उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित लोकभवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न विभागों में चयनित 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। कार्यक्रम में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं, आयुष, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास तथा उद्योग विभाग से जुड़े पदों पर चयनित अभ्यर्थी शामिल रहे। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान स्वयं 21 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे, जबकि अन्य 797 अभ्यर्थियों को संबंधित विभागों के माध्यम से नियुक्ति पत्र दिए गए। इस नियुक्ति पत्र वितरण के साथ विभिन्न विभागों में चयनित युवाओं के सरकारी सेवा से जुड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
स्वास्थ्य और आयुष से लेकर उद्योग तक नियुक्तियां इस नियुक्ति अभियान में अलग-अलग विभागों के पदों पर चयनित युवाओं को शामिल किया गया। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के साथ आयुष विभाग में चयनित अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इसके अलावा व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास से जुड़े चयनित अभ्यर्थियों तथा उद्योग विभाग के पदों पर चयनित युवाओं को भी सरकारी सेवा से जोड़ा गया। इस तरह 818 नियुक्तियों में कई अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े पद शामिल रहे और चयनित अभ्यर्थियों को उनकी संबंधित विभागीय जिम्मेदारियों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंचाया गया।
पारदर्शी भर्ती को बताया परिणाम की वजह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में भर्ती बोर्डों और आयोगों की भूमिका को लेकर कहा कि जब ये संस्थाएं शासन की किसी राजनीति का शिकार नहीं होतीं और परीक्षा की प्रक्रिया पारदर्शी तथा शुचितापूर्ण तरीके से पूरी होती है, तो उसका परिणाम भी इसी तरह सामने आता है। उन्होंने विभिन्न विभागों में पारदर्शी तरीके से साढ़े नौ लाख नियुक्ति पत्र दिए जाने का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नियुक्तियों के परिणाम सामने हैं और इसी को उन्होंने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के प्रभाव के रूप में प्रस्तुत किया।
पुरानी भर्ती व्यवस्था पर मुख्यमंत्री का हमला अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए उस समय की कानून-व्यवस्था और भर्ती व्यवस्था पर अपनी टिप्पणी रखी। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में हर दूसरे दिन दंगा होता था और कई महीनों तक कर्फ्यू लगा रहता था, जिससे लोगों के सुरक्षित रहने की स्थिति प्रभावित थी। भर्ती बोर्डों और आयोगों के संबंध में उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार ने अपने भाई-भतीजों को इन संस्थाओं में बैठाकर पूरी भर्ती प्रक्रिया को बदनाम कर दिया था। मुख्यमंत्री ने इस पुराने दौर का उल्लेख करते हुए वर्तमान भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को महत्वपूर्ण बताया।
चयनित अभ्यर्थियों को नई जिम्मेदारी नियुक्ति पत्र मिलने के साथ 818 चयनित युवाओं के लिए सरकारी सेवा की नई शुरुआत हुई। अलग-अलग विभागों से जुड़े इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति का दायरा स्वास्थ्य सेवाओं, आयुष व्यवस्था, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास तथा उद्योग विभाग तक फैला हुआ है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की ओर से 21 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे जाने के बाद बाकी 797 चयनित अभ्यर्थियों को संबंधित विभागों के माध्यम से नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराए गए। इस तरह मुख्यमंत्री की मौजूदगी में आयोजित मुख्य कार्यक्रम के साथ-साथ संबंधित विभागों के स्तर पर भी नियुक्ति वितरण की प्रक्रिया पूरी की गई।
नौकरी के साथ भर्ती प्रक्रिया पर सरकार का संदेश लखनऊ के लोकभवन में हुए इस कार्यक्रम में 818 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाने के साथ मुख्यमंत्री ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार का दृष्टिकोण भी सामने रखा। उन्होंने पारदर्शी और शुचितापूर्ण परीक्षा प्रक्रिया को नियुक्तियों के परिणाम से जोड़ते हुए साढ़े नौ लाख नियुक्ति पत्र दिए जाने का उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने वर्ष 2017 से पहले की भर्ती व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उस समय भाई-भतीजावाद के कारण भर्ती बोर्डों और आयोगों की पूरी प्रक्रिया बदनाम हुई थी। इस तरह कार्यक्रम में एक ओर युवाओं को सरकारी सेवा से जोड़ने की प्रक्रिया पूरी हुई, वहीं मुख्यमंत्री के संबोधन में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और पुराने दौर की व्यवस्था को लेकर सरकार का राजनीतिक पक्ष भी सामने आया।












































