16 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि और बुधवार का दिन है। पंचमी तिथि सुबह 8 बजकर 59 मिनट तक रहेगी, इसके बाद षष्ठी तिथि लग जाएगी। बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है और षष्ठी तिथि के कारण आज स्कंद षष्ठी का भी संयोग बन रहा है। आज वैधृति योग दोपहर करीब 12 बजकर 21 से 12 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। वैधृति योग में स्थिर प्रकृति के कार्य करना ठीक माना जाता है, लेकिन अधिक भाग-दौड़ वाले काम या यात्रा आदि के लिए इस अवधि को उपयुक्त नहीं माना जाता। वहीं विशाखा नक्षत्र शाम करीब 5 बजकर 21 से 5 बजकर 23 मिनट तक रहेगा, इसके बाद अनुराधा नक्षत्र शुरू होगा।
आज के दिन चंद्रमा सुबह 10 बजकर 49 मिनट तक तुला राशि में रहेंगे और इसके बाद वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेंगे। शाम के समय सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग का संयोग बनेगा, जो अगले दिन सुबह तक रहेगा। इसलिए आज दिन के दूसरे भाग में शुभ कार्यों के लिए विशेष समय प्राप्त होगा।
16 सितंबर 2026 का पंचांग
- विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थी)
- शक संवत: 1948 (पराभव)
- मास: भाद्रपद
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- वार: बुधवार
- तिथि: पंचमी तिथि सुबह 08:59 बजे तक, उसके बाद षष्ठी तिथि
- नक्षत्र: विशाखा नक्षत्र शाम 05:21 बजे तक, उसके बाद अनुराधा नक्षत्र
- योग: वैधृति योग दोपहर 12:21 बजे तक, उसके बाद विष्कुंभ योग
- करण: बालव सुबह 08:59 बजे तक, फिर कौलव रात 09:50 बजे तक, तत्पश्चात तैतिल
- सूर्य राशि: सिंह राशि
- चंद्र राशि: तुला राशि सुबह 10:49 बजे तक, उसके बाद वृश्चिक राशि
16 सितंबर 2026 शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त: 04:52 ए एम से 05:39 ए एम
- प्रातः संध्या: 05:16 ए एम से 06:26 ए एम
- अभिजित मुहूर्त: कोई नहीं
- विजय मुहूर्त: 02:36 पी एम से 03:24 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त: 06:40 पी एम से 07:04 पी एम
- सायाह्न संध्या: 06:40 पी एम से 07:51 पी एम
- अमृत काल: 07:50 ए एम से 09:34 ए एम
- सर्वार्थ सिद्धि योग: 05:22 पी एम से 06:26 ए एम, सितंबर 17
- अमृत सिद्धि योग: 05:22 पी एम से 06:26 ए एम, सितंबर 17
- रवि योग: 05:22 पी एम से 06:26 ए एम, सितंबर 17
16 सितंबर 2026 अशुभ समय
- राहुकाल: दोपहर 12:15 पी एम से 01:48 पी एम तक
- यमगण्ड काल: सुबह 07:39 ए एम से 09:11 ए एम तक
- गुलिक काल: सुबह 10:43 ए एम से दोपहर 12:16 पी एम तक
- दुर्मुहूर्त: सुबह 11:51 ए एम से दोपहर 12:40 पी एम तक
- वर्ज्यम्: रात 09:47 पी एम से रात 11:33 पी एम तक
- दिशाशूल: उत्तर
सूर्योदय-सूर्यास्त का समय
- सूर्योदय: सुबह 06:06 बजे
- सूर्यास्त: शाम 06:25 बजे
- चंद्रोदय: सुबह 11:04 बजे
- चंद्रास्त: रात 09:19 बजे
विशाखा नक्षत्र
आकाशमंडल में स्थित 27 नक्षत्रों में से विशाखा 16वां नक्षत्र है। विशाखा का अर्थ विभाजित या एक से अधिक शाखाओं वाला माना जाता है। विवाह आदि अवसरों पर सजाए गए घर के द्वार को विशाखा नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह माना जाता है। विशाखा नक्षत्र के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। इसके तीन चरण तुला राशि में आते हैं और इसका चौथा चरण वृश्चिक राशि में आता है। लिहाजा तुला और वृश्चिक राशि के जातकों पर विशाखा नक्षत्र का प्रभाव माना जाता है। विशाखा नक्षत्र को शक्ति, समृद्धि, सुंदरता, उपलब्धियों और खुशियों के साथ जोड़कर देखा जाता है। इस नक्षत्र में कारीगरी, चित्रकारी और औषधि से संबंधित कार्य शुरू करना शुभ माना जाता है।
पंचमी तिथि के बाद षष्ठी का संयोग
