उत्तर प्रदेश विधान परिषद की ११ सीटों पर हुए चुनाव की मतगणना के दौरान भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। अलग-अलग चरणों में जारी परिणामों और रुझानों के मुताबिक, छह सीटों के नतीजे घोषित होने के समय भाजपा ने चार और सपा ने दो सीटें जीती थीं। इसके बाद सात सीटों के परिणाम स्पष्ट होने के अपडेट में भाजपा की पांच और सपा की दो सीटों पर जीत बताई गई। मतगणना जारी रहने के दौरान लखनऊ खंड स्नातक सीट पर समाजवादी पार्टी की कांति सिंह, वाराणसी खंड स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा और इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक सीट पर डॉ. मानसिंह यादव की बढ़त की खबरें सामने आती रहीं। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी ध्रुव त्रिपाठी आगे बताए गए, जबकि आगरा स्नातक सीट पर भाजपा के डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह की बढ़त की सूचना दी गई। घोषित परिणामों में मेरठ स्नातक सीट पर दिनेश कुमार गोयल, लखनऊ शिक्षक सीट पर उमेश द्विवेदी, मेरठ शिक्षक सीट पर श्रीचंद शर्मा और बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट पर हरि सिंह ढिल्लों की जीत बताई गई। वाराणसी शिक्षक सीट पर सपा के लाल बिहारी यादव और आगरा शिक्षक सीट पर डॉ. आकाश अग्रवाल ने जीत हासिल की। बाद के अपडेट में इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर भी सपा प्रत्याशी डॉ. मानसिंह यादव की जीत की पुष्टि हुई। चुनाव की गिनती के दौरान जारी अलग-अलग आंकड़े मतगणना के विभिन्न चरणों की स्थिति बताते रहे। इस बीच दोनों प्रमुख दलों के नेताओं ने नतीजों को अपने पक्ष में राजनीतिक संदेश के रूप में पेश किया। सपा नेताओं ने इसे जनता के बदलते रुझान और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी से जोड़ा, जबकि भाजपा नेताओं ने अपने प्रदर्शन का बचाव किया और विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। मतगणना की प्रक्रिया को लेकर कुछ प्रत्याशियों ने गंभीर सवाल उठाए, वहीं आगरा के पुलिस आयुक्त ने वहां की गणना शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने की बात कही।
कांति सिंह ने बढ़त का श्रेय कार्यकर्ताओं और महिला समर्थकों को दिया: लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सपा प्रत्याशी कांति सिंह की बढ़त मतगणना के कई चरणों में बनी रही। पहले चरण में वह भाजपा प्रत्याशी अवनीश कुमार सिंह से २,१९३ वोट आगे थीं। चौथे चरण की गिनती के बाद उनकी बढ़त ७,६०० वोट बताई गई। उस समय कांति सिंह को २५,३८२ और अवनीश कुमार सिंह को १७,७९७ मत मिलने की जानकारी सामने आई। पांचवें चरण की मतगणना शुरू होने पर सपा प्रत्याशी के चुनाव अभिकर्ता राम सिंह राणा ने दावा किया कि उनकी बढ़त लगातार बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा प्रत्याशी की ओर से मतगणना प्रक्रिया को चार-पांच बार रोकने की कोशिश की गई। राणा के मुताबिक, रात में लाठीचार्ज हुआ, कुर्सियां तोड़ी गईं और समाजवादी कार्यकर्ताओं को पूरी रात परेशान किया गया, लेकिन कार्यकर्ता पीछे नहीं हटे। बाद के अपडेट में पांच चरणों की गिनती के बाद कांति सिंह को ३२,२२८ और अवनीश कुमार सिंह को २१,८४३ मत मिलने की जानकारी दी गई। इस समय सपा प्रत्याशी १०,३८५ वोटों से आगे थीं। कांति सिंह ने कहा कि हर चरण में उन्हें दो हजार से ढाई हजार मतों की बढ़त मिल रही थी और उन्हें अपने समर्थकों पर पूरा भरोसा है। उन्होंने रायबरेली, प्रतापगढ़ और