मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव गहराने और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से 11 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी तबाही देखने को मिली। कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते दलाल स्ट्रीट की शुरुआत गैप-डाउन हुई और बाजार खुलते ही बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 708.23 अंक यानी 0.95% की भारी गिरावट के साथ 74,194.36 पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 सूचकांक 259.70 अंक टूटकर 23,218.10 के स्तर पर फिसल गया। बाजार में मंदी का माहौल इतना तगड़ा रहा कि लगभग 1,824 शेयरों में बिकवाली रही, जबकि केवल 692 शेयर ही हरे निशान में टिक पाए।
ONGC और IT शेयरों का प्रदर्शन कच्चे तेल की कीमतों में आए तेज उछाल का सीधा फायदा तेल कंपनी ONGC को मिला जिसके शेयरों में मजबूती दर्ज की गई। निफ्टी हीटमैप के मुताबिक, चौतरफा मंदी के बीच भी ONGC का शेयर 1.85% की तेजी के साथ ₹241.67 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। इसके अलावा टेक महिंद्रा में 1.26%, इन्फोसिस में 0.84% और टीसीएस में 0.83% की बढ़त देखने को मिली। विप्रो में 0.34%, पावरग्रिड में 0.33%, आईटीसी में 0.31% और एचसीएल टेक में 0.18% की तेजी दर्ज की गई। आईटी सेक्टर अकेला ऐसा सेक्टर रहा जिसने मंदी के इस माहौल में बाजार को थोड़ा सहारा दिया।
टॉप गेनर और लूजर स्टॉक्स हरे निशान में कारोबार करने वाले शेयरों में टेक्नोलॉजी और चुनिंदा दिग्गज कंपनियों के नाम शामिल रहे जो निवेशकों को राहत देते दिखे। दूसरी ओर, हिंडाल्को में 3.90% और टाटा स्टील में 2.49% की सबसे ज्यादा बिकवाली दर्ज की गई। इनके अलावा बजाज फाइनेंस में 2.22% और जेएसडब्ल्यू स्टील में 2.01% की भारी गिरावट आई। बजाज फिनसर्व में 1.85%, श्रीराम फाइनेंस में 1.83%, आयशर मोटर्स में 1.79% और अडानी एंटरप्राइजेज के शेयरों में 1.74% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इन सभी कंपनियों के शेयरों के टूटने से निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आई है।
सेक्टोरल इंडेक्स में मंदी सेक्टोरल फ्रंट पर आईटी सेक्टर को छोड़कर सभी प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में डूब गए और निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। मेटल, ऑटो, बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर्स में 1% से लेकर 3% तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी आईटी इंडेक्स को छोड़कर बाकी सभी सूचकांकों में बिकवाली का भारी दबाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। मेटल, ऑटो और बैंक इंडेक्स में आई 1% से 3% तक की गिरावट ने बाजार की कमर तोड़ दी। इस चौतरफा बिकवाली के कारण बाजार के किसी भी बड़े सेक्टर को संभलने का मौका नहीं मिल पाया।
ब्रॉडर मार्केट का बुरा हाल ब्रॉडर मार्केट में भी निवेशकों को भारी चपत लगी जहां मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट बुरी तरह प्रभावित हुए। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप दोनों इंडेक्स में 1.4-1.4 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई। बाजार के छोटे और मंझोले शेयरों में बिकवाली का यह दबाव निवेशकों की चिंता को और अधिक बढ़ाने वाला रहा। जानकारों के अनुसार वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ने से घरेलू अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण आने वाले दिनों में बाजार की चाल काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
बाजार पर भू-राजनीतिक असर मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालातों ने दुनियाभर के शेयर बाजारों के साथ-साथ भारतीय बाजार की स्थिरता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ब्रेंट क्रूड का 108 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल जाना भारतीय आयात बिल और महंगाई के मोर्चे पर बड़ा झटका है। विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा की जा रही बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजार की स्थिति को और अधिक कमजोर बना दिया है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे मौजूदा समय में किसी भी तरह के बड़े निवेश से पहले पूरी सावधानी बरतें। इस प्रकार 11 सितंबर 2026 का यह कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक बड़े गिरावट वाले दिन के रूप में दर्ज हो गया है।













































