राजमा खाने से क्यों बढ़ती है पेट फूलने की समस्या: राजमा पौष्टिक और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ है, लेकिन कुछ लोगों के लिए इसे पचाना मुश्किल हो सकता है। इसमें रैफिनोज नामक कार्बोहाइड्रेट और ऐसे किण्वनीय तत्व पाए जाते हैं, जो छोटी आंत में पूरी तरह नहीं पचते। जब ये तत्व बड़ी आंत में पहुंचते हैं, तो वहां मौजूद बैक्टीरिया इन्हें तोड़ने की प्रक्रिया में गैस बनाते हैं। इसी वजह से राजमा खाने के बाद पेट फूलना, भारीपन, डकार और गैस जैसी परेशानियां हो सकती हैं। जिन लोगों का पाचन तंत्र संवेदनशील है, उन्हें इसकी अधिक मात्रा खाने पर ज्यादा परेशानी महसूस हो सकती है। इससे बचने के लिए राजमा को पकाने से पहले पर्याप्त समय तक पानी में भिगोएं और भिगोने के बाद उस पानी को फेंककर साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद राजमा को पूरी तरह नरम होने तक पकाएं। शुरुआत में कम मात्रा में खाएं और शरीर की प्रतिक्रिया देखें। एक बार में बहुत ज्यादा राजमा खाने से बचें। यदि राजमा खाने के बाद बार-बार परेशानी होती है, तो कुछ समय के लिए इसकी मात्रा कम करके देखें और अपने भोजन तथा लक्षणों का रिकॉर्ड रखें।
छोले और चने से होने वाली गैस से ऐसे पाएं राहत: छोले प्रोटीन, फाइबर और कई पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हैं, लेकिन इनमें मौजूद किण्वनीय कार्बोहाइड्रेट और अधिक फाइबर कुछ लोगों में गैस तथा पेट फूलने की समस्या बढ़ा सकते हैं। खासकर जब कोई व्यक्ति एक बार में बहुत अधिक मात्रा में छोले खाता है, तो पाचन तंत्र पर दबाव बढ़ सकता है और पेट में भारीपन महसूस हो सकता है। जिन लोगों को पहले से गैस या पेट फूलने की शिकायत रहती है, उन्हें छोले सीमित मात्रा में खाने चाहिए। इन्हें बनाने से पहले अच्छी तरह भिगोना, भिगोने वाला पानी फेंकना और ताजे पानी में पूरी तरह पकाना उपयोगी रहता है। छोले को अधपका खाने से भी पाचन संबंधी परेशानी बढ़ सकती है। भोजन में फाइबर की मात्रा अचानक बढ़ाने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ाएं और पर्याप्त पानी पिएं। छोले खाने के बाद परेशानी होती है, तो इनकी मात्रा कम करें और देखें कि कम मात्रा में खाने पर शरीर कैसी प्रतिक्रिया देता है। भोजन आराम से चबाकर खाएं और एक ही समय में राजमा, छोले तथा दूसरी भारी दालों को अधिक मात्रा में खाने से बचें।
प्याज में मौजूद तत्व संवेदनशील पेट में बढ़ा सकते हैं ब्लोटिंग: भारतीय भोजन में प्याज का इस्तेमाल सब्जी, दाल, सलाद और कई दूसरे व्यंजनों में किया जाता है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह पेट फूलने की वजह बन सकता है। प्याज में फ्रुक्टान नामक किण्वनीय कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है, जो फॉडमैप समूह का हिस्सा है। संवेदनशील पाचन तंत्र और चिड़चिड़ी आंत की समस्या से परेशान लोगों में यह तत्व आंतों में पहुंचकर किण्वन और गैस बनने की प्रक्रिया को बढ़ा सकता है। इसके कारण पेट में गुड़गुड़ाहट, गैस, ऐंठन और ब्लोटिंग महसूस हो सकती है। यदि प्याज खाने के बाद नियमित रूप से ऐसी परेशानी होती है, तो कुछ दिनों तक इसकी मात्रा कम करके देखें। कच्चे प्याज की जगह कम मात्रा में अच्छी तरह पका हुआ प्याज इस्तेमाल करने से कुछ लोगों को राहत मिल सकती है, हालांकि हर व्यक्ति की सहनशीलता अलग होती है। सलाद और भोजन में प्याज की मात्रा पर ध्यान दें तथा यह भी देखें कि किन व्यंजनों के साथ इसे खाने पर परेशानी अधिक होती है। यदि प्याज के अलावा कई खाद्य पदार्थों से लक्षण बढ़ते हैं, तो चिकित्सक या आहार विशेषज्ञ की सलाह से भोजन में बदलाव करें।
