सावन मास की पूर्णिमा तिथि धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र और फलदायी मानी जाती है। यह पावन रात्रि धन की देवी माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम अवसरों में से एक है। ज्योतिष शास्त्र एवं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन पूर्णिमा की रात को किए गए तांत्रिक व आध्यात्मिक उपाय जीवन से दरिद्रता का नाश करते हैं और सुख-समृद्धि के द्वार खोलते हैं।
इसके साथ ही, सावन पूर्णिमा के समापन के तुरंत बाद हिंदू पंचांग के सबसे पवित्र महीनों में से एक ‘भाद्रपद’ (भादों) का शुभारंभ होता है। आइए जानते हैं सावन पूर्णिमा पर लक्ष्मी पूजन के अचूक लौंग के उपाय और आने वाले भाद्रपद माह 2026 के सभी प्रमुख व्रत एवं त्यौहारों की विस्तृत सूची।
1. सावन पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की कृपा हेतु लौंग के अचूक उपाय
ज्योतिष शास्त्र में लौंग को सकारात्मक ऊर्जा और धन को आकर्षित करने वाला एक शक्तिशाली कारक माना गया है। यदि सावन पूर्णिमा की शुभ रात्रि में मां लक्ष्मी के पूजन के दौरान लौंग के विशेष प्रयोग किए जाएं, तो आर्थिक तंगी से हमेशा के लिए मुक्ति पाई जा सकती है।
आर्थिक उन्नति एवं तिजोरी वृद्धि का उपाय
यदि आपके पास धन नहीं टिकता या आय के स्रोतों में रुकावट आ रही है, तो सावन पूर्णिमा की रात्रि में यह उपाय अवश्य करें:
- सामग्री: एक लाल रेशमी कपड़ा, 5 साबुत लौंग (बिना टूटी हुई), 5 साबुत पीली कौड़ियां और 1 साबुत सुपारी।
- विधि: सावन पूर्णिमा की रात पूजा स्थल में लाल रेशमी कपड़ा बिछाएं। उस पर लौंग, कौड़ियां और सुपारी रखें। इसके बाद माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा-अर्चना करें।
- प्रयोग: पूजा संपन्न होने के बाद कपड़े को मोड़कर पोटली बना लें। इस पोटली को अपने घर की तिजोरी, अलमारी या धन रखने के स्थान पर स्थापित करें।
- प्रभाव: इस सिद्ध पोटली के प्रभाव से घर में निरंतर धन का प्रवाह बना रहता है, आय के नए मार्ग खुलते हैं और व्यापार व नौकरी में तेजी से उन्नति होती है।
पारिवारिक शांति एवं धन-धान्य प्राप्ति का उपाय
घर में नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने और सुख-शांति बनाए रखने के लिए यह धूप-दीप उपाय अत्यंत कारगर है:
- विधि: पूर्णिमा की रात महालक्ष्मी पूजन के पश्चात एक मिट्टी या पीतल के पात्र में 1 कपूर का टुकड़ा और 2 साबुत लौंग रखकर प्रज्वलित करें।
- प्रयोग: जब कपूर और लौंग जलने लगे, तो उसके पवित्र धुएं को अपने पूरे घर के प्रत्येक कोने और कमरे में घुमाएं। अंत में उस पात्र को पूजा स्थल पर रखकर मां लक्ष्मी से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
- प्रभाव: इससे घर की नकारात्मक शक्तियाँ और वास्तु दोष समाप्त होते हैं, क्लेश दूर होता है और परिवार में खुशहाली आती है।
मनोकामना पूर्ति हेतु विशेष तांत्रिक उपाय एवं महामंत्र
यदि आपकी कोई विशेष मनोकामना लंबे समय से अधूरी है, तो पूर्णिमा की रात यह सरल उपाय करें:
- विधि: एक हरे और ताजा पान के पत्ते पर 2 साबुत लौंग रखें और इसे माता लक्ष्मी के चरणों में अर्पित करें।
- मंत्र जप: इसके बाद कमलगट्टे की माला या तुलसी की माला से नीचे दिए गए महालक्ष्मी मंत्र का कम से कम 108 बार श्रद्धापूर्वक जप करें।
- महामंत्र:
ॐ ह्रीं श्रीं कमले कमलालये नमः - प्रभाव: इस प्रयोग से मां लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती हैं और साधक की सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी करती हैं।
2. भाद्रपद (भादों) माह 2026: तिथि एवं समयावधि
सावन पूर्णिमा के साथ ही श्रावण मास का समापन हो जाता है। इसके अगले ही दिन से भाद्रपद (भादों) का महीना शुरू होता है। भाद्रपद माह भक्ति, संयम, नियम और उत्सवों का महीना है।
