हिमाचल प्रदेश के Nahan में वाल्मीकि चौक पर 23 अक्टूबर को हुई पत्थरबाजी और दो समुदायों के बीच टकराव के बाद जिला प्रशासन ने एहतियाती प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। सिरमौर की जिला मजिस्ट्रेट प्रियंका वर्मा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के अंतर्गत आदेश जारी कर संवेदनशील क्षेत्रों में 29 अक्टूबर 2026 तक विभिन्न सार्वजनिक गतिविधियों पर रोक लगाई है। प्रशासन के मुताबिक, प्रतिबंध दोसड़का से वाल्मीकि चौक होते हुए दिल्ली गेट तक के मार्ग और वाल्मीकि चौक से प्रवेश द्वार बस स्टैंड तक जाने वाले रास्ते पर लागू होंगे। इन मार्गों के दोनों ओर स्थित आसपास के क्षेत्र भी आदेश के दायरे में शामिल किए गए हैं। यह फैसला उस आशंका के मद्देनजर लिया गया है कि विवाद के बाद किसी विरोध प्रदर्शन या भीड़ जुटने से स्थिति फिर बिगड़ सकती है।
हिंसा में पुलिस और दोनों समुदायों के लोग घायल: 23 अक्टूबर को वाल्मीकि चौक पर वाल्मीकि समुदाय और सिख समुदाय के सदस्यों के बीच शुरू हुआ विवाद हिंसक हो गया था। इस दौरान पत्थरबाजी हुई, जिसमें दोनों समुदायों के लोगों के साथ पुलिसकर्मी भी घायल हुए। घटना में सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचने की सूचना सामने आई थी। टकराव के कारण क्षेत्र में सामान्य आवाजाही भी प्रभावित हुई, जिससे स्थिति की गंभीरता बढ़ गई। घटना के बाद प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों पर किसी भी नई गतिविधि को लेकर सतर्कता बढ़ाई है। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि पहले हुए विवाद का असर आगे किसी नए टकराव में न बदले और स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही तथा सुरक्षा व्यवस्था सामान्य बनी रहे।
पुलिस रिपोर्ट में संभावित विरोध का उल्लेख: पुलिस अधीक्षक सिरमौर की रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि 27 अक्टूबर को सुबह 10 बजे वाल्मीकि चौक पर लोग एकत्र हो सकते हैं। संभावित जुटान का कारण चौक की संरचना को हुए नुकसान के विरोध में प्रदर्शन बताया गया है। प्रशासन ने यह आशंका भी व्यक्त की है कि इस मौके पर केवल हिमाचल प्रदेश ही नहीं, बल्कि पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से भी निहंग सिख नाहन पहुंच सकते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों से लोगों के आने और दोनों समुदायों के बीच पहले से बने तनाव को देखते हुए किसी अप्रिय स्थिति से इनकार नहीं किया गया है। इसी संभावित जोखिम को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ जुटाने और विरोध से जुड़ी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए निषेधाज्ञा जारी की है।
हथियार रखने और भड़काऊ गतिविधियों पर रोक: आदेश के तहत सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना सार्वजनिक स्थान पर पांच या अधिक लोगों का एकत्र होना प्रतिबंधित रहेगा। बिना अनुमति रैली, जुलूस और प्रदर्शन करने तथा यातायात रोकने या बाधित करने वाली गतिविधियों पर भी पाबंदी रहेगी। प्रशासन ने लाठी, डंडे, खंजर, भाले, तलवार, गैंती और फावड़े सहित हथियारों तथा आपत्तिजनक वस्तुओं को लेकर चलने पर रोक लगाई है। सार्वजनिक स्थानों पर पत्थर फेंकना, भड़काऊ भाषण देना और सांप्रदायिक नारे लगाना भी प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल है। इसके अतिरिक्त मशाल, पुतले और टायर जैसी ज्वलनशील वस्तुओं को जलाने, पटाखे फोड़ने तथा भड़काऊ बैनर-पोस्टर लगाने की अनुमति नहीं होगी। इन निर्देशों का उद्देश्य ऐसे कदमों को रोकना है, जिनसे तनाव बढ़े या सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा पहुंचे।
जरूरी सेवाओं और मीडिया को राहत: जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधों के बावजूद आवश्यक सेवाओं का कामकाज जारी रहेगा। पुलिस, अग्निशमन सेवाओं, सेना, अर्धसैनिक बलों और कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में तैनात सरकारी कर्मचारियों को आदेशों से छूट दी गई है। बिजली और पानी की आपूर्ति तथा नगर सेवाओं से जुड़े आवश्यक वाहनों को भी अपने काम के लिए आने-जाने की अनुमति होगी। चिकित्सा आपातकाल में इस्तेमाल होने वाले वाहनों के साथ प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भी प्रतिबंधों से बाहर रखा गया है। आदेशों का पालन सुनिश्चित करने और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक सिरमौर को दी गई है। इससे प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बनाए रखते हुए जरूरी सेवाओं और आपातकालीन सहायता का संचालन जारी रखने में मदद मिलेगी।
29 अक्टूबर तक लागू रहेंगे प्रतिबंध: जिला मजिस्ट्रेट ने आदेश में स्पष्ट किया है कि निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रतिबंध 29 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे और इस अवधि में लोगों को प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। प्रशासन ने नागरिकों से शांति बनाए रखने, किसी भी तरह के तनाव को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों से बचने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है। अधिकारियों का जोर संभावित भीड़ और विरोध प्रदर्शन के कारण दोबारा हिंसा की स्थिति बनने से रोकने पर है। संवेदनशील मार्गों और आसपास के क्षेत्रों में लागू पाबंदियों के जरिए प्रशासन का लक्ष्य क्षेत्र में शांति कायम रखना और सार्वजनिक तथा निजी संपत्ति को आगे नुकसान पहुंचने से बचाना है।

















































