बारिश के पानी को सहेजने के लिए देश भर में कैच द रेन का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। चार जुलाई से शुरू हुए इस अभियान के तहत पुराने जल-स्त्रोतों को फिर से जीवित किया जा रहा है। इस मुहिम में गांव, शहर, पंचायतें और सामाजिक संस्थाएं भी बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी निभा रही हैं। हमें भी अपने आस-पास मौजूद किसी तालाब या कुएं के संरक्षण की जिम्मेदारी जरूर लेनी चाहिए। आज बचाई गई पानी की हर एक बूंद आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी साबित होगी।
वृक्षारोपण का विश्व रिकॉर्ड: गुजरात के अहमदाबाद शहर में जन-भागीदारी की एक बहुत ही अद्भुत शक्ति देखने को मिली है। वहां के भाड़ज क्षेत्र में पच्चीस हजार लोगों ने मिलकर सिर्फ एक घंटे में साढ़े तीन लाख पौधे रोपे हैं। इस विशेष अभियान में स्कूली बच्चों, एनसीसी कैडेट्स और आम नागरिकों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। लोगों के इस शानदार सामूहिक प्रयास को गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया है। आने वाले कुछ ही वर्षों में ये सभी नन्हे पौधे एक घने शहरी वन का विशाल रूप ले लेंगे।
प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा: पर्यावरण संरक्षण के कारण ही गुजरात के गिर जंगलों में साठ वर्षों बाद इंडियन ग्रे हॉर्नबिल वापस लौटा है। दूसरी तरफ बिहार राज्य के सीतामढ़ी में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से कचरे से कमाई का शानदार काम हो रहा है। यहां हानिकारक कचरे को रीसायकल करके पार्कों और स्कूलों के लिए बेहद आकर्षक बेंच बनाई जा रही हैं। एक मजबूत और आरामदायक बेंच बनाने में लगभग चालीस किलो सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है। इन सभी प्रयासों से आम जनता के बीच पर्यावरण संरक्षण को लेकर काफी जागरूकता बढ़ रही है।
महिलाओं की सफल पहल: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में स्थित लखीवाला गांव की महिलाओं ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यहां के एक सेल्फ हेल्प ग्रुप ने प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से विदुर प्रेरणा स्वदेशी हर्बल टी तैयार की है। महिलाओं का यह शानदार प्रयास सिर्फ एक लाख रुपये की छोटी सी पूंजी से शुरू हुआ था। आज अपने अनोखे स्वाद की वजह से यह हर्बल चाय देश के बड़े संस्थानों तक पहुंच चुकी है। यह पहल दिखाती है कि महिलाओं का आत्मविश्वास एक छोटे से प्रयास को बड़े बदलाव में बदल सकता है।
ब्रह्मांड में चमका लोकटक: मणिपुर के रहने वाले डॉक्टर रोनाल्डो लैश्राम एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक हैं जो जापान में काम करते हैं। उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर अंतरिक्ष में नई आकाशगंगाओं के एक विशाल समूह की खोज की है। उनकी टीम ने इस पूरे नए समूह का नाम मणिपुर की खूबसूरत झील के नाम पर लोकटक रखा है। जिस प्रकार झील में द्वीप तैरते हैं, उसी प्रकार ब्रह्मांड में ये आकाशगंगाएं एक संरचना बनाती हैं। आज मणिपुर की यह लोकटक झील देश के साथ-साथ पूरे विशाल ब्रह्मांड में भी अपनी चमक बिखेर रही है।
स्थानीय कला को बढ़ावा: प्रधानमंत्री ने देशवासियों से हस्तकला को प्रोत्साहित करने और लोकल के लिए वोकल बनने की अपील की है। उन्होंने त्रिपुरा के बांस से बने पारंपरिक वाद्ययंत्र चौंगप्रंग को लोकप्रिय बनाने वाले सूरज कुमार की तारीफ की। इसके साथ ही श्रीनगर में पारंपरिक चटाई वगू को नया जीवन देने वाले गुलाम हुसैन का भी जिक्र किया। देश की इन सभी सांस्कृतिक विरासतों को सहेजने वाले असंख्य लोग आज पूरे देश को गर्व से भर देते हैं। अंत में उन्होंने सभी देशवासियों से इस वर्ष भी अपने घरों पर पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराने का आग्रह किया।


























































