सनातन धर्म में कई सारे व्रत त्योहार मनाए जाते है और सभी का अपना महत्व भी होता है। लेकिन इन सभी में एकादशी की तिथियों को महत्वपूर्ण माना गया है। क्योंकि ये जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु की प्रिय तिथि है और एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की पूजा को समर्पित होता है।भक्त इस दिन श्री नारायण को प्रसन्न करने के लिए उनकी विधिवत पूजा करते है और व्रत आदि भी रखते है। इस बार पापमोचनी एकादशी का व्रत 18 मार्च को किया जाएगा। पंचांग के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पख की एकादशी तिथि को पापमोचनी एकादशी के नाम से जाना जाता है, तो आज हम आपको इस व्रत से जुड़ी जानकारी प्रदान कर रहे है।
जानिए व्रत से जुड़े नियम-
सनातन धर्म में पापमोचनी एकादशी व्रत को महत्वपूर्ण बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जाने अंजाने किए गए पापों का नाश हो जाता है और अच्छी सेहत का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। लेकिन एकादशी की तिथि पर व्रतधारी के अलावा अन्य लोगों को भी भूलकर चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दौरान झूठ बोलना या किसी प्रकार का वाद विवाद करना भगवान को क्रोधित कर सकता है।
एकादशी व्रत के दौरान मन में बुरे विचार भी नहीं लाने चाहिए। इस दौरान पवित्रता का भी ध्यान रखना जरूरी है। एकादशी के दिन किसी को भी अपशब्द कहने से भी बचना चाहिए। इस दौरान गरीबों और जरूरतमंदों को दान करना भी उत्तम होता है। ऐसा करने से श्री हरि की कृपा प्राप्त होती है।



































