स्वप्नों का स्वरूप और फल की मान्यता। स्वप्न विचार की परंपरा में हर सपना फलदायक नहीं माना गया है। दिन में देखे गए स्वप्न, अत्यधिक चिंता के कारण आने वाले स्वप्न, किसी रोग से उत्पन्न स्वप्न या शरीर की प्रकृति में विकार के कारण दिखाई देने वाले स्वप्नों को सामान्यतः फल विचार के लिए ग्रहण नहीं किया जाता। कर्मों के उदय से उत्पन्न स्वप्नों को शुभ और अशुभ दो प्रकार का बताया गया है, जबकि पूर्व संचित कर्मों के उदय से उत्पन्न स्वप्नों के भी अलग-अलग परिणाम माने गए हैं। इस परंपरा के अनुसार कुछ स्वप्न व्यक्ति के पूर्व संस्कारों और कर्मों से जुड़े संकेत माने जाते हैं और उनके आधार पर भविष्य में मिलने वाले सुख, समृद्धि, संकट, धन, पद या अन्य घटनाओं का संकेत समझा जाता है।
शरीर की प्रकृति के अनुसार दिखाई देने वाले स्वप्न। स्वप्न विचार में व्यक्ति की प्रकृति के आधार पर भी कुछ विशेष दृश्यों का उल्लेख मिलता है। कफ प्रकृति वाले व्यक्ति को सपने में जल, जल से उत्पन्न पदार्थ, धान्य, पत्तों सहित कमल, मणि, मोती और प्रवाल जैसी वस्तुएं दिखाई देने की बात कही गई है। पित्त प्रकृति वाले व्यक्ति के स्वप्न में रक्त, पीले रंग की वस्तुएं, अग्नि से संस्कारित पदार्थ तथा सोने के आभूषण और उपकरण दिखाई देने का उल्लेख मिलता है। वहीं वायु प्रकृति वाले व्यक्ति को गिरना, पानी में तैरना, किसी सवारी पर चढ़ना, पर्वत, वृक्ष या ऊंचे प्रासाद पर चढ़ने जैसे दृश्य दिखाई दे सकते हैं। इन स्वप्नों को स्वप्न देखने वाले व्यक्ति की प्रकृति से जोड़कर देखा गया है और इनके अलग-अलग संकेत माने गए हैं।
राज्य, पद और वैभव से जुड़े शुभ संकेत। स्वप्न में सिंह, व्याघ्र, हाथी, गाय, बैल, घोड़े तथा मनुष्यों से युक्त रथ पर सवार होकर यात्रा करते हुए दिखाई देना अत्यंत प्रभावशाली संकेत माना गया है और ऐसे स्वप्न को राज्य प्राप्ति से जोड़ा गया है। श्रेष्ठ हाथी पर सवार होकर महल या समुद्र में प्रवेश करने का स्वप्न देखने वाले के लिए भी विशेष फल बताया गया है। सफेद हाथी पर बैठकर नदी या नदी के किनारे भात का भोजन करते हुए स्वयं को देखना शीघ्र राजपद मिलने का संकेत माना गया है। इसी तरह प्रासाद, भूमि या किसी सवारी पर बैठकर सोने अथवा चांदी के बर्तनों में स्नान, भोजन और पेय आदि का सेवन करते हुए स्वयं को देखना राज्य की प्राप्ति से जोड़ा गया है। राजा द्वारा स्वप्न में सफेद रंग के मल-मूत्र को इधर-उधर खींचते हुए देखना भी शीघ्र राज्य और उससे जुड़े लाभ मिलने का संकेत माना गया है। जीभ को नाखून से खुरचते हुए देखना या स्वयं को रक्त के समान लाल रंग की लंबी झील में स्थित देखना भी ऐसा स्वप्न बताया गया है, जिसका फल नीच व्यक्ति के लिए भी राजपद की प्राप्ति के रूप में माना गया है।
धन, विजय और सौभाग्य देने वाले स्वप्न। स्वप्न में वन, पर्वत और अरण्य से युक्त पृथ्वी के साथ समुद्र के जल को अपनी भुजाओं के सहारे पार करते हुए स्वयं को देखना राज्य प्राप्ति का संकेत माना गया है। सूर्य या चंद्रमा को स्पर्श करते हुए दिखाई देना सौभाग्य और धन की प्राप्ति से जोड़ा गया है। इसी तरह शत्रु के सेनापति का वध करने के बाद श्मशान भूमि में बिना भय के घूमते हुए स्वयं को देखना भी धन और सौभाग्य का संकेत माना गया है। स्वप्न में लिंगच्छेद दिखाई देना पुरुष के लिए स्त्री की प्राप्ति और भगच्छेद दिखाई देना स्त्री के लिए पुरुष की प्राप्ति का संकेत बताया गया है। किसी राजा को स्वप्न में अपना सिर कटा हुआ दिखाई दे या स्वयं को तलवार से छेदा जाता हुआ देखे, तो उसके लिए हजारों की संख्या में लाभ और प्रचुर भोग प्राप्त होने का उल्लेख मिलता है। राजा द्वारा स्वप्न में धनुष पर बाण चढ़ाना, धनुष का स्फालन करना या प्रत्यंचा को समेटना देखना अर्थलाभ, युद्ध में विजय और शत्रु के वध का संकेत माना गया है।
