भारतीय सिनेमा के दर्शकों के बीच फिल्म ‘बटवारा 1947’ को लेकर घोषणा के समय से ही भारी उत्सुकता बनी हुई है। आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बन रही यह फिल्म इस साल की सबसे चर्चित और बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक है। भारत के विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित यह कहानी प्यार, त्याग, संवेदना और मानवीय हिम्मत की गहरी दास्तान बयां करती है। हाल ही में इस फिल्म को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने इसे बिना किसी कट के पास कर दिया है। हालांकि इसके विषय और गंभीर दृश्यों को देखते हुए इसे सेंसर बोर्ड द्वारा ‘A’ (अडल्ट्स-ओनली) सर्टिफिकेट दिया गया है।
सेंसर बोर्ड की मुहर और रनटाइम की पूरी जानकारी: सीबीएफसी की आधिकारिक जानकारी और रिपोर्टों के अनुसार इस फिल्म को बिना किसी दृश्य पर कैंची चलाए हरी झंडी दी गई है। इस फिल्म की कुल अवधि 145 मिनट और 34 सेकंड यानी 2 घंटे 25 मिनट और 34 सेकंड तय की गई है। 1947 के विभाजन के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा, विस्थापन और मानवीय त्रासदी जैसे गंभीर विषयों के कारण इसे वयस्कों के लिए उपयुक्त माना गया है। सेंसर सर्टिफिकेट मिलने के बाद यह फिल्म 14 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस और विभाजन विभीषिका दिवस के अवसर पर रिलीज होगी। दुनियाभर के सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए तैयार इस फिल्म का टीजर भी कुछ दिनों पहले ही जारी किया गया है।
सनी देओल के सिनेमाई करियर का एक दुर्लभ संयोग: अभिनेता सनी देओल के चार दशक से भी लंबे करियर में बहुत कम फिल्में ऐसी रही हैं जिन्हें ‘A’ रेटिंग मिली हो। पिछले 43 वर्षों में अपनी अधिकांश फिल्मों के जरिए वे हमेशा से ही पारिवारिक दर्शकों के साथ गहरे रूप से जुड़ते रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक बीते 26 सालों में सनी देओल की सिर्फ छह फिल्मों को ही सेंसर बोर्ड से ‘A’ सर्टिफिकेट मिला है। इन चुनिंदा फिल्मों में ‘चैंपियन’, ‘फर्ज’, ‘कर्ज: द बर्डन ऑफ ट्रुथ’, ‘जानी दुश्मन’, ‘मोहल्ला अस्सी’ और ‘चुप’ के नाम शामिल हैं। साल 2002 से 2018 के बीच 16 सालों तक कोई एडल्ट फिल्म न आने के बाद इस फिल्म का ‘A’ सर्टिफिकेट उनके सफर में बड़ा बदलाव है।
लाहौर की हवेली और बुजुर्ग महिला की मार्मिक कहानी: इस फिल्म की पटकथा प्रसिद्ध नाटककार सैयद असग़र वजाहत के लोकप्रिय नाटक ‘जिस लाहौर नई देख्या’ पर पूरी तरह आधारित है। यह कहानी एक मोहाजिर मुस्लिम परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जो विभाजन के बाद लखनऊ से पलायन करके लाहौर पहुंचता है। वहां उन्हें एक खाली पड़ी हवेली अलॉट की जाती है, लेकिन वहां एक बुजुर्ग हिंदू महिला पहले से ही रह रही होती हैं। वह महिला अपना दशकों पुराना घर छोड़ने से इनकार कर देती हैं, जिससे शुरुआत में परिवार और उनके बीच टकराव पैदा होता है। लेकिन धीरे-धीरे उनके बीच की दूरी मिटती जाती है और कहानी सह-अस्तित्व, करुणा तथा साझा इंसानियत का रूप ले लेती है।
दिग्गज कलाकारों का जमावड़ा और अहम किरदार: इस बहुप्रतीक्षित फिल्म में भारतीय सिनेमा के कई बड़े और मंझे हुए कलाकार एक साथ बड़े पर्दे पर नजर आने वाले हैं। फिल्म की मुख्य स्टारकास्ट में सनी देओल के साथ शबाना आजमी, प्रीति जिंटा, अली फजल, करण देओल और अभिमन्यु सिंह शामिल हैं। इसके अलावा कई मीडिया रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि निर्माता आमिर खान फिल्म में एक सपोर्टिंग किरदार में नजर आ सकते हैं। इन सभी बेहतरीन कलाकारों का एक साथ आना फिल्म की कहानी और इसके ऐतिहासिक महत्व को और भी ज्यादा मजबूत बनाता है। इतिहास के सबसे दर्दनाक विस्थापन के बीच उपजी भावनाओं को पर्दे पर उतारने के लिए इन सभी कलाकारों ने अपनी पूरी मेहनत की है।
तीन दशक बाद फिर साथ लौटी आइकॉनिक जोड़ी: इस फिल्म की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसमें अभिनेता और निर्देशक की एक बहुत ही पुरानी जोड़ी वापस लौटी है। लगभग तीन दशकों के लंबे अंतराल के बाद राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक राजकुमार संतोषी और सनी देओल की जोड़ी एक साथ आई है। बड़े पर्दे पर दर्शकों को फिर से पुराने जादू की उम्मीद है क्योंकि फिल्म को आमिर खान और अपर्णा पुरोहित ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म के तकनीकी पक्ष की बात करें तो इसमें बेहतरीन संगीत देने का काम दिग्गज संगीतकार ए. आर. रहमान ने किया है। वहीं इस ऐतिहासिक फिल्म के सभी खूबसूरत और दिल को छू लेने वाले गीतों को मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने लिखा है।


























