हरदोई के जिला अध्यक्षों तथा प्रभारियों की मौजूदगी का उल्लेख किया। उनके अनुसार, विधानसभा अध्यक्षों, जिला अध्यक्षों, विधायकों, सांसदों और युवा कार्यकर्ताओं ने भी चुनाव में सहयोग किया। कांति सिंह ने विशेष रूप से महिला कार्यकर्ताओं की मेहनत की सराहना की और कहा कि महिलाओं ने दिन-रात काम करते हुए प्रत्येक क्षेत्र में २०० से २५० वोट दिलाने में मदद की। उन्होंने कामिनी पटेल का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने ३०० से ४०० प्रपत्र भरवाए और लोगों को मतदान के लिए प्रेरित किया। कांति सिंह ने सभी समर्थकों के सहयोग के लिए सम्मान और आभार जताया तथा ईश्वर को उन्हें शक्ति देने के लिए धन्यवाद दिया। लखनऊ की मतगणना के दौरान बढ़त के इन आंकड़ों और प्रक्रिया में बाधा डालने के आरोपों ने इस सीट को चुनावी मुकाबले के सबसे चर्चित केंद्रों में शामिल कर दिया।
वाराणसी और इलाहाबाद-झांसी में सपा प्रत्याशियों की मजबूत स्थिति: वाराणसी खंड स्नातक सीट पर सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा ने शुरुआती चरणों में भाजपा के केदारनाथ सिंह पर बढ़त बनाई। पहले चरण की गिनती पूरी होने पर आशुतोष सिन्हा को ५,२३५ मत मिले, जबकि केदारनाथ सिंह के खाते में ३,७४० वोट आए। दूसरे चरण की गणना जारी होने के दौरान सपा प्रत्याशी की बढ़त पर नजर बनी रही। तीसरे चरण तक आशुतोष सिन्हा लगभग २,९०० मतों से आगे बताए गए। बाद के अपडेट में तीसरे चरण की गिनती पूरी होने पर उन्हें १६,१९५ और भाजपा प्रत्याशी को ११,८८८ वोट मिलने की जानकारी सामने आई। इस तरह आशुतोष सिन्हा की बढ़त ४,३०७ मतों की बताई गई। वाराणसी में कुल नौ चरणों में मतगणना होनी थी और एक अपडेट में छह चरणों की गिनती शेष रहने का उल्लेख था। आशुतोष सिन्हा ने चुनाव को प्रभावित करने के प्रयासों का आरोप भी लगाया। इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक सीट पर मतगणना झांसी के बीकेडी कॉलेज में हुई। शुरुआती अपडेट में छठे चरण तक ७० हजार से अधिक मतों की गिनती पूरी होने की सूचना दी गई थी। उस समय सपा प्रत्याशी डॉ. मानसिंह यादव को ३७,०७२ वोट मिले थे, जबकि भाजपा के अशोक कुमार राठौर को २१,८१५ मत प्राप्त हुए थे। इस चरण में मानसिंह यादव १५,२५७ वोटों से आगे चल रहे थे। बाद में अंतिम परिणाम से संबंधित जानकारी में डॉ. मानसिंह यादव की जीत घोषित हुई। उन्हें कुल ६०,३५८ मत मिले, जबकि अशोक कुमार राठौर को ३२,६९५ वोट प्राप्त हुए। कुल १,०९,४८२ मतपत्रों की गणना के बाद सपा प्रत्याशी ने २७,६६३ मतों के अंतर से जीत हासिल की। मतगणना के दौरान उनकी बढ़त लगातार चर्चा में रही और अंतिम परिणाम ने इस सीट पर सपा की जीत की पुष्टि कर दी। इन दोनों स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में सपा प्रत्याशियों की बढ़त को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखाई दिया, जबकि परिणामों के साथ ही भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई।
आगरा में डॉ. आकाश अग्रवाल की जीत और मतगणना को लेकर गंभीर आरोप: आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल विजयी घोषित किए गए। रिटर्निंग अधिकारी नगेंद्र प्रताप ने उन्हें जीत का प्रमाणपत्र सौंपा। मतगणना के दौरान दूसरे चरण के आंकड़ों में डॉ. आकाश अग्रवाल को ६,७०१ वोट मिले थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी हरि किशोर तिवारी को ४,०१३ मत प्राप्त हुए थे। अन्य प्रत्याशियों में डॉ. जगवीर सिंह को ४०१, दिलीप कुमार अमौरिया को ४७४, रणविजय यादव को ५२६, मोहम्मद वसीम कलाम को २९०, धीरज सिंह को १३०, ब्रह्मजीत सिंह को ५८, राहुल पाराशर को ६०, चंद्र प्रकाश को १९ और रामू प्रसाद को तीन वोट मिले थे। अस्वीकृत मतों की संख्या १,१२६ बताई गई थी। जीत के बाद डॉ. आकाश अग्रवाल भावुक हुए और उन्होंने मतगणना के दौरान मारपीट, शिक्षकों को परेशान करने, डराने-धमकाने तथा बूथ पर कब्जा करने के प्रयासों के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि शिक्षक साथियों को बहुत परेशान किया गया और ऐसी स्थिति देखना पीड़ादायक था। उनके अनुसार, इस चुनाव में शिक्षकों को जिस तरह के दबाव का सामना करना पड़ा, उससे शिक्षक विधान परिषद चुनाव की प्रकृति बदल गई है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की छवि आतंकवादियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली सरकार की रही है, लेकिन अपने साथियों को डराए-धमकाए जाते देखने और बूथ कब्जाने के आरोपों के बाद उनकी धारणा को झटका लगा। उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सभी समाजों के लिए काम करते हैं। दूसरी ओर, आगरा के पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार शुरू हुई मतगणना पूरी हो चुकी है और प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। उनके मुताबिक, एक प्रत्याशी की जीत घोषित की जा चुकी थी, जबकि दूसरी जगह मतगणना पूरी होने के बाद अंतिम मतों की गिनती की प्रक्रिया जारी थी। उन्होंने यह भी बताया कि विजयी प्रत्याशियों के साथ पुलिस बल तैनात किया गया। इस तरह आगरा में प्रत्याशी की ओर से लगाए गए आरोप और पुलिस प्रशासन की ओर से मतगणना शांतिपूर्ण रहने का बयान, दोनों चुनावी घटनाक्रम का हिस्सा बने। आगरा स्नातक सीट पर शुरुआती चरण में भाजपा प्रत्याशी डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह, जिन्हें गुरुजी कहा जाता है, को ५,८४८ वोट मिले थे, जबकि सपा प्रत्याशी शशांक यादव उर्फ सीटू को ५,१३४ मत प्राप्त हुए थे। इस चरण में भाजपा प्रत्याशी आगे चल रहे थे और बाद के अपडेट में उनकी जीत की जानकारी दी गई।
गोरखपुर में सपा प्रत्याशी का मतगणना बहिष्कार, भाजपा पर गंभीर आरोप: गोरखपुर में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी संजयन त्रिपाठी ने मतगणना का बहिष्कार करने की बात कही। उन्होंने बताया कि तीन चरणों तक गणना सामान्य रूप से चल रही थी और निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव लगभग ४५० वोटों से आगे थे। संजयन त्रिपाठी के अनुसार, इसके बाद अचानक मतों का रुझान भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में बदलने लगा और उन्हें लगा कि पूरी प्रक्रिया पहले से तय परिणाम की दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने इसी कारण मतगणना का बहिष्कार करने का फैसला लिया। सपा प्रत्याशी ने पुलिस पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया और दावा किया कि सत्ताधारी दल के प्रत्याशी को जिताने के लिए प्रयास किए जा रहे थे। उन्होंने इस घटनाक्रम को लोकतंत्र की हत्या बताया। दूसरी ओर, चुनावी अपडेट में गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी ध्रुव त्रिपाठी के आगे चलने की सूचना दी गई थी। प्रदेश की ११ सीटों पर मुकाबले के दौरान जारी एक सूची में लखनऊ शिक्षक सीट पर भाजपा की जीत, वाराणसी शिक्षक सीट पर सपा की जीत, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट पर भाजपा की जीत, मेरठ स्नातक सीट पर भाजपा की