20 सितंबर 2026, कल रविवार को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि रहेगी। रविवार का दिन सूर्य नारायण की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में सूर्य को आत्मबल, आरोग्य, पिता, प्रतिष्ठा, उच्च पद और प्रशासनिक सफलता से संबंधित ग्रह माना गया है। ऐसे में जिन लोगों को मान-सम्मान से जुड़ी परेशानियां महसूस होती हैं, सरकारी कामकाज में रुकावट आती है या कुंडली में सूर्य कमजोर अथवा प्रतिकूल स्थिति में माना जाता है, वे इस दिन विधिपूर्वक सूर्य उपासना कर सकते हैं। सूर्योदय से पहले उठकर स्नान, सूर्य को अर्घ्य, मंत्र जाप और दान जैसे उपायों को विशेष महत्व दिया गया है।
सूर्य देव की पूजा की विधि
रविवार को सूर्य पूजा के लिए सुबह का समय महत्वपूर्ण माना गया है। संभव हो तो सूर्योदय से पहले, लगभग सुबह 4:30 से 5:30 बजे के बीच उठकर दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर स्नान करें। इसके बाद साफ लाल, पीले या केसरिया रंग के वस्त्र धारण करें। इस दिन काले और नीले रंग के कपड़े पहनने से बचने की सलाह दी गई है। पूजा की तैयारी करते समय एक साफ तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें और उसमें गंगाजल, लाल चंदन, कुमकुम, लाल फूल जैसे गुड़हल तथा थोड़े से साबुत अक्षत मिला लें। सूर्योदय के समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों और लोटे को सीने से ऊपर, लगभग सिर की ऊंचाई तक ले जाकर धीरे-धीरे सूर्य देव को जल अर्पित करें। अर्घ्य देते समय गिरती हुई जलधारा के बीच से सूर्य के दर्शन करते हुए उनका ध्यान करें। यह भी ध्यान रखें कि अर्घ्य का जल पैरों पर न गिरे। इसके लिए नीचे कोई गमला या बर्तन रखा जा सकता है और बाद में उस जल को किसी पौधे की जड़ में डाल दें।
सूर्य मंत्रों का जाप
अर्घ्य देने के बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश या लाल रंग के आसन पर बैठकर सूर्य देव के मंत्रों का जाप किया जा सकता है। मंत्र जाप के लिए लाल चंदन की माला का प्रयोग करने और कम से कम 108 बार यानी एक माला जाप करने का विधान बताया गया है। ग्रह शांति के लिए बीज मंत्र के रूप में ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः का जाप किया जा सकता है। सफलता और सूर्य तेज की साधना के लिए ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप करें। वहीं बुद्धि और आरोग्य की कामना से सूर्य गायत्री मंत्र का जाप किया जा सकता है—ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्। नियमित और श्रद्धापूर्वक मंत्र जाप के साथ सूर्य देव का ध्यान करने से साधना को पूर्णता देने का प्रयास किया जा सकता है।
रविवार को क्या करें
सूर्य देव को पिता का प्रतीक भी माना जाता है, इसलिए रविवार को पिता, दादा या पिता समान किसी बुजुर्ग का सम्मान करना और उनके चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लेना शुभ माना गया है। यदि कोई व्यक्ति कोर्ट-कचहरी, शत्रु संबंधी परेशानी या नौकरी से जुड़ी कठिनाइयों से जूझ रहा है, तो इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का तीन बार पाठ करने की सलाह दी गई है। जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को गेहूं, तांबा, गुड़, माचिस, घी अथवा लाल कपड़े का दान भी किया जा सकता है। इन उपायों का उद्देश्य सूर्य से जुड़ी सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और धार्मिक आस्था को मजबूत करना माना जाता है।
रविवार को किन बातों से बचें
सूर्य साधना के दौरान कुछ नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है। सूर्य को अनुकूल बनाने की इच्छा रखने वाले लोग रविवार को नमक का सेवन न करने का संकल्प ले सकते हैं और एक समय बिना नमक का मीठा भोजन, जैसे दलिया, दूध-चावल या हलवा ग्रहण कर सकते हैं। सुबह देर तक सोने से भी बचना चाहिए और सूर्योदय के बाद दिन की शुरुआत करने के बजाय समय पर उठने का प्रयास करना चाहिए। इस दिन मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और मसूर की दाल जैसे तामसिक भोजन से दूर रहने की बात कही गई है। इसके अलावा रविवार को लोहा, कांच तथा नीले या काले रंग की वस्तुओं की खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है।
सूर्य के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के उपाय
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य राहु या केतु से पीड़ित माना गया हो अथवा नीच स्थिति के कारण प्रतिकूल परिणाम मिलने की आशंका हो, तो कुछ विशेष उपाय किए जा सकते हैं। रविवार को दोपहर के समय थोड़ा गुड़ और तांबे का एक टुकड़ा लेकर साफ बहते जल, जैसे नदी या नहर में प्रवाहित करने का उपाय बताया गया है। जेब या पर्स में बिना छेद वाला छोटा चौकोर तांबे का सिक्का रखने का भी उपाय किया जाता है। इसके साथ चींटियों को शक्कर मिला आटा और पक्षियों को गेहूं के दाने खिलाकर सेवा की जा सकती है। सूर्य से संबंधित रत्न धारण करने की इच्छा हो तो बिना कुंडली देखे निर्णय लेने के बजाय योग्य ज्योतिषी से कुंडली का परीक्षण कराने के बाद ही माणिक्य रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है। माणिक्य को सोने या तांबे की अंगूठी में जड़वाकर दाहिने हाथ की अनामिका में पहनने की परंपरा बताई गई है।
20 सितंबर का विशेष महत्व
20 सितंबर का रविवार धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य उपासना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के इस दिन सुबह की साधना, सूर्य को अर्घ्य, मंत्र जाप, पिता और बुजुर्गों का सम्मान तथा जरूरतमंदों को दान जैसे कार्य किए जा सकते हैं। सूर्य को आत्मबल, आरोग्य, पिता, सम्मान और उच्च पद से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए सूर्य उपासना का उद्देश्य केवल किसी एक समस्या का समाधान नहीं बल्कि जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मकता बढ़ाना भी माना जाता है। श्रद्धा के साथ पूजा करते समय अपनी क्षमता और सुविधा के अनुसार नियमों का पालन करें तथा रत्न जैसे ज्योतिषीय उपाय कुंडली की व्यक्तिगत स्थिति देखकर ही अपनाएं।













































