शहबाज शरीफ सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में 80 रुपये की कमी कर जनता को मरहम लगाने की कोशिश तो की है, लेकिन पाकिस्तान का आर्थिक संकट अभी टला नहीं है। पेट्रोल सस्ता होने के बावजूद डीजल की कीमतें अब भी आम आदमी और ट्रांसपोर्ट सेक्टर की पहुंच से बाहर बनी हुई हैं।
गहन विश्लेषण:
- डीजल बनाम पेट्रोल: जहाँ पेट्रोल अब 378 रुपये पर है, वहीं High-Speed Diesel (HSD) अभी भी 520.35 रुपये प्रति लीटर के खतरनाक स्तर पर बना हुआ है।
- टैक्स का खेल: सरकार ने पेट्रोल पर Petroleum Levy बढ़ाकर 160 रुपये कर दी है, जबकि डीजल पर टैक्स को शून्य (Zero Tax) कर दिया है। सरकार का तर्क है कि डीजल की बढ़ती कीमतों से माल ढुलाई महंगी होती है, जिसे नियंत्रित करने के लिए यह ‘बैलेंसिंग एक्ट’ किया गया है।
- ईरान युद्ध का असर: वैश्विक स्तर पर जारी ईरान संकट ने पाकिस्तान की सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। वर्क फ्रॉम होम जैसे प्रयोगों के विफल होने के बाद अब सरकार को राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) सहकर भी कीमतें घटानी पड़ी हैं।
- भविष्य की चुनौती: क्या 80 रुपये की यह कटौती मुद्रास्फीति (Inflation) को कम कर पाएगी या यह केवल एक तात्कालिक राजनीतिक कदम है, इस पर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है।



































