23 अगस्त 2026, रविवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी (पवित्रा एकादशी) का पावन व्रत रखा जाएगा। यह व्रत संतान प्राप्ति, संतान की उन्नति, आरोग्य तथा परिवार की समृद्धि की कामना के लिए विशेष रूप से किया जाता है।
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तिथि, शुभ मुहूर्त एवं योग
- एकादशी तिथि प्रारंभ व समाप्ति: 23 अगस्त 2026 को एकादशी तिथि पूरा दिन व रात पार करके भोर में 04:19 AM (24 अगस्त) तक रहेगी।
- सर्वार्थ सिद्धि योग: शाम 05:44 PM तक
- मूल नक्षत्र: शाम 05:45 PM तक
- ब्रह्म मुहूर्त: 04:51 AM से 05:36 AM
- अभिजित मुहूर्त: 12:16 PM से 01:06 PM
पुत्रदा एकादशी की संपूर्ण पूजा विधि
- स्नान व संकल्प: प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले या वस्त्र धारण करें। हाथ में जल व अक्षत लेकर भगवान श्री हरि विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
- पूजा स्थल की तैयारी: पूजा घर को स्वच्छ करके एक चौकी पर पीला या लाल वस्त्र बिछाएं। उस पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- दीप व पंचामृत पूजन: भगवान के समक्ष देशी घी का दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें। श्री हरि को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं।
- श्रृंगार व तुलसी अर्पण: भगवान को पीला चंदन, रोली, अक्षत, पीले फूल व माला चढ़ाएं। भगवान विष्णु के भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें, क्योंकि बिना तुलसी के वे भोग स्वीकार नहीं करते।
- कथा व मंत्र जप: पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें। इसके पश्चात विष्णु चालीसा एवं विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें तथा मंत्रों का जप करें।
- आरती व क्षमा प्रार्थना: अंत में माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की आरती करें। आरती के बाद पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें।
संतान सुख व करियर के लिए विशेष ज्योतिषीय उपाय
- संतान प्राप्ति हेतु: भगवान विष्णु को ताजा पीले फूलों की माला अर्पित करें और चंदन का तिलक लगाएं।
- संतान के करियर में सफलता हेतु: एकादशी के दिन बच्चे के मस्तक पर केसर का तिलक लगाएं और किसी जरूरतमंद को पीला वस्त्र दान करें।
- संतान की आर्थिक मजबूती हेतु: 5 सफेद कौड़ियों की पूजा करके उन्हें लाल कपड़े में बांधकर अपनी संतान को सुरक्षित रखने के लिए दें।
- संतान का सहयोग पाने हेतु: स्नान के बाद भगवान विष्णु के मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ नमो भगवते नारायणाय” का 108 बार जप करें।
- शिक्षा में उत्कृष्ट सफलता हेतु: पूजा के समय विद्यायंत्र की स्थापना करें और पूजन के पश्चात उसे बच्चे के अध्ययन कक्ष (स्टडी रूम) में रखें या गले में धारण कराएं।
- संतान के जीवन की बाधाएं दूर करने हेतु: श्री हरि को माखन-मिश्री का भोग लगाएं और उनके समक्ष चंदन की सुगंधित धूपबत्ती जलाएं।
- संतान के सुखी दांपत्य जीवन हेतु: 5 गोमती चक्र की पूजा करके लाल पोटली में बांधकर संतान को दें।
- स्वास्थ्य लाभ हेतु: यदि बच्चा बीमार है, तो साबुत हल्दी की गांठ को पानी के साथ घिसकर रोज उसके माथे पर टीका लगाएं।
- संतान गोद (दत्तक) लेने की इच्छा हेतु: एकादशी की रात्रि कृष्ण जी के बाल रूप (लड्डू गोपाल) के समक्ष घी का दीपक जलाएं और “ॐ गोविन्दाय गोपालाय यशोदा सुताय स्वाहा” मंत्र की 5 माला (540 बार) जप करें।
- व्यक्तिगत उन्नति हेतु: एक जटा वाला नारियल लेकर उस पर लाल कलावा बांधें और बहते जल में प्रवाहित करें।














































