पश्चिम एशिया में नए सैन्य संघर्ष की आशंकाओं के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि युद्ध दोबारा शुरू हो या नहीं, ईरान की नीतियां पहले की तरह बनी रहेंगी। तेहरान में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका अथवा कोई अन्य देश ईरान पर फिर से सैन्य कार्रवाई करने की कोशिश करता है, तो यह पूरी तरह अविवेकपूर्ण कदम होगा। उनके बयान से स्पष्ट है कि ईरान संभावित नए हमले की स्थिति में अपने रुख में बदलाव करने के संकेत नहीं दे रहा है। क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव के बीच यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच एक ओर सैन्य ताकत और नुकसान को लेकर दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर समझौते की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है। इस विरोधाभासी स्थिति ने पश्चिम एशिया में आगे की परिस्थितियों को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने बताया नई क्षेत्रीय वास्तविकता: अराघची ने कहा कि 40 दिनों तक चले युद्ध के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पहले जैसी नहीं रह पाएगी। उन्होंने इस संघर्ष को क्षेत्रीय इतिहास का निर्णायक मोड़ बताते हुए कहा कि इससे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था में बुनियादी परिवर्तन आया है। ईरानी विदेश मंत्री के मुताबिक, अब क्षेत्र में एक नई वास्तविकता स्थापित हो चुकी है और युद्ध से पहले जैसी परिस्थितियों की वापसी संभव नहीं दिखती। उन्होंने कहा कि संघर्ष का अंत सभी मोर्चों पर होना चाहिए। इस बयान से ईरान की उस सोच का संकेत मिलता है, जिसमें युद्ध के समाधान को केवल सीमित सैन्य कार्रवाई रोकने के बजाय व्यापक क्षेत्रीय परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अराघची की टिप्पणी खास महत्व रखती है, क्योंकि ईरान इसे मौजूदा संघर्ष के बाद बदले हुए सुरक्षा परिदृश्य का अहम हिस्सा मान रहा है।
अमेरिकी सैन्य नुकसान पर अराघची के बड़े दावे: ईरान के विदेश मंत्री ने दावा किया कि युद्ध के दौरान ईरानी बलों ने 80 से अधिक अमेरिकी विमानों और लड़ाकू विमानों को नष्ट किया। उन्होंने कहा कि इनमें से लगभग सभी विमानों को जमीन पर मौजूद रहने के दौरान मिसाइलों से निशाना बनाया गया था। अराघची ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में अमेरिका के लगभग सभी सैन्य ठिकाने तबाह हो गए और वहां स्थित सैकड़ों इमारतों को नुकसान पहुंचा। ईरान की ओर से किए गए इन दावों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी अपने सैन्य अभियान की सफलता का उल्लेख किया है। ट्रंप का दावा है कि अमेरिकी कार्रवाई में ईरान के सभी लड़ाकू विमान निष्क्रिय कर दिए गए और 259 जहाज समुद्र में डूब चुके हैं। दोनों पक्षों के बयानों में सैन्य नुकसान को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध सामग्री में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि का विवरण नहीं दिया गया है।
ट्रंप का संकेत, अगले दिन भी हो सकती है सैन्य कार्रवाई: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ईरान के खिलाफ जल्द हमले की संभावना को खुला रखा। फ्लोरिडा में मतदान के बाद पत्रकारों से बातचीत में उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है। ट्रंप ने जवाब दिया कि वह इस बारे में पहले से जानकारी नहीं देंगे और यह भी संभव है कि कार्रवाई अगले ही दिन हो जाए। हालांकि, उन्होंने बातचीत के जरिए समाधान की संभावना को भी खारिज नहीं किया। ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच एक अच्छा और बड़ा समझौता हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन यह देखना जरूरी होगा कि वह किसी समझौते का पालन करता है या नहीं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पश्चिम एशिया में सैन्य अभियान का बचाव करते हुए अमेरिकी नौसेना और सेना की प्रशंसा की। उन्होंने ईरान की अर्थव्यवस्था में रिकॉर्ड महंगाई होने का भी दावा किया।
पाकिस्तान के जरिए प्रस्ताव भेजने की खबर को ईरान ने बताया मनगढ़ंत: होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के बदले अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने के कथित प्रस्ताव को ईरान ने सिरे से नकार दिया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से संबद्ध समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, तेहरान ने पाकिस्तानी मध्यस्थों के सामने कोई नया प्रस्ताव पेश नहीं किया। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि सऊदी अरब के एक मीडिया संस्थान ने जो खबर प्रकाशित की थी, उसमें दावा किया गया था कि ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को यह प्रस्ताव भेजा है। ईरानी पक्ष ने इस खबर को झूठ और मनगढ़ंत कहानी बताया। इससे पहले ऐसी रिपोर्टें आई थीं कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के बदले अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटवाने की पेशकश कर रहा है। ईरानी समाचार चैनल प्रेस टीवी के अनुसार, तस्नीम से बात करने वाले सूत्रों ने भी इन खबरों को गलत करार दिया। इस खंडन ने संभावित बातचीत को लेकर सामने आ रही जानकारी पर सवाल खड़े किए हैं।
सैन्य टकराव या समझौता, दोनों विकल्पों के बीच फंसा पश्चिम एशिया: मौजूदा घटनाक्रम में ईरान और अमेरिका की ओर से लगातार ऐसे बयान सामने आ रहे हैं, जो क्षेत्रीय तनाव कम होने की संभावना को अनिश्चित बनाते हैं। अराघची ने स्पष्ट किया है कि नए हमले की कोशिश ईरान की नजर में अविवेकपूर्ण होगी और 40 दिनों के युद्ध के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति बदल चुकी है। दूसरी ओर, ट्रंप ने संभावित सैन्य कार्रवाई का संकेत देते हुए समझौते का रास्ता भी खुला रखा है। ईरान ने पाकिस्तान के जरिए होर्मुज को खोलने और अमेरिकी नाकेबंदी हटाने संबंधी प्रस्ताव की खबर को खारिज कर दिया है। साथ ही, दोनों पक्ष युद्ध के दौरान एक-दूसरे की सैन्य क्षमताओं को नुकसान पहुंचाने के दावे कर रहे हैं। ऐसे में आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि सैन्य चेतावनियों के बीच बातचीत की कोई ठोस पहल सामने आती है या तनाव फिर से बढ़ता है। फिलहाल, होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सुरक्षा पश्चिम एशिया के घटनाक्रम के केंद्र में बने हुए हैं।
















