16 सितंबर की सुबह पंचमी तिथि रहेगी और सुबह करीब 8:59 बजे के बाद षष्ठी तिथि शुरू हो जाएगी। पंचमी के बाद षष्ठी का यह तिथि परिवर्तन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। बुधवार होने के कारण गणेश पूजा का विशेष संयोग बन रहा है, वहीं षष्ठी तिथि भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय की उपासना से जुड़ी मानी जाती है। ऐसे में आज गणेश जी और भगवान कार्तिकेय की पूजा-अर्चना करना शुभ माना जा सकता है।
वैधृति योग
- वैधृति योग: दोपहर करीब 12:21 से 12:23 बजे तक
- इसके बाद: विष्कुंभ योग
वैधृति योग में स्थिर कार्यों को करना ठीक माना जाता है, जबकि अत्यधिक भाग-दौड़, यात्रा अथवा जल्दबाजी वाले कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। इस अवधि में कोई जरूरी काम हो तो शांत मन से निर्णय लेना बेहतर रहेगा।
नक्षत्र परिवर्तन
- विशाखा नक्षत्र: शाम करीब 05:21 से 05:23 बजे तक
- इसके बाद: अनुराधा नक्षत्र
विशाखा नक्षत्र के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। इसके तीन चरण तुला राशि और चौथा चरण वृश्चिक राशि में आता है। यह नक्षत्र उपलब्धि, शक्ति, समृद्धि और रचनात्मकता से जुड़ा माना जाता है। कारीगरी, चित्रकारी और औषधि से संबंधित कार्यों के लिए इसे अनुकूल माना जाता है।
करण का समय
- बालव करण: सुबह 08:59 बजे तक
- कौलव करण: सुबह 08:59 बजे से रात 09:50 बजे तक
- तैतिल करण: रात 09:50 बजे के बाद
करण पंचांग के प्रमुख अंगों में शामिल है। किसी शुभ कार्य के लिए तिथि, नक्षत्र और योग के साथ करण पर भी विचार किया जाता है।
चंद्रमा का राशि परिवर्तन
- चंद्रमा तुला राशि में: सुबह 10:49 बजे तक
- चंद्रमा वृश्चिक राशि में: सुबह 10:49 बजे के बाद
सुबह 10:49 बजे के बाद चंद्रमा के वृश्चिक राशि में प्रवेश से दिन के दूसरे हिस्से में भावनात्मक संवेदनशीलता और गहराई बढ़ सकती है। महत्वपूर्ण फैसले लेते समय भावनाओं के साथ व्यावहारिक पक्ष पर भी ध्यान देना उपयोगी रहेगा।
सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि और रवि योग
- सर्वार्थ सिद्धि योग: 05:22 पी एम से 06:26 ए एम, 17 सितंबर
- अमृत सिद्धि योग: 05:22 पी एम से 06:26 ए एम, 17 सितंबर
- रवि योग: 05:22 पी एम से 06:26 ए एम, 17 सितंबर
शाम के बाद बनने वाले इन शुभ योगों के कारण दिन का दूसरा भाग विशेष महत्व रखेगा। शुभ और महत्वपूर्ण कार्यों के लिए इन योगों के समय का उपयोग किया जा सकता है। खासकर ऐसे काम जिनमें सफलता, कार्यसिद्धि और सकारात्मक परिणाम की कामना हो, उनके लिए यह समय उपयोगी माना जाता है।
बुधवार को गणेश पूजा का महत्व
बुधवार भगवान गणेश की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। आज पंचमी तिथि के साथ बुधवार का संयोग होने के कारण गणेश जी की पूजा, गणेश मंत्र का जाप, गणेश चालीसा का पाठ और भगवान को दूर्वा तथा सिंदूर अर्पित करना शुभ माना जाता है। षष्ठी तिथि शुरू होने के बाद भगवान कार्तिकेय का स्मरण और पूजन भी किया जा सकता है।
भारत की राजधानियों में राहुकाल
सूर्योदय के स्थानीय समय में अंतर होने के कारण अलग-अलग शहरों में राहुकाल का समय भी अलग रहेगा। 16 सितंबर 2026 को विभिन्न राज्यों की राजधानियों और जम्मू-कश्मीर में राहुकाल इस प्रकार रहेगा:
| क्रम | राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | राजधानी | राहुकाल का समय |
|---|---|---|---|
| 1 | उत्तर प्रदेश | लखनऊ | दोपहर 12:01 से 01:33 बजे तक |
| 2 | जम्मू और कश्मीर | श्रीनगर | दोपहर 12:22 से 01:56 बजे तक |
| 3 | आंध्र प्रदेश | अमरावती | दोपहर 12:03 से 01:34 बजे तक |
| 4 | अरुणाचल प्रदेश | ईटानगर | सुबह 11:09 से दोपहर 12:39 बजे तक |
| 5 | असम | दिसपुर | सुबह 11:15 से दोपहर 12:45 बजे तक |
| 6 | बिहार | पटना | सुबह 11:45 से दोपहर 01:17 बजे तक |
| 7 | छत्तीसगढ़ | रायपुर | सुबह 11:58 से दोपहर 01:29 बजे तक |