समृद्धि, देव दर्शन और संकट से मुक्ति के संकेत। सफेद वस्त्रों तथा श्रेष्ठ आभूषणों से सजे हुए स्वयं को हाथी पर सवार और भयभीत अवस्था में देखना समृद्धि प्राप्त होने का संकेत माना गया है। स्वप्न में देवताओं, साधु-संतों, ब्राह्मणों या प्रेतों को प्रसन्न और संतोष की अवस्था में देखना तथा उनके दर्शन होना भी एक प्रकार का फलदायक संकेत बताया गया है, जबकि इन्हीं के क्रोधित रूप में दिखाई देने पर विपरीत परिणाम की बात कही गई है। घर या घर के द्वार को विवर्ण अथवा बदला हुआ पहचानना शीघ्र ही किसी विपत्ति से छुटकारा मिलने का संकेत माना गया है। स्वप्न में शर्बत या जल पीते हुए स्वयं को देखना अथवा किसी बंधे हुए व्यक्ति को मुक्त करना भी विशेष फलदायक बताया गया है। इसमें ब्राह्मण के लिए इसे शुभ और शिष्य के लिए धनवृद्धि का संकेत माना गया है। नीचे स्थित कुएं के जल से भयभीत होकर किसी छिद्र या मार्ग की ओर स्थल पर ऊपर चढ़ते हुए दिखाई देना धन, धान्य और बुद्धि में वृद्धि का संकेत माना गया है।
अशुभ स्वप्नों में संकट और मृत्यु के संकेत। स्वप्न में श्मशान के भीतर सूखे वृक्ष, लताएं या सूखी लकड़ी देखना अथवा स्वयं को यज्ञ के खंभे पर चढ़ते हुए देखना विपत्ति का संकेत माना गया है। शीशा, रांगा, जस्ता, पीतल, रस्सी, सिक्का या मधु का दान करते हुए स्वयं को देखना मृत्यु का निश्चित संकेत बताया गया है। असमय आने वाले फल-फूल अथवा समय पर आने वाले लेकिन निंदित फल-फूल किसी को देते हुए दिखाई देना भी आयास या कष्ट का लक्षण माना गया है। जिस घर में स्वप्न के दौरान लाक्षारस, रोग अथवा वायु का अभाव दिखाई दे, वहां आग लगने या चोरों द्वारा शस्त्र से आघात किए जाने जैसी विपत्ति का संकेत बताया गया है। दूसरी ओर, स्वप्न में अलंकार धारण करना, किसी रस का सेवन करना अथवा अगम्या मानी गई स्त्री के साथ रमण करते हुए देखना सौभाग्य की वृद्धि से जोड़ा गया है। वीणा, बल्लकी या विष को ग्रहण करने के बाद जाग जाना स्त्री को सुंदर और गुणवान कन्या की प्राप्ति का संकेत माना गया है। विष का सेवन करके मृत्यु को प्राप्त होना या स्वप्न में विष खाना दिखाई देना भी इस परंपरा में धन-धान्य की प्राप्ति तथा लंबे समय तक किसी बंधन में न रहने का संकेत माना गया है।
दक्षिण दिशा और मृत्यु से जुड़े स्वप्न। कुछ स्वप्नों को परंपरा में विशेष रूप से गंभीर और अशुभ संकेत माना गया है। यदि कोई व्यक्ति स्वप्न में प्रेतों के साथ युद्ध करता हुआ दिखाई दे या गधे से जुते रथ पर बैठकर दक्षिण दिशा की ओर जाता हुआ स्वयं को देखे, तो शीघ्र मृत्यु का संकेत बताया गया है। रात्रि के उत्तरार्ध में यदि किसी स्वप्न में सूअर से जुड़ी स्त्री किसी बंधे हुए व्यक्ति की गर्दन खींचती हुई दिखाई दे, तो उसके लिए पर्वत पर मृत्यु होने का संकेत बताया गया है। इसी प्रकार खर, गर्दभ, सूअर, ऊंट या भेड़िए जैसे पशुओं से जुड़े रथ पर सवार होकर दक्षिण दिशा की ओर जाते हुए स्वयं को देखना भी शीघ्र मृत्यु से संबंधित स्वप्न माना गया है। यदि स्वप्न में कृष्णावास होने के बावजूद प्रवास की स्थिति न बने और दक्षिण दिशा की ओर गमन दिखाई दे, तो मार्ग में भय तथा मृत्यु का संकेत बताया गया है। रात्रि के अंतिम भाग में दर्वासा, कृष्ण भस्म या तेल का पान करते हुए स्वयं को देखना भी कल्याणकारी नहीं माना गया है।
धन प्राप्ति और विशेष स्वप्न संकेतों का निष्कर्ष। स्वप्न में अभक्ष्य पदार्थ का सेवन करते हुए दिखाई देना, पूजनीय व्यक्तियों के दर्शन होना तथा मौसम के अनुसार आने वाले फूलों और फलों को देखना धन प्राप्ति से जोड़ा गया है। इसके विपरीत श्रेष्ठ महल के परकोटे पर चढ़ते हुए स्वयं को देखना लक्ष्मी के त्याग और गंभीर कष्ट का संकेत माना गया है। इस प्रकार स्वप्न विचार में एक ही प्रकार के दृश्य का अर्थ व्यक्ति की स्थिति, प्रकृति, स्वप्न के समय और उसमें दिखाई देने वाले अन्य संकेतों के आधार पर अलग-अलग माना गया है। परंपरागत स्वप्न शास्त्र में विशेष रूप से राजपद, धन, विजय, समृद्धि, संकट, बंधन और मृत्यु से जुड़े अनेक संकेतों का विस्तार से वर्णन मिलता है। हालांकि ये सभी फल पारंपरिक स्वप्न-विचार की मान्यताओं पर आधारित हैं, इसलिए इन्हें निश्चित भविष्यवाणी के बजाय उसी परंपरा के संदर्भ में समझना उचित है।
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