दूध और उससे बने पदार्थों से परेशानी की वजह हो सकती है लैक्टोज असहिष्णुता: दूध शरीर को कैल्शियम और प्रोटीन देता है, लेकिन हर व्यक्ति का पाचन तंत्र इसे समान तरीके से स्वीकार नहीं करता। कुछ लोगों में लैक्टोज नामक दूध की प्राकृतिक शर्करा को पचाने के लिए जरूरी लैक्टेज एंजाइम पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता। इस स्थिति को लैक्टोज असहिष्णुता कहा जाता है। ऐसे लोगों को दूध पीने या दूध से बने कुछ पदार्थ खाने के बाद पेट फूलना, गैस, पेट में ऐंठन और दस्त जैसी शिकायत हो सकती है। यदि दूध पीने के बाद बार-बार ये लक्षण दिखाई देते हैं, तो कुछ समय तक दूध की मात्रा कम करके शरीर की प्रतिक्रिया पर ध्यान दें। चिकित्सकीय सलाह से लैक्टोज रहित दूध या ऐसे विकल्प चुने जा सकते हैं जिन्हें आपका पाचन तंत्र आसानी से स्वीकार करता हो। कुछ लोगों को दही जैसे किण्वित दुग्ध पदार्थ दूध की तुलना में बेहतर सहन होते हैं, लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए समान नहीं है। कैल्शियम और प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए दूध पूरी तरह बंद करने से पहले उचित विकल्पों के बारे में चिकित्सक या आहार विशेषज्ञ से सलाह लें। बिना जांच के खुद को लैक्टोज असहिष्णु मान लेना भी सही नहीं है।
चना, अरहर और काली उड़द की दाल से ब्लोटिंग होने पर अपनाएं ये उपाय: दालें प्रोटीन और फाइबर का महत्वपूर्ण स्रोत हैं, लेकिन कुछ लोगों को इन्हें खाने के बाद भी गैस और पेट फूलने की समस्या हो सकती है। खासतौर पर चने की दाल, अरहर की दाल और काली उड़द की दाल कुछ लोगों के पाचन तंत्र में परेशानी बढ़ा सकती हैं। इनमें मौजूद फाइबर और किण्वनीय कार्बोहाइड्रेट आंतों में गैस बनने का कारण बन सकते हैं। इससे बचने के लिए दालों को पकाने से पहले अच्छी तरह धोएं और जरूरत के अनुसार भिगोकर रखें। भिगोने के बाद पानी निकाल दें और दाल को पर्याप्त पानी में पूरी तरह पकाएं। एक बार में बड़ी मात्रा खाने के बजाय छोटी मात्रा से शुरुआत करें। भोजन में दालों की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं, ताकि पाचन तंत्र को उसके अनुरूप ढलने का समय मिले। खाना धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाएं। नियमित हल्की शारीरिक गतिविधि और भोजन के बाद थोड़ी देर टहलना भी पाचन को सहज रखने में मदद कर सकता है। पर्याप्त पानी पीना जरूरी है, लेकिन भोजन के साथ बहुत जल्दी-जल्दी खाने और जरूरत से ज्यादा मात्रा लेने से बचें। यदि किसी खास दाल से बार-बार परेशानी होती है, तो उसे कुछ समय सीमित करके दूसरे प्रोटीन स्रोतों के विकल्प पर आहार विशेषज्ञ से चर्चा करें।
पेट फूलने और गैस की परेशानी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान: राजमा, छोले, प्याज, दूध और कुछ दालों से होने वाली ब्लोटिंग को कम करने के लिए सबसे जरूरी है कि अपने शरीर की सहनशीलता को समझें। सभी खाद्य पदार्थ हर व्यक्ति को समान रूप से प्रभावित नहीं करते। इसलिए भोजन की मात्रा नियंत्रित रखें, खाने में जल्दबाजी न करें, भोजन अच्छी तरह चबाएं और एक ही समय में कई गैस बनाने वाले खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन न करें। कौन-सी चीज खाने के बाद परेशानी होती है, इसे समझने के लिए भोजन और लक्षणों की डायरी बनाएं। बिना चिकित्सकीय सलाह के लंबे समय तक कई खाद्य पदार्थ एक साथ बंद न करें, क्योंकि इससे जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। यदि पेट फूलने की समस्या लगातार बनी रहती है, बार-बार दस्त या कब्ज होता है, पेट में तेज दर्द रहता है, उल्टी होती है या बिना कारण वजन घटने लगता है, तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करें। पेट में बहुत तेज या अचानक दर्द, मल में खून, लगातार उल्टी अथवा गंभीर कमजोरी जैसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लें। बार-बार होने वाली ब्लोटिंग को केवल सामान्य गैस समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके पीछे भोजन असहिष्णुता, पाचन संबंधी समस्या या कोई अन्य चिकित्सकीय कारण भी हो सकता है। सही कारण की पहचान और उचित सलाह से परेशानी को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।














































