कानपुर के बिठूर में महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास योजनाओं का उद्घाटन करने के साथ ही कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की राजनीति पर सवाल उठाए। नाना राव पेशवा पार्क में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने 411 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने वाल्मीकि आश्रम में पूजा-अर्चना की और महर्षि वाल्मीकि जयंती पर प्रदेशवासियों को बधाई दी। अपने संबोधन में उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उन्हें छोटे मियां और बड़े मियां कहकर निशाने पर रखा। योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि इन दोनों दलों को घुसपैठियों से लगाव है और वे बांग्लादेशी घुसपैठियों के प्रति नरम रुख अपनाते हैं। उन्होंने कहा कि दूसरी तरफ दलितों, वंचितों, गरीबों, किसानों और युवाओं के हितों की अनदेखी की जाती है। मुख्यमंत्री के भाषण में धार्मिक स्थलों के विकास, पिछली सरकारों के कामकाज, सांप्रदायिक हिंसा और राजनीतिक विरासत जैसे मुद्दे शामिल रहे।
काशी और अयोध्या के बदलाव को बताया विकास का उदाहरण: मुख्यमंत्री ने अयोध्या की पुरानी स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान राम के लंका विजय के बाद अयोध्या लौटने की धार्मिक परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है, लेकिन लंबे समय तक इस नगरी में आवागमन के लिए टूटी-फूटी सड़कों पर निर्भर रहना पड़ता था। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या में बिजली की व्यवस्था और साफ-सफाई की स्थिति भी खराब थी तथा कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की सरकारों ने शहर के विकास को प्राथमिकता नहीं दी। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने अयोध्या के विकास की योजना बनाई, तो विरोधियों ने उसमें बाधा डालने का प्रयास किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम में हुए विकास का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले वहां एक समय में लगभग २० श्रद्धालु दर्शन कर पाते थे, जबकि अब करीब २० हजार श्रद्धालुओं के एक साथ दर्शन करने की सुविधा उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी का स्वरूप बदल चुका है और अयोध्या भी नए रूप में विकसित हुई है। उनके अनुसार, धार्मिक आस्था से जुड़े शहरों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार और विकास कार्यों का क्रियान्वयन सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण पर सरकार की योजना: योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण के साथ नगरी को त्रेता युग की परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मथुरा और वृंदावन को भव्य स्वरूप देने, प्रयागराज में महाकुंभ को दिव्य आयोजन के रूप में विकसित करने तथा मां विंध्यवासिनी धाम में गलियारा बनाने की योजनाओं का उल्लेख किया। इसके साथ ही शुकतीर्थ, नैमिषारण्य और बिठूर के विकास को भी महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार धार्मिक और सामाजिक महापुरुषों से जुड़े स्थलों की सुरक्षा, संरचना और सुंदरता पर ध्यान दे रही है। उन्होंने बताया कि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर, सद्गुरु रविदास महाराज और महर्षि वाल्मीकि से संबंधित स्थलों पर चारदीवारी, छाजन या छत की व्यवस्था, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और सौंदर्यीकरण कराने की योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश में लगभग चार हजार ऐसे स्थलों पर काम शुरू करने की तैयारी है। उन्होंने इसे महापुरुषों के प्रति सम्मान और उनकी विरासत को संरक्षित करने से जुड़ा कदम बताया। कानपुर में वाल्मीकि जयंती के कार्यक्रम के दौरान इन योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने धार्मिक आस्था और विकास को साथ लेकर चलने की बात रखी।
पिछली सरकारों पर किसानों और युवाओं की उपेक्षा का आरोप: मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के लंबे शासनकाल का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस दौरान किसानों को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था, जिनमें कुछ किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाते थे। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों को भोजन के लिए संघर्ष करना पड़ता था और युवाओं को रोजगार नहीं मिलता था। योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि नौकरी देने की प्रक्रिया में युवाओं के अधिकारों पर डाका डाला जाता था और महिलाओं की सुरक्षा के मामले में भी समाजवादी पार्टी की सरकार विफल रही। उन्होंने कहा कि उस समय दबंग लोग व्यापारियों और गरीबों की जमीनों पर कब्जा करते थे तथा दंगाइयों को मुख्यमंत्री आवास पर सम्मानित किए जाने जैसी घटनाएं सामने आती थीं। मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों से सवाल किया कि जो लोग अपने शासनकाल में प्रदेश में सुरक्षा और विकास की व्यवस्था नहीं संभाल सके, वे अब जनता के सामने किस आधार पर अपनी उपलब्धियां रख रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकारों की नीतियों ने आम लोगों, किसानों, युवाओं और व्यापारियों को नुकसान पहुंचाया। उनके भाषण में कानून-व्यवस्था और रोजगार का मुद्दा विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक आरोपों का प्रमुख आधार बना।
पुरानी हिंसक घटनाओं का उल्लेख कर कानून-व्यवस्था पर सवाल: योगी आदित्यनाथ ने कोसी कलां में हुए दंगे और मथुरा के जवाहर बाग की घटना का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी के शासनकाल पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जवाहर बाग में समाजवादी पार्टी से जुड़े एक नेता ने सैकड़ों एकड़ जमीन पर कब्जा कर निर्माण कार्य कर लिया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, जब कब्जा हटाने के लिए पुलिस अधीक्षक मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष यादव वहां पहुंचे, तो कब्जा करने वाले समूह से जुड़े लोगों ने दोनों पुलिस अधिकारियों की हत्या कर दी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं थे, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की स्थिति कैसी रही होगी। मुख्यमंत्री ने मुजफ्फरनगर हिंसा का भी उल्लेख किया और कहा कि उस समय मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, मेरठ, बुलंदशहर तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दूसरे इलाकों में लंबे समय तक तनाव बना रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि भीषण ठंड में विस्थापित लोगों को मुश्किल परिस्थितियों में रहना पड़ा, जबकि तत्कालीन सरकार ने उनकी पीड़ा को गंभीरता से नहीं लिया। योगी ने इन घटनाओं को याद दिलाते हुए कहा कि प्रदेश की जनता ने अपने अनुभवों के आधार पर पिछली सरकारों के कामकाज का मूल्यांकन किया और राजनीतिक बदलाव का फैसला लिया।
विरासत के सहारे सत्ता पाने पर अखिलेश यादव को घेरा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्हें एक बार राजनीतिक विरासत के कारण सत्ता हासिल हुई थी, लेकिन ऐसा बार-बार नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि चुनाव में जनता का समर्थन हासिल करने के लिए जमीन पर काम करना पड़ता है और केवल पारिवारिक विरासत के भरोसे राजनीतिक सफलता की उम्मीद नहीं की जा सकती। योगी ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल के कामकाज को देखकर प्रदेश की जनता उसे सत्ता से बाहर कर चुकी है और अब उसके लिए वापसी का रास्ता आसान नहीं है। उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर घुसपैठियों के समर्थन तथा आम लोगों के हितों की अनदेखी का आरोप भी दोहराया। कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं और इस पर्व के महत्व पर एक पत्र भी लिखा। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि जयंती पर सार्वजनिक अवकाश महर्षि वाल्मीकि के प्रति सम्मान का प्रतीक है। कानपुर के इस समारोह में विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और धार्मिक स्थलों के संरक्षण की योजनाओं के साथ मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर राजनीतिक हमला करते हुए कानून-व्यवस्था, रोजगार, किसानों की स्थिति और विरासत की राजनीति को प्रमुखता से उठाया।

















































