अमेरिकी सैन्य हमलों के बाद Iran के विदेश मंत्रालय ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ईरान ने अपने क्षेत्र में हुए इन नए अमेरिकी सैन्य हमलों की बहुत ही कड़े शब्दों में निंदा की है। मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि अमेरिका की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय नियमों के पूरी तरह से खिलाफ है। ईरान का मानना है कि इस तरह के सैन्य हमले से मध्य पूर्व क्षेत्र में शांति प्रक्रिया को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। ईरानी प्रशासन ने अमेरिका के इस कदम को उकसावे वाली कार्रवाई बताया है जो स्थिति को और अधिक खराब कर सकती है।
यूएन चार्टर का खुला उल्लंघन: Iran के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों को UN चार्टर का खुला उल्लंघन करार दिया है। ईरान ने Washington पर सीधा आरोप लगाया है कि वह जानबूझकर क्षेत्रीय स्थिरता को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका ने इस सैन्य कार्रवाई के जरिए पूर्व में हुए युद्धविराम समझौते का भी उल्लंघन किया है। ईरान का तर्क है कि वाशिंगटन की यह आक्रामक नीति पूरी दुनिया के सामने उसकी दोहरी मानसिकता को उजागर करती है। ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे अमेरिका की इस अनुचित कार्रवाई का कड़ा विरोध करें।
पड़ोसी देशों को सख्त चेतावनी: इस पूरे तनावपूर्ण घटनाक्रम के बीच ईरान ने अन्य देशों को भी सख्त चेतावनी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जो भी देश ईरान के खिलाफ हमलों के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल होने देगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। ईरान ने स्पष्ट किया है कि ऐसी किसी भी सैन्य सुविधा या हवाई क्षेत्र का उपयोग आक्रामकता का सीधा स्रोत माना जाएगा। इस चेतावनी का उद्देश्य पड़ोसी देशों को अमेरिका का साथ देने से रोकना और अपनी संप्रभुता की कड़ी रक्षा करना है। ईरान यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कोई भी क्षेत्रीय ताकत अमेरिका के इस सैन्य अभियान में किसी भी प्रकार की मदद न करे।
वैध निशाना बनने का बड़ा खतरा: ईरान ने कड़े शब्दों में कहा है कि अमेरिका की मदद करने वाले देश जवाबी कार्रवाई का शिकार बनेंगे। मंत्रालय ने बयान दिया है कि ऐसे सभी सहयोगी देश ईरानी सेना के जवाबी हमलों के लिए पूरी तरह से वैध निशाना समझे जाएंगे। ईरानी सेना अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के लिए किसी भी हद तक जाने और त्वरित जवाबी हमला करने के लिए तैयार है। इस बयान से पूरे खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक तनाव और एक नए बड़े क्षेत्रीय युद्ध के छिड़ने का खतरा बढ़ गया है। ईरान ने अपनी सैन्य ताकत का हवाला देते हुए सभी संबंधित पक्षों को इस खतरनाक संघर्ष से दूर रहने की सलाह दी है।
संयुक्त राष्ट्र से तत्काल आग्रह: अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने न्याय और शांति के लिए सीधे UN का दरवाजा खटखटाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र से अमेरिका की इन आक्रामक और हिंसक कार्रवाइयों का संज्ञान लेने का आग्रह किया है। ईरान चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र इस मामले में हस्तक्षेप करे और वाशिंगटन को उसकी इन गलत हरकतों के लिए जिम्मेदार ठहराए। मंत्रालय का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं चुप रहीं, तो शक्तिशाली देश कमजोर देशों पर इसी तरह से हावी होते रहेंगे। ईरान ने मांग की है कि संयुक्त राष्ट्र इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देकर अमेरिका पर कड़ा कूटनीतिक दबाव बनाए।
मस्कट वार्ता पर बयान खारिज: विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा Muscat में हुई बातचीत पर दिए गए बयान को खारिज कर दिया है। ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति की हालिया टिप्पणियों को सिरे से नकारते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर बोला गया सरासर झूठ बताया है। ईरान का कहना है कि वाशिंगटन जानबूझकर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है ताकि वह अपनी सैन्य आक्रामकता को सही ठहरा सके। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि मस्कट वार्ता के जो भी वास्तविक परिणाम थे, वे अमेरिकी दावों से पूरी तरह से विपरीत थे। इस कूटनीतिक तकरार से यह साफ हो गया है कि भविष्य में दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार की शांति वार्ता बहुत मुश्किल है।


























































