काला सागर में रूस ने ओडेसा पोर्ट के पास यूक्रेन के तीन कार्गो जहाजों को ड्रोन से निशाना बनाने का दावा किया। रूस के मुताबिक, इन जहाजों में NATO देशों से मिले सैन्य उपकरण और हथियार यूक्रेन पहुंचाए जा रहे थे। इन जहाजों पर हमला करने के लिए आधुनिक गेरान-4 ड्रोन का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है। रूस का कहना है कि नए गेरान-4 ड्रोन में बेहतर सेंसर लगे हैं, जो सिग्नल टूटने पर भी कैमरों की मदद से लक्ष्य की सटीक पहचान कर सकते हैं।
रूस की शैडो फ्लीट पर यूक्रेनी हमला काला सागर और अजोव सागर में यूक्रेन भी रूस की तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ पर लगातार हमले बोल रहा है। जुलाई में ‘ऑपरेशन मोलोच्का’ शुरू करने के बाद से यूक्रेनी सेना ने 218 ड्रोन हमले करने का दावा किया है। इनमें से 134 हमले अजोव सागर और 84 हमले काला सागर में स्थित रूसी जहाजों पर किए गए। यूक्रेन की मुख्य रणनीति रूस की उन समुद्री सप्लाई लाइनों को पूरी तरह तबाह करना है, जो क्रीमिया के सैन्य और ऊर्जा ढांचे के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
ड्रोन युद्ध में नए आधुनिक प्रयोग रूस ने युद्ध में ‘वुर्डलाक’ नाम के हेक्साकॉप्टर ड्रोन का इस्तेमाल शुरू किया है, जो लॉजिस्टिक्स में काम आता है। यह ड्रोन सिग्नल ब्लैकआउट के बावजूद तय लोकेशन तक 15 किलो गोला-बारूद या मेडिकल सामान पहुंचा सकता है। इसकी रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा है और यह GPS समेत 4 नेविगेशन नेटवर्क पर एक साथ काम करता है। इसके अलावा, पूर्वी यूक्रेन के डोब्रोपिलिया में यूक्रेनी ड्रोन ठिकानों पर रूस ने FAB-500 जैसे विनाशकारी बमों से भी भीषण हमला करने का दावा किया है।
रूसी सेना की नई वॉलंटियर ब्रिगेड रिपोर्ट्स के अनुसार रूस ने ‘फर्स्ट यूक्रेनियन स्पेशल परपज वॉलंटियर ब्रिगेड’ नाम से एक नई सैन्य इकाई तैयार की है। इसमें युद्ध के दौरान पकड़े गए यूक्रेन के ही कुछ पूर्व सैनिकों और युद्धबंदियों को शामिल करने का दावा है। मैक्सिम क्रिवोनोस और ओलेक्सी बेरेस्ट जैसी कई छोटी बटालियनों को मिलाकर यह नई ब्रिगेड बनाई गई है। हालांकि, युद्धबंदियों का इस्तेमाल सैन्य सेवा में करने का यह कदम अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत एक गंभीर कानूनी और नैतिक सवाल खड़ा करता है।
जेलेंस्की की सर्बिया यात्रा और सैन्य मदद कीव पर भीषण हमलों के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की अचानक सर्बिया की यात्रा पर पहुंचे हैं। सर्बिया को रूस का करीबी माना जाता है, जो यूरोपीय प्रतिबंधों के मामलों में अक्सर अलग रुख अपनाता आया है। जेलेंस्की की यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब पश्चिमी देशों और NATO से अतिरिक्त इंटरसेप्टर मिसाइलें मिलने में देरी हो रही है। यूक्रेन को अपनी सीमाओं की रक्षा और एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए तत्काल सैन्य सहायता की जरूरत है।
NATO सीमाओं पर बढ़ा सैन्य तनाव NATO की पूर्वी सीमा पर स्थित रोमानिया और बुल्गारिया में भी ड्रोन घटनाओं के बाद गंभीर तनाव देखा गया है। बुल्गारियाई सीमा के अंदर एक ड्रोन के कारण गैस पाइपलाइन के पास विस्फोट होने की जानकारी सामने आई है। इसके जवाब में रोमानिया ने अपनी सीमा के पास सुरक्षा बढ़ाने के लिए F-35 फाइटर जेट्स से ड्रिल शुरू कर दी है। बाल्टिक देशों में संभावित रूसी कार्रवाई की आशंकाओं के बीच NATO की पूर्वी सीमा पर सैन्य गतिविधियां अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।


























































