वैदिक ज्योतिष के अनुसार, 28 अक्टूबर 2026 के पंचांग में व्यतीपात और वरियान योग का उल्लेख है। इसके बाद 29 अक्टूबर को परिघ योग शुरू होगा। वहीं, करवा चौथ के अवसर पर सूर्य, बुध और शुक्र की तुला राशि में युति से त्रिग्रही योग बन रहा है। सूर्य और बुध की युति को बुधादित्य योग तथा बुध और शुक्र की युति को लक्ष्मी नारायण योग कहा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन ग्रह योगों को सुख-समृद्धि, आर्थिक उन्नति, करियर में प्रगति और रिश्तों में मधुरता से जोड़कर देखा जाता है। इस दौरान मेष, वृषभ, तुला और कुंभ राशि के जातकों के लिए विशेष शुभ संकेत बताए गए हैं। आइए, जानते हैं इन योगों के बनने का समय, इनका ज्योतिषीय प्रभाव और इनके पारंपरिक उपाय।
व्यतीपात योग: समय, प्रभाव और उपाय
समय: व्यतीपात योग 27 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजकर 52 मिनट पर शुरू हुआ और 28 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 18 मिनट पर समाप्त हो गया।
योग की प्रकृति: वैदिक ज्योतिष में व्यतीपात योग को अशुभ प्रकृति का योग माना जाता है। इस योग के दौरान मांगलिक कार्यों, नए महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत और बड़े फैसलों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। पूजा-पाठ, ध्यान, मंत्र जाप और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्यों को प्राथमिकता दी जाती है।
प्रभाव: ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस योग के दौरान जल्दबाजी में निर्णय लेने, क्रोध करने और बिना पूरी जानकारी के किसी काम में आगे बढ़ने से परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसलिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय तथ्यों की जाँच करना और विवादों से दूर रहना उचित माना जाता है।
उपाय: भगवान शिव की पूजा करें और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र दान करें। मन को शांत रखें और महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लें।
वरियान योग: समय, प्रभाव और उपाय
समय: वरियान योग 28 अक्टूबर 2026 को सुबह 7 बजकर 18 मिनट पर शुरू हुआ और 29 अक्टूबर को देर रात 3 बजकर 40 मिनट पर समाप्त होगा।
योग की प्रकृति: पारंपरिक वैदिक ज्योतिष में वरियान योग को शुभ माना जाता है। इस योग की अवधि में ज्ञान प्राप्त करने, धार्मिक गतिविधियों, योजनाओं को आगे बढ़ाने और सोच-समझकर महत्वपूर्ण कार्य करने को अनुकूल माना जाता है।
प्रभाव: इस योग के दौरान धैर्य, विवेक और योजनाबद्ध तरीके से काम करने पर जोर दिया जाता है। शिक्षा, कौशल विकास, आध्यात्मिक गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं पर ध्यान देना उपयोगी माना जाता है। हालांकि, किसी कार्य की सफलता केवल योग पर निर्भर नहीं करती; इसके लिए मेहनत, परिस्थितियों और उचित निर्णयों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
उपाय: भगवान विष्णु की पूजा करें। जरूरतमंदों को भोजन कराएं और अपने व्यवहार में ईमानदारी, संयम तथा धैर्य बनाए रखें।
परिघ योग: समय, प्रभाव और उपाय
समय: परिघ योग 29 अक्टूबर 2026 को सुबह 3 बजकर 40 मिनट पर शुरू होगा और 30 अक्टूबर को रात 12 बजकर 5 मिनट पर समाप्त होगा। इसके बाद शिव योग शुरू होगा।
योग की प्रकृति: पारंपरिक वैदिक ज्योतिष में परिघ योग को अशुभ प्रकृति का योग माना जाता है। इस दौरान नए महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने, बड़े समझौते करने और जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक कार्य, मंत्र जाप और आत्मचिंतन के लिए इस अवधि का उपयोग किया जा सकता है।
