भारी बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ ने पूरे इलाके में बहुत ही भारी तबाही मचा रखी है। मंगलवार सुबह से ही जिले में लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है जिससे हालात बेकाबू हो गए हैं। इस लगातार बारिश के कारण जिले के सभी नाले और नदियां पूरी तरह से उफान पर बह रहे हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ने से आस-पास के कई घरों में भारी मात्रा में मलबा और पानी भर गया है। भूस्खलन और बाढ़ की इन घटनाओं के कारण स्थानीय लोगों का जीवन बहुत ही संकट में पड़ गया है।
सुल्तानपुर में भारी तबाही: बारिश के कारण उफान पर आए नालों ने रिहायशी इलाकों में बहुत ही विकराल रूप धारण कर लिया है। चंबा के सुल्तानपुर मोहल्ले में बहने वाला सुल्तानपुर नाला अपने पूरे उफान पर आ गया है। इस खतरनाक नाले के तेज बहाव ने मोहल्ले में भारी तबाही मचाते हुए संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सुल्तानपुर में पच्चीस से ज्यादा रिहायशी मकानों को इस मलबे और पानी से नुकसान पहुंचा है। मकानों के अलावा वहां स्थित एक दुकान भी इस तेज बहाव की चपेट में आकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है।
सड़कों पर मलबे का कब्जा: लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण पूरे इलाके की सड़कों और मोहल्लों पर भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया है। उदयपुर-गोल्थी-नवोदय रोड पर भरियाड के पास एक बहुत बड़ा भूस्खलन हुआ जिससे मुख्य सड़क पूरी तरह से बंद हो गई। इस भीषण भूस्खलन के मलबे के नीचे कार, ट्रक और दोपहिया वाहनों समेत एक दर्जन से अधिक गाड़ियां दब गईं। इसके साथ ही तडोली नाले के तेज बहाव में बहकर आए बड़े पत्थर एक दुकान के अंदर घुस गए और उसे नष्ट कर दिया। गनीमत यह रही कि इस भयंकर तबाही के बावजूद अभी तक किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।
सैकड़ों सड़कें पूरी तरह बंद: राज्य आपात अभियान केंद्र ने बारिश और लैंडस्लाइड से हुए नुकसान के विस्तृत आंकड़े जारी किए हैं। केंद्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ और भूस्खलन के कारण पूरे राज्य में कुल 178 सड़कें बंद हो चुकी हैं। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान मंडी जिले में हुआ है, जहां अकेले 58 सड़कें यातायात के लिए पूरी तरह बंद हैं। इसके अलावा कुल्लू में 42, चंबा में 30, सिरमौर में 26 और शिमला में 16 मुख्य सड़कें बंद पड़ी हैं। लाहौल-स्पीति में तीन, कांगड़ा में दो और ऊना जिले में भी एक सड़क के बंद होने की आधिकारिक पुष्टि हुई है।
बिजली और पानी का संकट: सड़कों के अलावा राज्य की बुनियादी ढांचागत सुविधाओं को भी इस बारिश से बहुत गहरा नुकसान पहुंचा है। पूरे राज्य में कम से कम 107 जलापूर्ति परियोजनाओं को भारी बारिश और बाढ़ ने क्षतिग्रस्त कर दिया है। इसके साथ ही 62 बिजली ट्रांसफॉर्मर भी खराब हो गए हैं, जिससे कई इलाकों में बिजली गुल हो गई है। शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड के अनुसार सतलुज जल आपूर्ति परियोजना का ट्रांसफॉर्मर भी खराब हो गया है। जल स्रोतों में भारी गाद जमा होने के कारण अगले कुछ दिनों तक शिमला में जलापूर्ति बुरी तरह बाधित रह सकती है।
मानसून से जनहानि का आंकड़ा: राज्य में इस साल मानसून ने शुरुआत से ही अपना बेहद आक्रामक और खतरनाक रूप दिखाया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 30 जून को इस वर्ष के मानसून की विधिवत शुरुआत हुई थी। मानसून के दस्तक देने के बाद से ही पूरे प्रदेश में भूस्खलन और अचानक बाढ़ आने का सिलसिला जारी है। प्राकृतिक आपदाओं के इस भयानक दौर में अब तक कुल पंद्रह लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। प्रशासन लगातार लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और खराब मौसम में यात्रा से बचने की अपील कर रहा है।

























































