उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में 4 करोड़ रुपये के एक बहुत बड़े घोटाले का गंभीर मामला अचानक सामने आया है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने बुधवार को प्रतापगढ़, कुशीनगर, अयोध्या और अमेठी सहित कुल 14 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की है। यह पूरा विवादित मामला मुख्य रूप से सरकारी शिक्षकों और अन्य लाभार्थियों को दिए जाने वाले एरियर के करोड़ों रुपये के भुगतान से जुड़ा हुआ है। कुछ बेईमान कर्मचारियों ने एक बड़ी आपराधिक साजिश रचकर इस पूरी सरकारी रकम को गलत तरीके से डाइवर्ट करके निजी बैंक खातों में डाल दिया था। केंद्रीय जांच एजेंसी अब इस पूरे गबन मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि सभी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।
जिलाधिकारी का स्पष्ट बयान – इस पूरे घोटाले के उजागर होने के बाद स्थानीय प्रशासन ने भी अपना पक्ष और मामले की पूरी जानकारी मीडिया के सामने रखी है। अमेठी के वर्तमान जिलाधिकारी संजय चौहान ने इस मामले को लेकर बताया कि यह 4 करोड़ की धनराशि शिक्षकों और अन्य लाभार्थियों के एरियर के लिए थी। मामला संज्ञान में आने के तुरंत बाद प्रशासन द्वारा अपने स्तर पर इस वित्तीय गड़बड़ी की एक शुरुआती विभागीय जांच पूरी तरह से कराई गई थी। जिलाधिकारी के अनुसार इस शुरुआती जांच में ही धन के गबन और अनियमितता से जुड़े कई गंभीर सबूत स्पष्ट रूप से प्रशासन के सामने आ गए थे। इन अहम सबूतों के आधार पर ही सबसे पहले स्थानीय पुलिस स्टेशन में इस मामले की एक विस्तृत एफआईआर विधिवत रूप से दर्ज कराई गई थी।
हाई कोर्ट से मिला आदेश – स्थानीय प्रशासन द्वारा एफआईआर दर्ज कराने के बाद जिम्मेदार लोगों से इस गबन की गई भारी रकम की वसूली के भी कड़े निर्देश दिए गए थे। लेकिन प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से बचने के लिए आरोपी पक्ष ने तुरंत ही इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया। आरोपी पक्षों के हाई कोर्ट पहुंचने पर अदालत ने इस पूरे मामले की गंभीरता को समझा और इस पर अपना कड़ा रुख पूरी तरह से अख्तियार किया। हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने सभी तथ्यों को देखने के बाद अदालत के विशेष निर्देश पर यह जांच सीबीआई को सौंपने का बड़ा फैसला सुनाया। इसी आदेश का पालन करते हुए केंद्रीय एजेंसी ने अब इस मामले में अपनी जांच तेज कर दी है और एफआईआर में पांच लोगों को नामजद किया है।
क्लर्क की मुख्य भूमिका – इस 4 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले को अंजाम देने में विभाग के ही एक निचले स्तर के कर्मचारी की सबसे अहम भूमिका रही है। सीबीआई की जांच के अनुसार इस मामले के मुख्य आरोपियों में से एक व्यक्ति बेसिक शिक्षा विभाग में जूनियर अकाउंट्स क्लर्क के पद पर तैनात था। इसी जूनियर क्लर्क ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अन्य साथियों और कुछ बाहरी अज्ञात लोगों के साथ मिलकर गबन की यह योजना बनाई थी। सिस्टम की अंदरूनी जानकारी होने के कारण इस क्लर्क के लिए इतनी बड़ी सरकारी धनराशि की हेराफेरी करना काफी ज्यादा आसान काम साबित हुआ। इस खुलासे के बाद अब केंद्रीय एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस क्लर्क के साथ विभाग के कौन से अन्य अधिकारी शामिल थे।
अवैध धन का निवेश – सरकारी खजाने से लूटे गए इस 4 करोड़ रुपये का आरोपियों ने अपने निजी स्वार्थ के लिए बहुत ही गलत तरीके से इस्तेमाल किया है। बुधवार को की गई इस राष्ट्रव्यापी छापेमारी के दौरान सीबीआई की टीमों को इस अवैध धन के निवेश से जुड़े कई अहम सुराग और कागज मिले हैं। जांच में यह पूरी तरह से स्पष्ट हो गया है कि आरोपियों ने इस लूटी गई भारी रकम को कई अलग-अलग निजी बैंक खातों में छिपाया था। अधिकारियों ने बताया कि तलाशी के दौरान इस गबन की गई रकम के निवेश और उसके इस्तेमाल से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। इन दस्तावेजों की मदद से अब जांच एजेंसी इस पूरे अवैध धन को वापस सरकारी खजाने में लाने की कानूनी तैयारी कर रही है।
गैजेट्स खोलेंगे राज – इस पूरी जांच को और अधिक मजबूत बनाने के लिए सीबीआई की टीम ने आरोपियों के कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को अपने कब्जे में लिया है। छापेमारी स्थल से कई आधुनिक डिजिटल डिवाइस, कंप्यूटर और मोबाइल फोन को भी जांच एजेंसी द्वारा सबूत के तौर पर विधिवत रूप से जब्त किया गया है। इन सभी डिजिटल उपकरणों को अब आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत तकनीकी फॉरेंसिक जांच के लिए विशेष लैब में सुरक्षित रूप से भेजा जाएगा। फॉरेंसिक जांच से इस पूरे घोटाले के पीछे छिपे अन्य अज्ञात चेहरों और पैसों के गुप्त लेनदेन का पूरा पर्दाफाश होने की भारी उम्मीद है। केंद्रीय एजेंसी इस मामले की परतें खोलने और सभी दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए लगातार अपने हर संभव प्रयास तेजी से कर रही है।


























