जीत, इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर सपा की बढ़त, वाराणसी स्नातक सीट पर सपा की बढ़त, लखनऊ स्नातक सीट पर सपा की बढ़त, आगरा शिक्षक सीट पर सपा की बढ़त, आगरा स्नातक सीट पर भाजपा की बढ़त और मेरठ शिक्षक सीट पर भाजपा की जीत का उल्लेख था। एक अन्य अपडेट में इन सीटों की स्थिति के साथ यह भी बताया गया कि कुल छह सीटों पर भाजपा और पांच पर सपा प्रत्याशी आगे चल रहे थे। बाद के चरणों में कुछ सीटों के परिणाम घोषित हुए और स्थिति में बदलाव दर्ज किया गया। मतगणना के दौरान आए इन अलग-अलग रुझानों ने चुनावी मुकाबले को और रोचक बनाया। सपा प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने कुछ सीटों पर प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए, जबकि भाजपा नेताओं ने अपनी जीत को मतदाताओं के समर्थन और विकास के मुद्दे से जोड़ा। गोरखपुर की घटना ने मतगणना प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक विवाद को और बढ़ाया।
अखिलेश यादव का पीडीए पर बयान, शिवपाल की कार्यकर्ताओं से अपील: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आगरा में डॉ. आकाश अग्रवाल की जीत को लेकर पीडीए की व्याख्या में नया अर्थ जोड़ा। उन्होंने कहा कि अब पीडीए में ‘अ’ का मतलब अग्रवाल और अग्रवंशी समाज भी है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि डॉ. आकाश अग्रवाल के साथ भाजपा के लोगों और उनके साथियों ने दुर्व्यवहार किया, जिससे अग्रहरि समाज के लोग आहत, दुखी और अपमानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अग्रवाल समाज का सपा के साथ आना पार्टी के जनाधार और मनोबल को मजबूत करेगा। अखिलेश ने पीड़ित और उत्पीड़ित लोगों को पीडीए से जोड़ते हुए इसे पांच प्रतिशत भाजपा समर्थकों और ९५ प्रतिशत पीडीए के बीच की लड़ाई बताया। उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे पार्टी के लिए पहले भी मार्गदर्शक थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे। एक अन्य संदेश में अखिलेश यादव ने विजयी प्रत्याशियों को बधाई देते हुए कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जीत की जानकारी सामाजिक माध्यमों से शांतिपूर्वक साझा की जाए और कोई जुलूस या हंगामा न किया जाए, ताकि भाजपा के लोग सपा के बीच घुसकर माहौल न बिगाड़ सकें और पार्टी पर हुड़दंग का आरोप लगाने का अवसर न मिले। उन्होंने चेताया कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सपा की छवि खराब करने की कोशिश की जा सकती है। अखिलेश यादव ने विजयी विधान परिषद सदस्यों से उन कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और शुभचिंतकों की सूची तैयार करने को कहा, जिन्होंने जीत में सहयोग दिया, ताकि पार्टी उनकी भूमिका का सम्मान कर सके। शिवपाल सिंह यादव ने भी विजयी सपा प्रत्याशियों को बधाई दी और संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं, समर्थकों तथा सहयोगियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि कम अंतर से पीछे रह गए साथियों का संघर्ष भी पार्टी का गौरव है और सभी को हौसला बनाए रखना चाहिए। शिवपाल ने कहा कि विधान परिषद चुनाव के बाद वर्ष २०२७ के विधानसभा चुनाव में जनता के विश्वास, कार्यकर्ताओं की मेहनत और पीडीए की एकजुटता के आधार पर उत्तर प्रदेश में समाजवादी सरकार बनाना पार्टी का संकल्प है। उन्होंने समाजवादी विजय का शंखनाद होने और अगले विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक परिणाम लाने की बात कही। इन बयानों के जरिए सपा नेतृत्व ने विधान परिषद चुनाव के परिणामों को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी और सामाजिक गठबंधन को मजबूत करने से जोड़कर पेश किया।
