“मैं संविधान में विश्वास करूंगा जब वह मेरी पहचान में विश्वास करेंगे। मैं भारतीय नहीं हूं, मैं पंजाबी हूं। हम वह पूरा क्षेत्र चाहते हैं जहां पहले पंजाब का शासन था, पहले हम इसे भारत से लेंगे, और फिर हम पाकिस्तान में भी जाएंगे।” ये उन बयानों में से एक है जो अमृतपाल सिंह खालसा नाम के एक सिख शख्स ने पिछले पांच दिनों में मीडिया के सामने दिए हैं।
इस शख्स को खालिस्तान नेता जरनैल सिंह भिंडरांवाले 2।0 कहा जा रहा है। जबकि अन्य का दावा है कि इसे जानबूझ कर खड़ा किया गया है। हालांकि, फिलहाल अमृतपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है।
भारत से अलग होकर सिख धर्म के लोगों के लिए खालिस्तान बनाने की मांग करने वाला 29 साल का अमृतपाल सिंह खालसा छह महीने पहले तक पूरा सिख भी नहीं था। वह अपने बाल पहले काटा करता था। आज वह खालिस्तान की मांग करने वाले संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ का प्रमुख है। उसकी अन्य मांगों में पंजाब में नशामुक्ति और सिख संप्रभुता शामिल है। कौन हैं अमृतपाल सिंह? ऐसा क्या है इस शख्स में कि लोग इसे भिंडरावाले की विरासत को आगे ले जाने वाला बता रहे हैं।
कौन हैं अमृतपाल सिंह?
अमृतपाल सिंह का नाम 23 फरवरी को मेनस्ट्रीम मीडिया में आया जब उसने हजारों सिखों के साथ अजनाला जेल में अपने एक साथी लवप्रीत ‘तूफान’ को छुड़ाने के लिए पुलिस स्टेशन पर धावा बोल दिया था। हालांकि, वह काफी पहले पंजाब की राजनीति में आ गया था। 19 अगस्त 2022 को उसने दुबई से भारत आने के पहले ही संगठन बनाना शुरू कर दिया।
किसान आंलोदन के दौरान शुरू हुई ‘वारिस पंजाब दे’ संस्था
अमृतपाल सिंह दुबई में अपने परिवार का मोटर का बिजनेस चलाता था। साल 1993 में अमृतसर के जल्लूपुर खेड़ा गांव में उसका जन्म हुआ था। 2012 में 12वीं करने के बाद वह दुबई चला गया। अमृतपाल सिंह मौजूदा वक्त में ‘वारिस पंजाब दे’ संस्था के प्रमुख हैं। इस संगठन की शुरुआत एक्टर-कार्यकर्ता दीप सिंह सिद्धू ने किसान आंदोलन के दौरान की थी। सिद्धू वही शख्स है जिसने 26 जनवरी को लाल किले पर ‘निशान साहिब’ फहराया था। उस वक्त सिद्धू ने कहा था, “मैं अपने पिता के मरने पर इतना नहीं रोया था जितना तब रोया था जब लाल किले पर निशान साहिब फहराया गया था।”
सिद्धू ने पंजाब विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल (ए) के उम्मीदवार सिमरजीत सिंह मान (मौजूदा वक्त में संगरूर से सांसद) के लिए भी वोट मांगे, जो खालिस्तान समर्थक हैं। सिद्धू की विधानसभा चुनाव से पांच दिन पहले फरवरी 2022 में कार दुर्घटना में मौत हो गई थी। अमृतपाल सिंह के समर्थकों का कहना है कि सिद्धू की ‘हत्या’ की गई थी। अमृतपाल सिंह सिद्धू से कभी मिला नहीं था लेकिन किसान आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर उनके बीच बातचीत हुई थी। एक हफ्ते पहले सिद्धू की पुण्यतिथि पर अमृतपाल सिंह ने कहा था कि उसने सिद्धू की सलाह पर नवंबर 2021 से बाल कटवाना बंद कर दिया था।
25 सितंबर, 2022 को अमृतपाल सिंह ने आनंदपुर साहिब में लगभग 900 अन्य लोगों के साथ अमृतधारी सिख बनने की प्रक्रिया में भाग लिया। 29 सितंबर को हजारों सिख भिंडरावाले के गांव रोडे में एकत्र हुए और अमृतपाल सिंह की दस्तरबंदी में शामिल हुए। दुबई में रहते हुए भी अमृतपाल सिंह पंजाबी संप्रभुता, पंजाब में नशे की लत, किसान आंदोलन आदि के बारे में फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से मुखर रहा। उसने कई बार सिद्धू को रसूखदार बताया था, लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सिद्धू के परिवार ने अमृतपाल सिंह से दूरी बना ली है।
गृहमंत्री को दे दी धमकी
करीब 10 दिन पहले गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि वह और उनकी सरकार खालिस्तान आंदोलन को जड़ से खत्म कर देगी। अमृतपाल सिंह ने 2006 के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि शांति से खालिस्तान के पक्ष में बोलना कोई अपराध नहीं है। अमृतपाल सिंह ने इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि अमित शाह ने जो कहा वही इंदिरा गांधी ने कहा था और परिणाम उनके लिए भी वही हो सकता है। 1984 में इंदिरा गांधी की उनके अंगरक्षकों ने हत्या कर दी थी। अमृतपाल सिंह ने अमित शाह से हिंदू राष्ट्र की मांग करने वालों से भी यही बात कहने को कहा था।
सिख संगठनों ने किया अमृतपाल सिंह का विरोध
अमृतपाल सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूप को ढाल के रूप में इस्तेमाल करते हुए पुलिस थाने पर कब्जा कर लिया और पुलिसकर्मियों को उसके समर्थकों ने तलवारों से घायल कर दिया। इसे लेकर सिख संगठनों में काफी रोष है। अब जाने-माने सिख संगठनों और पंजाब सरकार की नाराजगी के बाद अमृतपाल सिंह की मुश्किलें बढ़ेंगी। श्री अकाल तख्त साहिब सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था है। अजनाला कांड पर उनकी चुप्पी टूटी है और तख्त साहिब ने एक विशेष कमेटी बनाई है पूरे प्रकरण की जांच करेगी।
क्या पंजाब में तेज होगी खालिस्तान की मांग?
30-35 साल पहले पंजाब ने खालिस्तान के नाम पर जो खून-खराबा देखा था, वह अब तक खत्म नहीं हुआ है। हालांकि, राज्य काफी हद तक शांतिपूर्ण है। बार-बार खालिस्तान की मांग उठ रही थी। लेकिन अजनाला की घटना के बाद इसने तूल पकड़ लिया। कई लोग यह भी दावा करते हैं कि अमृतपाल सिंह को बीजेपी ने खड़ा किया है ताकि वह देश को यह बताने में उनकी मदद ले सके कि खालिस्तानी आ रहे हैं और अपने हिंदुत्व एजेंडे को मजबूत कर रहे हैं। अजनाला कांड में सख्त कदम उठाने से कतरा रही पंजाब पुलिस, प्रशासन और आम आदमी पार्टी सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि अमृतपाल सिंह को विदेश और पाकिस्तान से फंडिंग हो रही है।


































