उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने आधिकारिक आवास पर रक्षाबंधन का पावन पर्व अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस खास मौके पर कई निराश्रित बच्चियों ने मुख्यमंत्री योगी की कलाई पर बड़े प्यार से राखी बांधी और उनका तिलक किया। अपनी छोटी-छोटी बहनों से रक्षासूत्र बंधवाने के बाद मुख्यमंत्री बेहद खुश नजर आए और उन्होंने बच्चों का मनोबल बढ़ाया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपनी छोटी-छोटी बहनों के साथ हंसते हुए तस्वीरें खिंचवाईं और उनके साथ सेल्फी भी ली। इस कार्यक्रम ने सीएम आवास के माहौल को पूरी तरह से आत्मीय और भावुक बना दिया।
सुरक्षा और बदलाव पर विचार: राखी बंधवाने का सिलसिला खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उपस्थित छात्राओं को संबोधित करते हुए अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि एक दौर ऐसा भी था जब बेटियां सुरक्षा के अभाव में भय के मारे स्कूल तक नहीं जा पाती थीं। लेकिन आज जब वे बेटियों को निडर होकर स्कूल जाते देखते हैं, तो उन्हें मन में बेहद खुशी और संतोष मिलता है। उन्होंने बताया कि किस तरह बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत पहले बेटियों के साथ साधनों के मामले में भेदभाव किया जाता था। गरीब परिवारों में साधनों की कमी के कारण केवल बेटों की पढ़ाई और सुविधाओं पर ध्यान दिया जाता था।
अतीत का दुखद संस्मरण: अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भेदभाव की मिसाल देते हुए कहा कि कई साधनहीन परिवार बेटे के लिए किसी तरह यूनिफॉर्म सिलवा देते थे। वे बेटे के लिए बाजार से जूते और चप्पल खरीद लाते थे, लेकिन अपनी ही बेटियों के लिए ये वस्तुएं नहीं खरीद पाते थे। इसके परिणामस्वरूप मासूम बेटियां पथरीले रास्तों पर नंगे पैर ही स्कूल जाने के लिए मजबूर हुआ करती थीं। मुख्यमंत्री ने बताया कि जब उन्होंने शासन की बागडोर संभाली थी, तब उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों का जमीनी दौरा किया था। उसी दौरे के दौरान उन्हें इस कड़वी और दुखद सच्चाई का प्रत्यक्ष अनुभव हुआ था।
दौरे के दौरान घटी घटना: घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अक्टूबर-नवंबर के महीने में जब कड़ाके की सर्दी की शुरुआत हो रही थी, तब उन्होंने एक दृश्य देखा। कुछ छोटी बच्चियां सुबह-सुबह अपने कंधे पर छोटा सा फटा हुआ बैग लटकाए स्कूल की ओर जा रही थीं। उन बच्चियों को देखकर उन्होंने तुरंत अपनी सरकारी गाड़ी रुकवाई और उनसे हाल-चाल पूछना शुरू किया। जब उन्होंने पूछा कि वे कहां जा रही हैं, तो बच्चियों ने बताया कि वे स्कूल जा रही हैं। लेकिन जब उन्होंने यूनिफॉर्म न होने का कारण पूछा, तो मासूम बच्चियां संकोच के मारे बिल्कुल शांत और चुप खड़ी रह गईं।
सर्दियों में नंगे पैर चलना: मुख्यमंत्री ने देखा कि कड़ाके की ठंड और पथरीले रास्तों के बावजूद वे बच्चियां बिना चप्पल-जूतों के नंगे पैर ही आगे बढ़ती जा रही थीं। जब उनसे चप्पल न होने का कारण पूछा गया तो वे फिर से चुप रह गईं और कोई जवाब नहीं दे सकीं। इसके बाद जब एक बच्ची से उसके परिवार के बारे में पूछा गया तो उसने बताया कि उसका एक भाई भी है। उसने बताया कि उसका भाई दूसरे स्कूल में पढ़ता है और उसके पास पहनने के लिए जूते और यूनिफॉर्म दोनों मौजूद हैं। इस बात ने मुख्यमंत्री के हृदय को गहराई से झकझोर कर रख दिया।
तत्काल लिया गया फैसला: यह पूरी बात सुनने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना कोई समय गंवाए उसी दिन लखनऊ वापस लौटने का फैसला किया। लखनऊ पहुंचते ही उन्होंने कड़ा आदेश जारी किया कि राज्य की हर बेटी को सरकारी मदद दी जाएगी। उन्होंने तय किया कि प्रत्येक बेटी को दो यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, जूते-मोजे और ठंड से बचने के लिए स्वेटर प्रदान किए जाएंगे। सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले ने प्रदेश की लाखों बेटियों का जीवन बदल दिया और आज राज्य की बेटियां पूरी आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ अपनी पढ़ाई पूरी कर पा रही हैं।













