प्रभाव: ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, परिघ योग को बाधाओं, रुकावटों और कामकाज में सावधानी बरतने से जोड़ा जाता है। इस दौरान किसी महत्वपूर्ण समझौते या व्यावसायिक निर्णय से पहले सभी शर्तों की अच्छी तरह जाँच करनी चाहिए। परिवार और कार्यस्थल पर विवादों से बचने तथा धैर्य से काम लेने की सलाह दी जाती है।
उपाय: अपने इष्टदेव की पूजा करें। जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करें और किसी भी महत्वपूर्ण काम में आगे बढ़ने से पहले पूरी जानकारी प्राप्त करें। क्रोध और जल्दबाजी से बचें।
करवा चौथ पर त्रिग्रही योग: सूर्य, बुध और शुक्र की तुला राशि में युति
करवा चौथ के अवसर पर सूर्य, बुध और शुक्र की तुला राशि में युति से त्रिग्रही योग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, तीन ग्रहों का एक ही राशि में होना जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों पर प्रभाव डालता है। सूर्य को आत्मविश्वास, प्रतिष्ठा और नेतृत्व का कारक माना जाता है। बुध बुद्धि, संवाद, व्यापार और गणना से जुड़ा है, जबकि शुक्र सुख-सुविधाओं, प्रेम, आकर्षण और वैवाहिक जीवन का प्रतिनिधित्व करता है।
इन तीनों ग्रहों की युति को करियर, व्यापार, आर्थिक स्थिति और व्यक्तिगत संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस योग के प्रभाव से कुछ राशियों के जातकों को कार्यक्षेत्र में प्रगति, रुके हुए काम पूरे होने और आर्थिक स्थिति मजबूत होने के शुभ संकेत मिल सकते हैं।
लक्ष्मी नारायण योग: बुध और शुक्र की युति
तुला राशि में बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण योग बन रहा है। पारंपरिक वैदिक ज्योतिष में इस योग को धन, सुख-सुविधाओं, बुद्धिमत्ता, रचनात्मकता और आर्थिक उन्नति से जोड़कर देखा जाता है। इस योग के प्रभाव में व्यापार, कला, संचार, वित्त और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए अनुकूल संकेत बताए जाते हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस योग के दौरान आर्थिक योजनाओं पर ध्यान देने, व्यापारिक अवसरों का मूल्यांकन करने और संबंधों में मधुरता बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। हालांकि, वास्तविक परिणाम व्यक्ति की जन्मकुंडली और संबंधित ग्रहों की स्थिति पर भी निर्भर करते हैं।
बुधादित्य योग: सूर्य और बुध की युति
सूर्य और बुध की तुला राशि में युति से बुधादित्य योग बन रहा है। वैदिक ज्योतिष में इस योग को बुद्धि, संवाद क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता, प्रतिष्ठा और कार्यक्षेत्र में प्रगति से संबंधित माना जाता है।
इस योग के दौरान योजनाओं को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने, अपने कौशल को निखारने और कामकाज में व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया जाता है। नौकरीपेशा लोगों के लिए अपनी क्षमताएं दिखाने और व्यापारियों के लिए व्यावसायिक योजनाओं की समीक्षा करने का समय माना जाता है।
मेष राशि: करियर में प्रगति और वैवाहिक जीवन में मधुरता
मेष राशि के जातकों के लिए त्रिग्रही योग शुभ संकेत लेकर आने वाला माना जा रहा है। करियर के क्षेत्र में प्रगति के अवसर मिलेंगे और लंबे समय से रुके हुए काम पूरे करने की दिशा में सफलता मिलेगी। नौकरीपेशा लोगों को अपनी मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को गति मिलेगी। जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता बढ़ेगी और आपसी समझ बेहतर होगी। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी समय अनुकूल माना जा रहा है। नए अवसरों का लाभ उठाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करें।
उपाय: भगवान हनुमान की पूजा करें और जरूरतमंदों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार भोजन कराएं। महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय धैर्य बनाए रखें।