भाजपा, आप और कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रियाएं: चुनावी नतीजों को लेकर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भाजपा पांच सीटें जीत चुकी है और पार्टी ने पिछला प्रदर्शन दोहराया है। उन्होंने स्वीकार किया कि भाजपा को अधिक सीटों की उम्मीद थी, लेकिन उतनी सीटें नहीं मिल सकीं। मौर्य ने कहा कि समाजवादी पार्टी का खाता उस जगह कैसे खुल गया, जहां नहीं खुलना चाहिए था, इस पर विचार किया जाएगा और आगामी चुनावों में भाजपा की जीत के लिए प्रयास होंगे। भाजपा के दिनेश कुमार गोयल ने मेरठ-सहारनपुर खंड स्नातक सीट पर जीत के बाद कहा कि विपक्ष इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीन को लेकर सवाल उठाता रहा है, लेकिन मतपत्र से हुए चुनाव में भी भाजपा ने जीत दर्ज की। उन्होंने दावा किया कि चुनाव इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीन से हो या मतपत्र से, भाजपा को जीत मिलती है। गोयल ने कहा कि उन्हें विकास के मुद्दे पर वोट मिले हैं और अब उनकी प्राथमिकता क्षेत्र में विकास कार्य कराना तथा जनता की समस्याओं का समाधान करना होगी। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने चुनावी अनियमितताओं के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव हारने के बाद अखिलेश यादव के पास कहने के लिए कुछ नहीं रहता और वह वोट चोरी, धांधली तथा इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीन को दोष देने लगते हैं। राजभर ने कहा कि विपक्ष को मिले जनादेश को स्वीकार करना चाहिए और अगली बार अधिक मेहनत तथा तैयारी के साथ चुनाव लड़ना चाहिए। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सामाजिक माध्यम पर टिप्पणी करते हुए सवाल उठाया कि इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीन से नरेंद्र मोदी लोकप्रिय और मतपत्र से हुए चुनाव में अलोकप्रिय कैसे हो जाते हैं। उन्होंने वाराणसी के विधान परिषद चुनाव का उल्लेख करते हुए इसे मतपत्र से हुए चुनाव का उदाहरण बताया। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव के नतीजे जनता के रुझान को दिखाते हैं और विपक्षी गठबंधन के प्रत्याशियों की जीत भाजपा की विदाई का संकेत है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष २०२७ के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सीटें सौ से कम रह जाएंगी। सपा प्रवक्ता अभिषेक बाजपेयी ने भी भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अयोध्या से बनारस तक अखिलेश यादव को जनसमर्थन मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष २०२४ में अयोध्या, वर्ष २०२६ में बनारस और वर्ष २०२७ में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उन्होंने भाजपा पर जनता का विश्वास तोड़ने और चंदे की चोरी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता के साथ विश्वासघात करना बड़ा पाप है और श्रीराम ने भाजपा को आईना दिखा दिया है। इन बयानों से स्पष्ट हुआ कि विधान परिषद चुनाव के नतीजों के साथ ही राजनीतिक दलों ने आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति, जनसमर्थन और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर अपने-अपने दावे तेज कर दिए हैं।















































