चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि मंदिर ने सुरक्षा कड़ी कर दी है। मंदिर प्रबंधन ने दर्शनार्थियों के प्रवेश को लेकर अपनी सुरक्षा व्यवस्था में कुछ बड़े बदलाव किए हैं। इस नए नियम के तहत अब विशिष्ट लोगों को जारी किए गए कई पुराने पास अमान्य कर दिए गए हैं। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और गोपाल राव की पहचान पर जारी अति विशिष्ट पास अब काम नहीं करेंगे। इसके साथ ही ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के नाम पर जारी वीवीआईपी पास पर भी प्रवेश की अनुमति नहीं है।
इस्तीफे और पहचान-पत्र हुए निष्क्रिय: आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इन दोनों वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफा देने के बाद मंदिर ट्रस्ट ने कड़े प्रशासनिक कदम उठाए हैं। ऐसे विशिष्ट पास जारी करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इनके पहचान-पत्र पूरी तरह निष्क्रिय कर दिए गए हैं। पहचान-पत्र निष्क्रिय होने के कारण पहले से जारी किए गए सभी पास स्वतः ही अमान्य हो गए हैं। सुरक्षा जांच में अब इन पुराने पासों को दिखाकर कोई भी व्यक्ति मंदिर परिसर में प्रवेश नहीं कर सकता है।
आठ आरोपियों की हुई गिरफ्तारी: चढ़ावा चोरी के इस बेहद संवेदनशील मामले में पुलिस लगातार अपनी छापामार कार्रवाई कर रही है। इस मामले में पुलिस टीम द्वारा अब तक कुल आठ लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेजा जा चुका है। गिरफ्तार किए गए इन लोगों में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कुछ अहम कर्मचारी भी शामिल हैं। ये सभी कर्मचारी सीधे तौर पर मंदिर में नकद चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया से लंबे समय से जुड़े हुए थे। इन गिरफ्तारियों के बाद मंदिर के अन्य कर्मचारियों के बीच भी भारी हड़कंप और खौफ का माहौल है।
वित्तीय लेनदेन की हो रही जांच: गिरफ्तारी के बाद जांचकर्ता सभी आरोपियों के पुराने वित्तीय लेन-देन की बहुत ही बारीकी से जांच कर रहे हैं। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि चोरी किए गए पैसे से कहां-कहां नई संपत्ति की खरीद-फरोख्त की गई है। आरोपियों के अलावा उनके रिश्तेदारों के नाम पर किए गए निवेश की भी पुलिस द्वारा सघन पड़ताल की जा रही है। इस वित्तीय जांच का मुख्य उद्देश्य कथित धन के लेनदेन की पूरी कड़ियों का सही तरीके से पता लगाना है। पुलिस को अंदेशा है कि चोरी का पैसा कई अलग-अलग बैंक खातों और बेनामी संपत्तियों में लगाया गया है।
पुलिस ने मांगी सात दिन की रिमांड: जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस अब गिरफ्तार किए गए आरोपियों से और पूछताछ करना चाहती है। इसी कड़ी में पुलिस ने जेल में बंद दो मुख्य आरोपियों की सात दिन की पुलिस रिमांड अदालत से मांगी है। पुलिस का कहना है कि वर्तमान जांच के दौरान कई नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इन नए तथ्यों की पुष्टि करने और मामले के अन्य साक्ष्य जुटाने के लिए यह रिमांड बहुत आवश्यक है। रिमांड मिलने पर पुलिस इन आरोपियों को घटना स्थल पर ले जाकर भी सच्चाई उगलवाने का प्रयास करेगी।
अदालत में सुनवाई की तारीख तय: पुलिस द्वारा दायर की गई इस रिमांड अर्जी पर स्थानीय अदालत ने अपना संज्ञान ले लिया है। अदालत ने पुलिस के इस महत्वपूर्ण आवेदन पर सुनवाई के लिए चौदह जुलाई की तारीख तय की है। चौदह जुलाई को अदालत यह फैसला करेगी कि आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेजा जाए या नहीं। अगर अदालत से रिमांड मिल जाती है, तो इस मामले में कई अन्य बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है। फिलहाल पूरी जांच टीम चौदह जुलाई को होने वाली इस अहम अदालती सुनवाई का बेसब्री से इंतजार कर रही है।

























