| 8 | गोवा | पणजी | दोपहर 12:25 से 01:56 बजे तक |
| 9 | गुजरात | गांधीनगर | दोपहर 12:35 से 02:07 बजे तक |
| 10 | हरियाणा | चंडीगढ़ | दोपहर 12:17 से 01:50 बजे तक |
| 11 | हिमाचल प्रदेश | शिमला | दोपहर 12:16 से 01:49 बजे तक |
| 12 | झारखंड | रांची | सुबह 11:49 से दोपहर 01:21 बजे तक |
| 13 | कर्नाटक | बेंगलुरु | दोपहर 12:11 से 01:42 बजे तक |
| 14 | केरल | तिरुवनंतपुरम | दोपहर 12:13 से 01:43 बजे तक |
| 15 | मध्य प्रदेश | भोपाल | दोपहर 12:14 से 01:46 बजे तक |
| 16 | महाराष्ट्र | मुंबई | दोपहर 12:30 से 02:01 बजे तक |
| 17 | मणिपुर | इंफाल | सुबह 11:06 से दोपहर 12:36 बजे तक |
| 18 | मेघालय | शिलांग | सुबह 11:15 से दोपहर 12:45 बजे तक |
| 19 | मिजोरम | आइजोल | सुबह 11:08 से दोपहर 12:38 बजे तक |
| 20 | नागालैंड | कोहिमा | सुबह 11:05 से दोपहर 12:35 बजे तक |
| 21 | ओडिशा | भुवनेश्वर | सुबह 11:46 से दोपहर 01:17 बजे तक |
| 22 | पंजाब | चंडीगढ़ | दोपहर 12:17 से 01:50 बजे तक |
| 23 | राजस्थान | जयपुर | दोपहर 12:22 से 01:54 बजे तक |
| 24 | सिक्किम | गंगटोक | सुबह 11:27 से दोपहर 12:58 बजे तक |
| 25 | तमिलनाडु | चेन्नई | दोपहर 12:01 से 01:31 बजे तक |
| 26 | तेलंगाना | हैदराबाद | दोपहर 12:08 से 01:39 बजे तक |
| 27 | त्रिपुरा | अगरतला | सुबह 11:12 से दोपहर 12:42 बजे तक |
| 28 | उत्तराखंड | देहरादून | दोपहर 12:14 से 01:47 बजे तक |
| 29 | पश्चिम बंगाल | कोलकाता | सुबह 11:36 से दोपहर 01:08 बजे तक |
लखनऊ में राहुकाल
- स्थान: लखनऊ, उत्तर प्रदेश
- राहुकाल: दोपहर 12:01 बजे से 01:33 बजे तक
लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के अनुसार राहुकाल दोपहर 12:01 बजे से 1:33 बजे तक रहेगा। इस दौरान नए शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचने की परंपरा है।
आज की धार्मिक गतिविधियां
बुधवार को भगवान गणेश की पूजा करना, उन्हें दूर्वा और सिंदूर अर्पित करना तथा गणेश मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। पंचमी तिथि समाप्त होने के बाद षष्ठी तिथि शुरू होगी, इसलिए भगवान कार्तिकेय का स्मरण भी किया जा सकता है। सुबह के समय ब्रह्म मुहूर्त में ध्यान, मंत्र जाप और साधना करने से मन को एकाग्र करने में सहायता मिल सकती है।
आज शुभ कार्यों के लिए समय चुनते हुए तिथि, नक्षत्र, योग, करण और राहुकाल का ध्यान रखना चाहिए। विशेष रूप से दोपहर के राहुकाल में नए शुभ कार्य की शुरुआत से बचना उचित माना जाता है, जबकि शाम के समय सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि और रवि योग का संयोग शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
16 सितंबर 2026 का पंचांग सार
16 सितंबर का दिन पंचमी से षष्ठी तिथि के परिवर्तन, तुला से वृश्चिक राशि में चंद्रमा के प्रवेश और विशाखा से अनुराधा नक्षत्र के परिवर्तन के कारण विशेष रहेगा। दोपहर तक वैधृति योग और इसके बाद विष्कुंभ योग रहेगा। सुबह पंचमी तिथि के साथ दिन की शुरुआत होगी और बाद में षष्ठी तिथि का प्रभाव रहेगा। शाम 5:22 बजे के आसपास सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि और रवि योग का संयोग शुरू होकर अगले दिन सुबह तक प्रभावी रहेगा।
बुधवार और षष्ठी तिथि के इस संयोग में भगवान गणेश तथा भगवान कार्तिकेय की आराधना का विशेष महत्व रहेगा। वहीं शुभ कार्यों के लिए सुबह के अमृत काल, विजय मुहूर्त तथा शाम के शुभ योगों को ध्यान में रखा जा सकता है। राहुकाल, यमगंड, गुलिक काल, दुर्मुहूर्त और वर्ज्यम् के समय महत्वपूर्ण नए कार्यों की शुरुआत से बचना चाहिए। इस प्रकार धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ, साधना और योजनाबद्ध शुभ कार्यों के लिए 16 सितंबर 2026 का पंचांग महत्वपूर्ण रहेगा।














































