अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान बातचीत के लिए अब कमजोर स्थिति में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नवंबर के मध्यावधि चुनाव उनकी ईरान नीति को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं करेंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि वह जल्दबाजी में कोई भी समझौता करने के मूड में बिल्कुल भी नहीं हैं। कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप ने भरोसा जताया कि दोनों देशों के बीच एक ठोस समझौता जल्द हो सकता है। तेहरान और वाशिंगटन के बीच पिछले हफ्ते समझौते को लेकर काफी सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई थी।
समझौते का मुख्य उद्देश्य ट्रंप ऐसे समझौते की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं जिससे ‘Strait of Hormuz’ फिर से सामान्य रूप में खुल सके। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दावा करना चाहते हैं कि उन्होंने ईरान की परमाणु क्षमता को काफी हद तक सीमित किया है। इससे तीन महीने से जारी जंग को खत्म करने का एक मार्ग प्रशस्त हो सकता है। हालांकि प्रस्तावित समझौते को लेकर अभी भी कई जटिल सवाल बाकी हैं जिनके उत्तर मिलने बाकी हैं। कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों को फिलहाल आगे के समय के लिए टाल दिया गया है।
रिपब्लिकन नेताओं की चिंता ट्रंप को अपने ही समर्थकों और पार्टी के कई रिपब्लिकन नेताओं की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। आलोचकों का मानना है कि ईरान के कट्टरपंथी नेता अभी भले ही कमजोर दिखें, लेकिन वे भविष्य में और खतरनाक हो सकते हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका में कांग्रेस के नियंत्रण को तय करने वाले मध्यावधि चुनाव नजदीक हैं। ईंधन की कीमतों और महंगाई ने रिपब्लिकन नेताओं की चिंता बढ़ा दी है जिससे जनता में असंतोष की भावना है।
ट्रंप का चुनावी रुख बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों को लेकर ट्रंप ने चुनावी असर की बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें मध्यावधि चुनावों की कोई परवाह नहीं है और वह अपनी नीति पर अडिग हैं। ट्रंप ने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि वे इसे चुनावों तक टालने की उम्मीद में थे। अमेरिका की यह नीति आगामी चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है। फिलहाल ट्रंप प्रशासन अपनी कूटनीति और सैन्य शक्ति के बल पर अपनी शर्तों पर ही समझौता चाहता है।
ईरान का सैन्य घटनाक्रम इस बीच अमेरिका ने ईरान के 4 ड्रोन मार गिराए और सैन्य ठिकाने पर हमला किया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इन ड्रोन से ‘Strait of Hormuz’ को बहुत बड़ा खतरा बना हुआ था। इस हफ्ते अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ यह दूसरी बार बड़ी रक्षात्मक सैन्य कार्रवाई की है। ईरान की आक्रामक गतिविधियों को रोकने के लिए अमेरिका पूरी तरह से अपनी सैन्य क्षमता का इस्तेमाल कर रहा है। तेहरान और वाशिंगटन के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक बाजार में भी चिंता का विषय बना हुआ है।
भविष्य की संभावनाएं अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी का कोई भी समाधान भविष्य की राजनीति पर बड़ा प्रभाव डालेगा। राष्ट्रपति ट्रंप की आक्रामक नीति और ईरान का अडियल रवैया फिलहाल किसी बड़े समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधा है। यदि बातचीत विफल होती है तो अमेरिका और अधिक सैन्य दबाव बनाने की रणनीति अपना सकता है। वहीं ईरान भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने बचाव के लिए नए गठबंधन तलाशने की कोशिश कर सकता है। वैश्विक शांति के लिए इन दोनों देशों के बीच तनाव कम होना बहुत आवश्यक है।
























































