इराक और पड़ोसी देशों के बीच चल रहे इस पूरे विवाद ने अब एक बिल्कुल नया कूटनीतिक मोड़ ले लिया है। इस बढ़ते हुए तनाव के बीच इराक ने अपनी तरफ से एक बहुत ही कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। सरकार ने ड्रोन हमलों के संबंध में लगाए गए गंभीर आरोपों के समर्थन में ठोस सबूतों की तत्काल मांग की है। यह सबूत सीधे तौर पर पड़ोसी देश Saudi Arabia से आधिकारिक कूटनीतिक माध्यमों के जरिए मांगे गए हैं। इराक का कहना है कि बिना किसी पुख्ता प्रमाण के इस तरह के गंभीर आरोप लगाना बिल्कुल अनुचित और अस्वीकार्य है।
सऊदी अरब का आरोप: इस पूरे कूटनीतिक विवाद की मुख्य जड़ हाल ही में लगाए गए कुछ बेहद गंभीर और संवेदनशील सैन्य आरोप हैं। Saudi Arabia के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि इराक में मौजूद सशस्त्र गुटों ने उन पर सीधे ड्रोन हमले किए हैं। उनका यह विशेष दावा है कि सोमवार और मंगलवार को इराक की जमीन से कई खतरनाक ड्रोन उड़ाए गए थे। आरोप के मुताबिक इन ड्रोनों ने सीधे तौर पर राजधानी Riyadh और वहां के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को अपना निशाना बनाया था। इन्हीं दावों के बाद से दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का एक नया और गंभीर दौर पूरी तरह से शुरू हो गया है।
प्रवक्ता की प्रतिक्रिया: देश पर लगाए गए इन सभी बाहरी आरोपों का इराक सरकार के उच्च अधिकारियों ने बहुत ही कड़ाई से जवाब दिया है। इराकी प्रधानमंत्री के आधिकारिक प्रवक्ता Sabah al-Numan ने इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार का पूरा पक्ष जनता के सामने रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इराक पर लगाए गए इन सभी दावों का कोई भी ठोस आधार अभी तक सामने नहीं आया है। प्रवक्ता ने कहा कि अब तक किसी भी बाहरी पक्ष ने इन आरोपों के समर्थन में कोई भी सबूत उपलब्ध नहीं कराया है। बिना किसी साक्ष्य के इराक पर उंगली उठाना देश की छवि को खराब करने का एक अनुचित प्रयास मात्र है।
जमीन का इस्तेमाल: इस गंभीर विवाद के बीच प्रवक्ता ने इराक सरकार की अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को भी पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है। Sabah al-Numan ने यह बात फिर से दोहराई कि इराक अपनी धरती का इस्तेमाल किसी भी गलत काम के लिए नहीं होने देगा। सरकार किसी भी गैर-सरकारी या अवैध सशस्त्र समूह को अपनी जमीन से संचालित होने की बिल्कुल भी अनुमति नहीं देगी। इराक अपनी सीमा के भीतर से किसी भी दूसरे देश पर हमला करने की किसी भी योजना को सफल नहीं होने देगा। यह देश की सुरक्षा नीति का मुख्य हिस्सा है जिसका पालन हर परिस्थिति में पूरी कड़ाई के साथ किया जाएगा।
संप्रभुता का सम्मान: सरकार ने बाहरी देशों द्वारा की जाने वाली किसी भी तरह की दखलंदाजी पर भी अपनी नीति बिल्कुल साफ कर दी है। प्रवक्ता ने कहा कि इराक किसी भी विदेशी सैन्य कार्रवाई या अपनी संप्रभुता के उल्लंघन को कतई भी स्वीकार नहीं करेगा। सरकार स्पष्ट रूप से इराक के भीतर से किसी भी प्रकार की एकतरफा कार्रवाई को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगी। इसके साथ ही वह देश की सीमाओं के बाहर से होने वाले किसी भी सैन्य या कूटनीतिक उल्लंघन को भी स्वीकार नहीं करेगी। इराक एक स्वतंत्र राष्ट्र है और उसकी संप्रभुता का सम्मान करना सभी विदेशी ताकतों के लिए बेहद अनिवार्य है।
युद्ध जैसी स्थिति: इस समय पूरा मध्य पूर्व एक बहुत ही नाजुक और बेहद खतरनाक कूटनीतिक दौर से होकर गुजर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी युद्ध जैसी स्थिति ने इस पूरे इलाके को पूरी तरह से अस्थिर कर दिया है। इस अघोषित युद्ध और क्षेत्रीय गुटबाजी को देखते हुए इस समय पूरे इलाके में बहुत जबरदस्त तनाव और बेचैनी फैली हुई है। ड्रोन हमलों के आरोपों और इसके बाद हुई सैन्य कार्रवाइयों ने इस भारी क्षेत्रीय तनाव में आग में घी का काम किया है। इराक इन सभी बाहरी संघर्षों से बचते हुए अपने देश की शांति और पूर्ण सुरक्षा बनाए रखने का लगातार प्रयास कर रहा है।


























































