शरीर में लिवर कई महत्वपूर्ण काम करता है, इसलिए इसे स्वस्थ बनाए रखना जरूरी है। लिवर को साफ करने के लिए किसी विशेष डिटॉक्स पेय की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन कुछ प्राकृतिक पेय पदार्थों में मौजूद रेशे, विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और वनस्पतियों से मिलने वाले उपयोगी यौगिक लिवर के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। फैटी लिवर की समस्या और शरीर की चयापचय संबंधी सेहत के संदर्भ में भी खानपान की अहम भूमिका होती है। आंतरिक चिकित्सा और पाचन तंत्र के विशेषज्ञ डॉ. जोसेफ सलहब ने अपने सामाजिक माध्यम पर साझा किए गए एक वीडियो में ऐसे कई पेय पदार्थों के बारे में बताया है, जिन्हें संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि, केवल किसी पेय को पीने से लिवर की बीमारी ठीक होने की गारंटी नहीं मिलती। नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और स्वस्थ जीवनशैली भी लिवर की देखभाल के लिए जरूरी हैं।
चिया बीज और नींबू का पानी देगा रेशे और विटामिन सी: लिवर की सेहत को ध्यान में रखते हुए चिया बीज से तैयार पेय को आहार में शामिल किया जा सकता है। इसे बनाने के लिए एक बड़ा चम्मच चिया बीज पानी में डालकर रातभर भिगो दें। सुबह इसमें नींबू का रस मिलाकर सेवन करें। चिया बीज में आहार संबंधी रेशे पाए जाते हैं, जो आंतों में मौजूद लाभकारी जीवाणुओं को पोषण देने में मदद करते हैं। वहीं, नींबू से विटामिन सी मिलता है, जो कोलेजन के निर्माण और शरीर के ऊतकों की मरम्मत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आंतों का स्वास्थ्य शरीर की समग्र चयापचय प्रक्रिया से जुड़ा होता है, इसलिए रेशों से भरपूर खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का उपयोगी हिस्सा हैं। इस पेय को तैयार करते समय अतिरिक्त चीनी मिलाने से बचना चाहिए और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की आदत भी बनाए रखनी चाहिए।
ब्लूबेरी और केफिर की स्मूदी से मिलेंगे एंटीऑक्सीडेंट और प्रोबायोटिक्स: ब्लूबेरी और केफिर से तैयार स्मूदी भी स्वास्थ्यवर्धक पेय का विकल्प है। ब्लूबेरी में एंथोसायनिन नामक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में भूमिका निभाते हैं। दूसरी ओर, केफिर एक किण्वित पेय है, जिससे प्रोटीन और लाभकारी सूक्ष्मजीव मिल सकते हैं। ये आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीव समुदाय के संतुलन और चयापचय संबंधी स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। इस स्मूदी को बनाने के लिए ब्लूबेरी और सादे केफिर का इस्तेमाल किया जा सकता है। स्वाद बढ़ाने के लिए अधिक चीनी या मीठे पदार्थ मिलाने से बचना बेहतर है। हालांकि, इसके संभावित लाभों को संतुलित आहार के संदर्भ में ही समझना चाहिए; इसे लिवर की बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं माना जा सकता।
अनार और अदरक के रस में मौजूद हैं उपयोगी वनस्पति यौगिक: अनार और अदरक का रस भी उन पेय पदार्थों में शामिल है, जिन्हें लिवर के अनुकूल खानपान में जगह दी जा सकती है। अनार में पॉलीफेनोल्स नामक वनस्पति यौगिक पाए जाते हैं, जो एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि के लिए जाने जाते हैं और कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में भूमिका निभा सकते हैं। अदरक में जिंजरोल्स मौजूद होते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुण पाए गए हैं। इन दोनों को मिलाकर तैयार किया गया पेय स्वाद के साथ कई उपयोगी यौगिक भी उपलब्ध करा सकता है। इसी तरह तरबूज और अदरक का रस भी एक अन्य विकल्प है। तरबूज में पानी की अच्छी मात्रा के साथ लाइकोपीन और विटामिन सी पाए जाते हैं, जबकि अदरक में मौजूद वनस्पति यौगिक चयापचय संबंधी स्वास्थ्य में भूमिका निभा सकते हैं। इन पेय पदार्थों को बनाते समय साबुत फल खाने को प्राथमिकता देना और रस में अतिरिक्त चीनी न मिलाना उपयोगी रहेगा।
कॉफी, कोको और ग्रीन टी को भी आहार में कर सकते हैं शामिल: लिवर के स्वास्थ्य को लेकर कॉफी पर व्यापक वैज्ञानिक शोध हुआ है। उपलब्ध अध्ययनों में नियमित कॉफी सेवन का संबंध लिवर में रेशेदार ऊतक बढ़ने, सिरोसिस और लिवर कैंसर के कम जोखिम से देखा गया है। कॉफी में थोड़ा कोको मिलाने से फ्लेवेनॉल्स नामक एंटीऑक्सीडेंट यौगिक भी मिलते हैं। इसके अलावा, ग्रीन टी में कैटेचिन नामक यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें ईजीसीजी भी शामिल है। फैटी लिवर की बीमारी में इन यौगिकों के संभावित प्रभावों पर शोध किया गया है। ग्रीन टी का सेवन करते समय उसमें बहुत कम शहद मिलाया जा सकता है, लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि शहद भी अतिरिक्त शर्करा का स्रोत है। इसी तरह, पुदीने के साथ ब्लैक टी एक विकल्प हो सकती है। ब्लैक टी में थियाफ्लेविन्स और अन्य पॉलीफेनोल्स होते हैं, जबकि पुदीना बिना अतिरिक्त चीनी के स्वाद बढ़ाता है।
कम चीनी, संतुलित भोजन और व्यायाम से बेहतर रहेगी लिवर की सेहत: इन सातों पेय पदार्थों को संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है, लेकिन लिवर को स्वस्थ रखने के लिए केवल पेय पदार्थों पर निर्भर रहना उचित नहीं है। भोजन में अतिरिक्त चीनी और मीठे पेय की मात्रा सीमित रखें तथा फल, सब्जियां और अन्य प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें। नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ चयापचय बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। किसी व्यक्ति को फैटी लिवर या लिवर से जुड़ी अन्य बीमारी है, तो उसे केवल घरेलू पेय के भरोसे इलाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में चिकित्सक की सलाह के अनुसार जांच, खानपान में बदलाव और उपचार जरूरी हो सकते हैं। किसी नए आहार या स्वास्थ्य कार्यक्रम को अपनाने से पहले अपनी सेहत और जरूरतों के अनुरूप चिकित्सकीय सलाह लें।














































