एसजीपीजीआई में प्रदेश का पहला नोटो-अनुमोदित ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू
लखनऊ। ब्रेन डेथ के कठिन पलों में शोकाकुल परिवारों को संबल देने और अंगदान के महत्व को समझाने के उद्देश्य से राजधानी लखनऊ में एक विशेष पहल की शुरुआत हुई है। राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन, उत्तर प्रदेश (सोट्टो – उ0 प्र0) तथा संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआईएमएस) के चिकित्सालय प्रशासन विभाग ने नेफ्रोलॉजी विभाग और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) के तत्वावधान में पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “लाइफकनेक्ट ट्रांस-कोऑर्ड” का शुभारंभ किया। यह प्रशिक्षण 25 से 29 अक्टूबर 2026 तक संस्थान के एच०जी० खुराना सभागार में आयोजित किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में इस तरह का संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम पहली बार आयोजित किया जा रहा है। नोटो द्वारा अनुमोदित इस पांच दिवसीय पाठ्यक्रम के अंतर्गत 45 से अधिक विषयों पर गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूर्ण होने पर 100 से अधिक प्रतिभागियों को नोटो पंजीकरण संख्या सहित आधिकारिक प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा, जिससे प्रदेश को प्रमाणित व पेशेवर ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर्स का एक सुदृढ़ समूह मिलेगा। वर्तमान में प्रदेश में अंग एवं कॉर्निया प्रत्यारोपण के कुल 133 केंद्र हैं, जिनमें से मुख्यतः ठोस अंग प्रत्यारोपण केंद्रों से जुड़े सरकारी व निजी दोनों क्षेत्रों के समन्वयक इसमें भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम के पहले दिन की शुरुआत सोट्टो-उ0प्र0 द्वारा तैयार की गई एक भावनात्मक डॉक्यूमेंट्री से हुई, जिसने अंगदान से जुड़े परिवारों के अनुभवों को साझा किया।
- उद्घाटन सत्र में सोट्टो-उ0प्र0 के प्रभारी डॉ० क्रिस अग्रवाल ने सभी का स्वागत किया।
- नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो० नारायण प्रसाद ने कहा कि प्रदेश में अंगदान की अपार संभावनाएं हैं और समय रहते हर आईसीयू में संभावित अंगदाता की पहचान करना अनिवार्य है।
- मोहन फाउंडेशन के विशेषज्ञों (सुश्री जया जयराम, डॉ० आर० राघवेन्द्रन, डॉ० आर० चिन्नादुरै एवं सुश्री ललिता रघुराम) ने केस स्टडीज, फिल्मों और इंटरैक्टिव गतिविधियों के माध्यम से ब्रेन स्टेम डेथ की पहचान, अंगदाता की देखभाल तथा दुखी परिवारों से संवेदनशील संवाद के गुर सिखाए।
- सोट्टो-उ0प्र0 के संयुक्त निदेशक डॉ० राजेश हर्षवर्धन ने अंग आवंटन में संगठन की भूमिका स्पष्ट की, जिसके बाद आईसीयू ऑडिट और चुनौतियों पर एक विस्तृत पैनल चर्चा आयोजित की गई।

सोट्टो-उ0प्र0 के प्रयासों से राज्य में अंगदान को लेकर सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं:
- 8 अंगदान से 22 जीवन रोशन: अगस्त 2025 से अब तक लखनऊ के विभिन्न प्रमुख अस्पतालों (एसजीपीजीआई, केजीएमयू, डॉ० राम मनोहर लोहिया संस्थान, कमांड हॉस्पिटल एवं अपोलोमेडिक्स) में 8 परिवारों ने अंगदान का साहसिक निर्णय लेकर 22 लोगों को नया जीवन दिया।
- एसजीपीजीआई की उपलब्धियां: संस्थान में फरवरी 2026 में पहला कैडेवरिक मल्टी-ऑर्गन ट्रांसप्लांट, अप्रैल 2026 में प्रदेश का पहला सफल हृदय प्रत्यारोपण तथा मई 2026 में पहली बार मृत अंगदाता से कॉर्निया प्राप्त करने का कीर्तिमान स्थापित हुआ।
- राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी: ‘भारतीय अंगदान दिवस 2024’ के अवसर पर देश भर में सर्वाधिक ऑनलाइन अंगदान संकल्प उत्तर प्रदेश से प्राप्त हुए।
- नए केंद्रों का विस्तार: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर में ₹1.5 करोड़ की लागत से रीनल ट्रांसप्लांट केंद्र स्थापित किया जा रहा है। वहीं एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा की टीम को किडनी प्रत्यारोपण और केजीएमयू को फेफड़ा प्रत्यारोपण के लिए सोट्टो द्वारा अनुदान व प्रशिक्षण दिया गया है।
- नीतिगत सुधार: कॉर्निया-जनित अंधता निवारण के लिए राज्य स्तरीय संगोष्ठी ‘नेत्रमंथन’ के बाद टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इसके अलावा, प्रत्यारोपण समन्वयकों का एक अलग संवर्ग (कैडर) बनाने का प्रस्ताव भी शासन के विचाराधीन है।
सोट्टो-उ0प्र0 ने आम नागरिकों से अंगदान का संकल्प लेने और अपने इस निर्णय की जानकारी अपने परिवार के साथ साझा करने की अपील की है, क्योंकि अंतिम निर्णय परिवार की सहमति पर ही निर्भर करता है। इच्छुक नागरिक सोट्टो की आधिकारिक वेबसाइट [https://sottoupdoha.in/ पर जाकर ऑनलाइन संकल्प ले सकते हैं।
इस संपूर्ण अभियान में एसजीपीजीआई के निदेशक पद्मश्री प्रो० आर० के० धीमन का निरंतर मार्गदर्शन व सहयोग रहा है। कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन समारोह 26 अक्टूबर 2026 को आयोजित किया जाएगा।















































