2026 का ग्रह गोचर सार
आज का दिन मुख्य रूप से चंद्रमा के तुला से वृश्चिक राशि में प्रवेश और नीचभंग राजयोग के कारण महत्वपूर्ण है। चंद्रमा की नीच स्थिति मानसिक संवेदनशीलता बढ़ा सकती है, लेकिन बृहस्पति की दृष्टि इस स्थिति को संतुलित करने वाली मानी जा रही है। मकर, कर्क, मीन और कन्या राशि के लिए कई सकारात्मक अवसरों के संकेत हैं, जबकि वृश्चिक, मेष, धनु और मिथुन राशि के जातकों को स्वास्थ्य, खर्च, निर्णय और लेन-देन के मामलों में अतिरिक्त सावधानी रखने की सलाह दी गई है।
इसके साथ ही सूर्य 17 सितंबर को कन्या राशि में प्रवेश करेंगे और बुध के साथ बुधादित्य योग बनाएंगे, जबकि 18 सितंबर को मंगल कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इस तरह 16 सितंबर से शुरू होने वाला यह ग्रह परिवर्तन क्रम आने वाले दिनों में करियर, व्यापार, धन, शिक्षा, परिवार और व्यक्तिगत निर्णयों से जुड़े क्षेत्रों को प्रभावित करने वाला रहेगा।















































