पीओके में चल रहे इस व्यापक प्रदर्शन के पीछे कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का हाथ है। इन सभी संगठनों के संयुक्त मंच ‘ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी’ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। यह कमेटी मुख्य रूप से वहां मौजूद तथाकथित बारह विवादित सीटों को लेकर लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रही है। कमेटी का साफ दावा है कि पाकिस्तान की सरकार इन सीटों का दुरुपयोग करती है। सरकार इन सीटों का इस्तेमाल केवल अपनी पसंद के व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनवाने के लिए करती है।
महंगाई और प्रशासनिक उदासीनता इन राजनीतिक विवादों के अलावा स्थानीय लोगों की कई अन्य गंभीर समस्याएं भी हैं। क्षेत्र में बीते कई महीने से बढ़ती महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। इसके साथ ही सरकार की प्रशासनिक उदासीनता के कारण लोगों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। राजनीतिक भेदभाव और अल्पसंख्यकों पर हो रहे कथित अत्याचारों के खिलाफ भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इन सभी मुद्दों ने मिलकर क्षेत्र की जनता को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है।
भारत सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया पीओके के इन बिगड़ते हालात को लेकर भारत सरकार ने भी अपनी बहुत कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत सरकार ने कहा है कि वहां जारी व्यापक जन प्रदर्शन पाकिस्तान के आर्थिक शोषण का प्रत्यक्ष परिणाम हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, वहां के लोगों को उनके मौलिक अधिकारों से पूरी तरह वंचित किया जा रहा है। भारत ने इसे पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे घोर प्रशासनिक दमन का नतीजा बताया है। इन नीतियों के कारण ही वहां की जनता इस समय भारी आक्रोश और पीड़ा में है।
स्थानीय चुनावों की असलियत भारत के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को पीओके में कराए जा रहे स्थानीय निकाय चुनावों पर भी सवाल खड़े किए हैं। भारत ने स्पष्ट किया है कि ये चुनाव केवल एक दिखावा मात्र हैं। मंत्रालय ने कहा कि यह पाकिस्तान द्वारा अपने अवैध कब्जे पर पर्दा डालने की एक बहुत बड़ी साजिश है। चुनाव के नाम पर पाकिस्तान इस क्षेत्र में हो रहे मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघनों को छिपाने की कोशिश कर रहा है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने पाकिस्तान की इन चालाकियों को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत का रुख पीओके में हो रही इस भारी हिंसा के मुद्दे को भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठाया है। इससे पहले भारत ने संयुक्त राष्ट्र में भी इस हिंसा को लेकर पाकिस्तान को जमकर धोया था। भारतीय प्रतिनिधियों ने कश्मीरियों के बुनियादी अधिकारों के निरंतर दमन की बहुत कड़े शब्दों में निंदा की थी। उन्होंने वहां हो रहे मौलिक स्वतंत्रता के हनन को पूरी दुनिया के सामने प्रमुखता से रखा। भारत का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि वह पीओके के लोगों के मानवाधिकारों के प्रति कितना संवेदनशील है।
फारूक अब्दुल्ला की अहम चिंता पीओके के इन खतरनाक हालात पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के चीफ फारूक अब्दुल्ला ने भी गहरी चिंता जताई है। उन्होंने भारत सरकार से इस संवेदनशील मुद्दे पर खुलकर आवाज उठाने की विशेष अपील की है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग से भी अनुरोध किया है कि वे खुद वहां जाकर लोगों की समस्याएं देखें। उन्होंने कहा कि आयोग को वहां जाकर इन गंभीर समस्याओं को हल करने की पूरी कोशिश करनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री से भी इस दिशा में उचित कदम उठाने की अपील की है।

























































