पचपन वर्षीय भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी इस समय लंदन की कड़ी सुरक्षा वाली पेंटनविले जेल में पूरी तरह से बंद है। वह लगभग दो अरब डॉलर के पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी के तौर पर वांटेड है। धोखाधड़ी के अलावा उस पर बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग करने का भी अत्यंत गंभीर आरोप लगा हुआ है। भारत सरकार पिछले कई सालों से इस भगोड़े कारोबारी को अपने देश वापस लाने की लगातार कोशिश कर रही है। उसकी गिरफ्तारी के बाद से ही उसे भारतीय एजेंसियों को सौंपने की लंबी कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जा रही है।
तीन अलग मामलों में वांटेड भारतीय जांच एजेंसियों को मुख्य रूप से तीन अलग-अलग गंभीर आपराधिक मामलों में नीरव मोदी की सरगर्मी से तलाश है। पहला बड़ा मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दर्ज किया गया कथित पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी का मुख्य मामला है। इसके बाद दूसरा अहम मामला प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज किया गया करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का है। वहीं तीसरा मामला जांच के दौरान अहम सबूतों से छेड़छाड़ करने और प्रमुख गवाहों को गलत तरीके से प्रभावित करने का है। इन तीनों ही मामलों में भारतीय जांच एजेंसियों ने ब्रिटिश अदालत में उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत मजबूती से पेश किए हैं।
प्रत्यर्पण के पक्ष में फैसला भारतीय एजेंसियों द्वारा पेश किए गए मजबूत दस्तावेजों के आधार पर ब्रिटिश अदालतों ने अपना अहम फैसला सुनाया था। अदालत को आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त सबूत मिलने के बाद उसने नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के पक्ष में अपना निर्णय दिया था। इसके बाद अप्रैल 2021 में प्रत्यर्पण के इस महत्वपूर्ण आदेश पर ब्रिटिश सरकार द्वारा आधिकारिक हस्ताक्षर भी कर दिए गए थे। यह भारत सरकार और उसकी जांच एजेंसियों के लिए एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कानूनी जीत मानी जा रही थी। हालांकि इस शुरुआती सफलता के बावजूद नीरव मोदी को तुरंत भारत वापस लाने का रास्ता इतना भी आसान नहीं रहा।
कानूनी अपीलों से हुई देरी आदेश पर हस्ताक्षर होने के बावजूद नीरव मोदी ने ब्रिटेन की कानूनी खामियों का पूरा फायदा उठाने की पुरजोर कोशिश की। मानवाधिकार के विभिन्न तर्कों पर आधारित कानूनी अपीलों के कारण यह पूरी प्रत्यर्पण प्रक्रिया काफी ज्यादा लंबी खिंच गई। इसके साथ ही उसने खुद को बचाने के लिए एक गोपनीय शरण आवेदन भी ब्रिटिश सरकार के सामने चालाकी से दायर कर दिया। इन कानूनी दांवपेचों के कारण भारतीय अधिकारियों को उसे वापस लाने के लिए और भी ज्यादा लंबा इंतजार करना पड़ा। इस पूरी अवधि के दौरान वह लगातार लंदन की जेल में बंद रहकर अपनी अपीलों के फैसलों का इंतजार करता रहा।
हाई कोर्ट से लगा झटका गोपनीय शरण का दावा खारिज होने की खबरों के बाद नीरव मोदी ने कानूनी लड़ाई जीतने का एक और प्रयास किया। उसने अपना प्रत्यर्पण मामला फिर से खोलने के लिए अदालत के सामने एक नई अपील बड़े ही सुनियोजित ढंग से पेश की। हालांकि इस साल मार्च के महीने में इंग्लैंड के हाई कोर्ट ने उसकी इस नई अपील को पूरी तरह से खारिज कर दिया। अदालत के इस सख्त फैसले ने उसके प्रत्यर्पण को टालने की तमाम उम्मीदों पर बहुत ही बड़ा पानी फेर दिया। हाई कोर्ट के इस अहम फैसले के बाद भारत प्रत्यर्पण को लेकर उसकी कानूनी मुश्किलें पहले से कहीं अधिक बढ़ गईं।
यूरोपीय कोर्ट में भी हार इंग्लैंड के हाई कोर्ट से निराशा मिलने के बाद उसने अपनी रिहाई के लिए अंतिम अंतरराष्ट्रीय विकल्प का भी सहारा लिया। इसके तहत फ्रांस में स्थित यूरोपीय मानवाधिकार कोर्ट में उसकी तरफ से एक अंतिम बड़ी अपील आधिकारिक रूप से दायर की गई। हालांकि यूरोपीय अदालत में भी उसे कोई राहत नहीं मिली और उसकी यह अंतिम अपील भी पूरी तरह से असफल रही। इस अंतरराष्ट्रीय हार के बाद अब उसके पास बचने के सभी प्रमुख कानूनी रास्ते लगभग पूरी तरह से बंद हो चुके हैं। इन सभी कानूनी प्रक्रियाओं के समाप्त होने के बाद अब उसका भारत प्रत्यर्पण ही अगला और एकमात्र कानूनी कदम माना जा रहा है।


























