वृषभ राशि: धन लाभ और नौकरी में नए अवसर
वृषभ राशि के जातकों के लिए त्रिग्रही योग अत्यंत शुभ संकेत देने वाला माना जा रहा है। धन प्राप्ति के नए अवसर सामने आ सकते हैं। करियर में अचानक लाभ देने वाले अवसर मिलेंगे और लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने के संकेत हैं। नौकरीपेशा लोगों को कोई महत्वपूर्ण सूचना मिल सकती है। नौकरी बदलने की इच्छा रखने वाले जातकों को नए अवसरों पर विचार करने का मौका मिलेगा। व्यापारियों को लाभ प्राप्त होने के संकेत हैं। किसी नए व्यावसायिक प्रस्ताव पर आगे बढ़ने से पहले उसकी शर्तों और आर्थिक पक्ष की अच्छी तरह जाँच करें।
उपाय: मां लक्ष्मी की पूजा करें और जरूरतमंदों को भोजन या आवश्यक सामग्री दान करें। आर्थिक फैसले सोच-समझकर लें और अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखें।
तुला राशि: आत्मविश्वास, धन और सुख-सुविधाओं में वृद्धि
तुला राशि में सूर्य, बुध और शुक्र की युति होने के कारण इस राशि के जातकों के लिए त्रिग्रही योग विशेष महत्व रखता है। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और समाज में अपनी अलग पहचान बनाने के अवसर मिलेंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए कई रास्तों पर काम करने का मौका मिलेगा। कारोबार से जुड़े लोगों को मुनाफा प्राप्त होने के शुभ संकेत हैं। भाग्य का साथ मिलने से योजनाओं को आगे बढ़ाने में आसानी होगी। सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी के संकेत हैं। हालांकि, आर्थिक लाभ के लिए बनाई गई योजनाओं पर काम करते समय खर्च और जोखिम का हिसाब रखना आवश्यक है।
उपाय: मां लक्ष्मी की पूजा करें और जरूरतमंदों की सहायता करें। अपने व्यवहार में विनम्रता बनाए रखें तथा आर्थिक निर्णय लेते समय विवेक का प्रयोग करें।
कुंभ राशि: आमदनी में बढ़ोतरी और करियर में तरक्की
कुंभ राशि के जातकों के लिए यह ग्रह योग शुभ संकेत देने वाला माना जा रहा है। आमदनी बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं और करियर में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुलेंगे। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए; मेहनत और अनुशासन से प्रदर्शन बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को नए अवसरों से जुड़ी अच्छी सूचना मिल सकती है। व्यापारियों को लाभकारी सौदे मिलने और किसी महत्वपूर्ण डील को अंतिम रूप देने के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। नए प्रस्तावों पर आगे बढ़ने से पहले उनकी शर्तों की समीक्षा अवश्य करें।
उपाय: भगवान शिव की पूजा करें और जरूरतमंदों को अन्न दान करें। अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखें और महत्वपूर्ण योजनाओं को अनावश्यक रूप से दूसरों के सामने उजागर करने से बचें।
निष्कर्ष: 28 अक्टूबर 2026 के लिए वैदिक ज्योतिषीय गणना में व्यतीपात योग और वरियान योग का समय महत्वपूर्ण है, जबकि परिघ योग 29 अक्टूबर की सुबह शुरू होकर 30 अक्टूबर की रात 12 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। करवा चौथ के अवसर पर तुला राशि में सूर्य, बुध और शुक्र की युति से त्रिग्रही योग तथा सूर्य-बुध और बुध-शुक्र की युतियों से बुधादित्य और लक्ष्मी नारायण योग बनने की ज्योतिषीय व्याख्या की जाती है। इन योगों के आधार पर मेष, वृषभ, तुला और कुंभ राशि के लिए करियर, आर्थिक स्थिति और संबंधों से जुड़े शुभ संकेत बताए गए हैं। हालांकि, व्यक्ति के जीवन में इन संकेतों का फल कम-ज्यादा उसकी जन्मकुंडली, लग्न कुंडली, दशा और ग्रहों की स्थिति के अनुसार हो सकता है।















