- भाद्रपद मास प्रारंभ तिथि: 29 अगस्त 2026 (शनिवार)
- भाद्रपद मास समापन तिथि: 26 सितंबर 2026 (शनिवार)
- आश्विन मास प्रारंभ: 27 सितंबर 2026 (रविवार)
3. भाद्रपद माह 2026 के प्रमुख व्रत एवं त्यौहारों की संपूर्ण सूची
भाद्रपद का पूरा महीना भगवान श्री कृष्ण, श्री गणेश, माता पार्वती और भगवान विष्णु की साधना को समर्पित होता है। इस माह में आने वाले प्रमुख पर्वों की तिथियां इस प्रकार हैं:
| तिथि | व्रत / त्यौहार का नाम | महत्व एवं विवरण |
| 29 अगस्त 2026 | भाद्रपद मास प्रारंभ | भादो माह का पहला दिन, पवित्र नदियों में स्नान का महत्व। |
| 31 अगस्त 2026 | कजरी तीज (सातुड़ी तीज) | सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु हेतु रखा जाने वाला निर्जला व्रत। |
| 2 सितंबर 2026 | हल षष्ठी (ललही छठ / बलदेव छठ) | श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्मोत्सव, पुत्रों की लंबी उम्र हेतु व्रत। |
| 4 सितंबर 2026 | श्री कृष्ण जन्माष्टमी | भगवान श्री हरि विष्णु के 8वें अवतार भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव। |
| 7 सितंबर 2026 | अजा एकादशी व्रत | समस्त पापों के नाश और आर्थिक कष्टों से मुक्ति हेतु एकादशी का व्रत। |
| 11 सितंबर 2026 | भाद्रपद अमावस्या (पिठोरी अमावस्या) | पितरों के तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य के लिए विशेष फलदायी दिन। |
| 14 सितंबर 2026 | हरतालिका तीज | अखंड सौभाग्य की प्राप्ति हेतु हस्त नक्षत्र में किया जाने वाला कठिन व्रत। |
| 14 सितंबर 2026 | गणेश चतुर्थी एवं गणेशोत्सव प्रारंभ | सिद्धि विनायक भगवान श्री गणेश की घर-घर स्थापना का महाउत्सव। |
| 15 सितंबर 2026 | ऋषि पंचमी व्रत | सप्तऋषियों की पूजा एवं अनजाने में हुए पापों के प्रायश्चित का पावन दिन। |
| 17 सितंबर 2026 | ज्येष्ठा गौरी / गौरी पूजा | धन, वैभव और सुख-समृद्धि हेतु महालक्ष्मी व गौरी माता का पूजन। |
| 19 सितंबर 2026 | श्री राधाष्टमी | श्री वृषभानु नंदिनी श्री राधा रानी का प्रकटोत्सव। |
| 22 सितंबर 2026 | परिवर्तिनी एकादशी (जलझूलनी एकादशी) | क्षीर सागर में सोए भगवान विष्णु के करवट बदलने का पावन दिन। |
| 23 सितंबर 2026 | वामन जयंती | भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा का विशेष दिन। |
| 25 सितंबर 2026 | अनंत चतुर्दशी एवं गणेश विसर्जन | 10 दिवसीय गणेशोत्सव का समापन और अनंत सूत्र बांधने का पर्व। |
| 26 सितंबर 2026 | भाद्रपद पूर्णिमा एवं पितृ पक्ष प्रारंभ | भादों मास का समापन तथा पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने वाले श्राद्ध पक्ष की शुरुआत। |
4. भाद्रपद मास का धार्मिक महत्व एवं नियम
शास्त्रों में भाद्रपद माह को आत्म-शुद्धि और भक्ति के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस महीने में कुछ विशेष नियमों का पालन करने से जीवन में सुख, शांति और मानसिक बल की प्राप्ति होती है:
- लड्डू गोपाल एवं गणेश सेवा: इस पूरे महीने में घर में बाल गोपाल (लड्डू गोपाल) को प्रतिदिन मक्खन-मिश्री का भोग लगाएं और तुलसी पत्र अर्पित करें। साथ ही भगवान गणेश की दुर्वा से पूजा करें।
- दान-पुण्य और पवित्र स्नान: भादों के महीने में पवित्र नदियों में स्नान करने और सामर्थ्य अनुसार तिल, वस्त्र, अनाज व गुड़ का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
- सद्ग्रंथों का पाठ: भाद्रपद में श्रीमद्भागवत गीता, रामायण और विष्णु सहस्रनाम का नियमित पाठ करने से मन को शांति मिलती है और बुद्धि व विवेक का विकास होता है।
- संयम व सात्विकता: इस माह में सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और तामसिक वस्तुओं से परहेज करना चाहिए। ध्यान और योग के माध्यम से ईश्वर भक्ति में मन लगाना चाहिए।














































