सर्बिया के मध्यावधि संसदीय चुनाव में भ्रष्टाचार विरोधी छात्र आंदोलन से जुड़ी ‘स्टूडेंट लिस्ट’ ने ऐतिहासिक बढ़त हासिल की है। शुरुआती चुनावी अनुमानों के अनुसार, इस सूची को लगभग 52 प्रतिशत मत मिले, जबकि पूर्व राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक के गठबंधन को 39.3 प्रतिशत मत ही हासिल हुए। वर्ष 2012 से सर्बिया की सत्ता पर काबिज सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी के लिए यह परिणाम बड़ा झटका है। चुनावी रुझानों में छात्र समर्थित सूची को बहुमत मिलता दिखाई देने के बाद वुसिक ने भी अपनी हार स्वीकार कर ली। इस घटनाक्रम ने देश की राजनीति में नए दौर की शुरुआत के संकेत दिए हैं। लंबे समय से सत्ता में प्रभाव रखने वाली पार्टी को चुनौती देकर छात्र आंदोलन ने यह दिखाया कि भ्रष्टाचार, जवाबदेही और संस्थागत सुधार जैसे मुद्दे चुनावी मुकाबले में निर्णायक बन सकते हैं।
बहुमत के आंकड़े से आगे निकलने का अनुमान: सर्बिया की संसद में कुल 250 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 126 सीटों की आवश्यकता होती है। चुनावी अनुमानों में छात्र समर्थित गठबंधन को 135 से 140 सीटें मिलने की संभावना जताई गई, जबकि वुसिक के गठबंधन के खाते में लगभग 105 सीटें आने का आकलन सामने आया। वुसिक द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, छात्र समर्थित सूची को लगभग 22 लाख मत प्राप्त हुए, जबकि उनके गठबंधन को करीब 17 लाख 20 हजार मत मिले। शुरुआती रुझानों में सामने आए मत प्रतिशत और सीटों के अनुमान ने दोनों पक्षों के बीच स्पष्ट अंतर दिखाया। हालांकि, इन आंकड़ों को शुरुआती आकलन के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अंतिम राजनीतिक तस्वीर आधिकारिक नतीजों और सीटों के अंतिम बंटवारे से तय होगी। इसके बावजूद शुरुआती परिणामों ने सर्बिया में सत्ता परिवर्तन की संभावना को केंद्र में ला दिया है।
हार स्वीकार कर विपक्ष की भूमिका निभाने का ऐलान: चुनाव के आधिकारिक परिणाम घोषित होने से पहले ही अलेक्जेंडर वुसिक ने बेलग्रेड स्थित अपने चुनाव अभियान मुख्यालय से संबोधन में हार स्वीकार कर ली। उन्होंने कहा कि शुरुआती रुझान सामने रखने का उद्देश्य अपने समर्थकों को असमंजस से बचाना और उन अफवाहों को दूर करना था, जिनमें दावा किया जा रहा था कि वह हार नहीं मानेंगे। वुसिक ने आगे घोषणा की कि उनका राजनीतिक दल संसद में एकजुट विपक्ष के रूप में अपनी भूमिका निभाएगा। यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनकी पार्टी 14 वर्षों से सत्ता में रही थी। अब पार्टी को संसद में विपक्ष के रूप में अपनी रणनीति तय करनी होगी। चुनावी हार के बाद वुसिक के राजनीतिक प्रभाव और उनकी पार्टी की भविष्य की दिशा को लेकर भी सवाल उठेंगे।
नवंबर 2024 की दुर्घटना बनी जनआक्रोश की वजह: छात्र आंदोलन का विस्तार नवंबर 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन की छत गिरने की घटना के बाद हुआ था। इस हादसे में 16 लोगों की जान चली गई थी। घटना ने सरकारी कामकाज में लापरवाही, भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी को लेकर व्यापक नाराजगी पैदा की। इसके बाद छात्रों ने विश्वविद्यालयों में विरोध शुरू किया और कई संस्थानों में गतिविधियां बाधित हुईं। धीरे-धीरे प्रदर्शन विश्वविद्यालयों से निकलकर व्यापक जनआंदोलन में बदल गए। लगभग दो वर्षों तक जारी विरोध ने सरकार पर दबाव बनाए रखा और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना दिया। इसी आंदोलन से जुड़ी चुनावी सूची ने स्थापित दलों को चुनौती दी और संसदीय चुनाव में बढ़त हासिल की। इस तरह एक त्रासदी के बाद शुरू हुआ विरोध सर्बिया की राजनीति में बड़े बदलाव का माध्यम बन गया।
संस्थागत सुधार और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई का वादा: छात्र आंदोलन से जुड़े नेताओं ने चुनाव में केवल सत्ता परिवर्तन की मांग नहीं उठाई, बल्कि सरकारी संस्थाओं को मजबूत बनाने और व्यवस्था में निष्पक्षता लाने पर भी जोर दिया। आंदोलन का चुनावी एजेंडा भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर कदम उठाने, संस्थागत सुधार लागू करने और शासन को अधिक जवाबदेह बनाने पर आधारित था। नोवी साद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर इलिजा एसर्दैनोविक इस आंदोलन के नेतृत्व से जुड़े रहे, जबकि बेलग्रेड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और प्रमुख उम्मीदवार रादोमिर साइसिक ने चुनावी सफलता को ऐतिहासिक बताया। साइसिक ने कहा कि यह जीत डर पर साहस और निराशा पर उम्मीद की जीत है। उन्होंने इसे किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि के बजाय पूरे सर्बियाई समाज की जीत बताया। आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती चुनावी समर्थन को वास्तविक सुधारों में बदलना और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के अपने वादों को पूरा करना होगी।
आगे राष्ट्रपति चुनाव और नई सरकार पर रहेगी नजर: संसदीय चुनाव में अपनी पार्टी का नेतृत्व करने के लिए अलेक्जेंडर वुसिक ने 27 सितंबर को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। अब देश में नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए दिसंबर के अंत तक मतदान कराने का प्रस्ताव है। संसदीय चुनाव में 250 सीटों के लिए कुल 18 चुनावी सूचियां मैदान में थीं और लगभग 64 लाख 50 हजार मतदाता पंजीकृत थे। चुनावी हार के बाद वुसिक ने संसद में एकजुट विपक्ष की भूमिका निभाने की बात कही है। दूसरी ओर, छात्र समर्थित सूची की सफलता ने देश में संस्थागत बदलाव और भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई की उम्मीदों को बढ़ाया है। यदि शुरुआती अनुमान अंतिम परिणामों में भी कायम रहते हैं, तो नई संसद में सरकार बनाने के लिए छात्र समर्थित गठबंधन को पर्याप्त सीटें मिल सकती हैं। इसके बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई राजनीतिक व्यवस्था आंदोलन के दौरान उठाई गई मांगों पर किस तरह काम करती है।

















































