उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से बुधवार को एक बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम की खबर निकलकर सामने आई है। इस घटनाक्रम के तहत मायावती से मिलने पहुंचे कांग्रेस के दो बड़े नेताओं को बिना मुलाकात के ही वापस आना पड़ा। इस घटना के सामने आने के बाद से ही राज्य के विपक्षी दलों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दोनों नेताओं का अचानक बसपा सुप्रीमो के घर जाना और वहां से खाली हाथ लौटना एक बड़ा मुद्दा बन गया है। राजनीतिक पंडित इस पूरी घटना को आगामी चुनावों के मद्देनजर एक बड़े संकेत के रूप में देख रहे हैं।
खाली हाथ लौटे नेता: लखनऊ में आयोजित कांग्रेस की बैठक के तुरंत बाद यूपी कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेता मायावती के आवास पर पहुंचे थे। इन नेताओं में बाराबंकी से नवनिर्वाचित कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया और अनुसूचित विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम शामिल थे। ये दोनों नेता मुलाकात की उम्मीद लेकर मायावती के घर पहुंचे थे मगर वहां उनके घर का गेट ही नहीं खोला गया। काफी देर इंतजार करने के बाद भी जब कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली तो दोनों नेताओं को खाली हाथ लौटना पड़ा। अब इस मुलाकात के न हो पाने और दरवाजे न खुलने को लेकर राज्य में कड़े सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
पुराने पारिवारिक संबंध: इस पूरी घटना के कई गहरे राजनीतिक और पारिवारिक संबंध भी हैं जो इतिहास से जुड़े हुए हैं। कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया न केवल एक दलित नेता हैं बल्कि वे राजनीति के दिग्गज पीएल पुनिया के सुपुत्र भी हैं। पीएल पुनिया का मायावती से पुराना संबंध रहा है और जब मायावती मुख्यमंत्री थीं तब वे उनके प्रमुख सचिव हुआ करते थे। उस प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान पीएल पुनिया को मायावती के सबसे खास और बेहद करीबी लोगों में गिना जाता था। दूसरी तरफ राजेंद्र पाल गौतम भी मान्यवर कांशीराम के दौर में बहुजन समाज पार्टी के एक सक्रिय और वफादार सिपाही रह चुके हैं।
गठबंधन की नई रणनीति: राजनीतिक हल्कों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस पार्टी साल २०२७ के चुनावों के लिए जमीन तैयार कर रही है। पार्टी का लक्ष्य २०२७ के उत्तर प्रदेश चुनाव में मायावती को अपने पाले में लाकर विपक्ष को एक मजबूत शक्ल देना है। कांग्रेस का मानना है कि इस मोर्चे के गठन से राज्य में पीएम मोदी और सीएम योगी की जोड़ी का मुकाबला किया जा सकता है। इसी बड़े राजनीतिक समीकरण को साधने के लिए ये दोनों दलित चेहरे मायावती से बातचीत करने उनके घर पहुंचे थे। लेकिन मायावती ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन दोनों नेताओं के लिए अपने घर के दरवाजे तक खोलना मुनासिब नहीं समझा।
नेताओं का आधिकारिक बयान: हालांकि इस असफल मुलाकात के बाद मीडिया में आ रहे बयानों में कांग्रेस नेताओं ने इस पर अपनी सफाई दी है। तनुज पुनिया और राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि लखनऊ स्थित कांग्रेस कार्यालय में अनुसूचित विभाग की एक आंतरिक बैठक चल रही थी। जब वे दोनों उस मीटिंग से बाहर आए तो उन्हें ध्यान आया कि मायावती का निवास स्थान वहां से बेहद नजदीक ही था। नजदीकी को देखते हुए वे दोनों एक पुराने वरिष्ठ नेता का सामान्य हालचाल जानने के उद्देश्य से उनके घर की तरफ बढ़ गए थे। उन्होंने मीडिया के सामने यह साफ किया कि इस मुलाकात के प्रयास के पीछे कोई आधिकारिक गठबंधन की बातचीत शामिल नहीं थी।
२०२४ के चुनाव का संदर्भ: याद दिला दें कि यूपी में साल २०२४ के लोकसभा चुनाव के दौरान भी विपक्षी एकता की ऐसी ही कवायद हुई थी। उस ऐतिहासिक चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी ने बहुजन समाज पार्टी को इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनाने की पुरजोर कोशिश की थी। कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना था कि बसपा के आने से उत्तर प्रदेश में सीटों का गणित पूरी तरह बदल सकता है। परंतु उस समय भी मायावती ने अपने पुराने अनुभवों को देखते हुए कांग्रेस के इस गठबंधन के प्रस्ताव को पूरी तरह ठुकरा दिया था। बुधवार की यह घटना यह दर्शाती है कि मायावती आज भी कांग्रेस के नेताओं से एक निश्चित राजनीतिक दूरी बनाए रखना चाहती हैं।





































