पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में पिछले 71 दिनों से जारी जन-आंदोलन ने अब हिंसक और उग्र रूप धारण कर लिया है। पाकिस्तानी फौज की गोलीबारी में 100 से अधिक नागरिकों की जान जाने के बाद लोगों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है। पीओके की आवाम ने खुले तौर पर चेतावनी दी है कि शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की गोलियों का जवाब अब गोलियों से ही दिया जाएगा। विरोध दर्ज करा रहे नागरिकों का कहना है कि उन्होंने चूड़ियां नहीं पहनी हैं और अब वे पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।
अवामी कमिटी का पूर्ण बहिष्कार: इस ऐतिहासिक प्रदर्शन का संचालन कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी ने सरकार के खिलाफ संपूर्ण नागरिक अवज्ञा आंदोलन शुरू कर दिया है। कमिटी के निर्णय अनुसार पीओके के निवासी अब न तो पाकिस्तान सरकार को कोई कर देंगे और न ही बिजली का बिल भरेंगे। सभी सरकारी दफ्तरों तथा शैक्षणिक संस्थानों का पूर्ण रूप से बहिष्कार करने का आदेश दिया गया है। इसके अतिरिक्त कमिटी ने साफ कर दिया है कि यदि फौज ने दोबारा निर्दोष नागरिकों पर गोली चलाई तो पलटवार में पाकिस्तानी सैन्य जवानों की लाशें बिछा दी जाएंगी।
अंतरराष्ट्रीय उपेक्षा पर फूटा गुस्सा: पीओके के निवासियों ने आरोप लगाया है कि शहबाज शरीफ की सरकार सेना के माध्यम से निर्दोष जनता पर कहर बरपा रही है। फौज द्वारा मासूम बच्चों और महिलाओं को निशाना बनाकर उनकी हत्या की जा रही है। इस दमन चक्र पर न तो पाकिस्तान की न्यायपालिका ध्यान दे रही है और न ही यूनाइटेड नेशंस जैसी विश्व संस्थाएं उनके मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आगे आ रही हैं। इस उपेक्षा से व्यथित होकर वहां के लोगों ने फैसला किया है कि वे अपने वजूद और हक की लड़ाई बिना किसी बाहरी मदद के खुद ही लड़ेंगे।
विभाजन के मुहाने पर खड़ा पाकिस्तान: वर्तमान में केवल पीओके ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान का हर प्रांत आंतरिक कलह और बगावत की आग में बुरी तरह जल रहा है। बलूचिस्तान के बागियों ने अपनी आजादी का ऐलान करते हुए खुद को अलग मुल्क घोषित कर दिया है। खैबर पख्तूनख्वा में भी आम जनता ने फौज के खिलाफ हथियार उठा लिए हैं और सिंध में स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। पीओके में सेना पर जवाबी हमले के ऐलान के बाद देश के कई टुकड़ों में विभाजित होने के कयास लगाए जा रहे हैं।
आजादी के बाद भी मानसिक गुलामी: देश के भीतर जारी इस भीषण गृहयुद्ध और तबाही के बीच भी पाकिस्तानी नेतृत्व गुलामी की मानसिकता से उबर नहीं पा रहा है। आजादी के 79वें वर्षगांठ के जश्न के मौके पर भी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का गुणगान करने में व्यस्त दिखे। अपने आधिकारिक भाषण में शहबाज शरीफ ने कहा कि वह डोनाल्ड ट्रंप का धन्यवाद करते हैं जिन्होंने बीते वर्ष भारत-पाक युद्धविराम करवाकर लाखों जिंदगियों की रक्षा की थी। इस बयान से पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय निर्भरता साफ छलकती है।
भविष्य के रणनीतिक संबंध: अपने देश में चारों तरफ भड़की बगावत की आग को दबाने में नाकाम शहबाज शरीफ अमेरिका से बेहतर रिश्तों की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि वाशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच संबंध लगातार आगे की दिशा में बढ़ रहे हैं और भविष्य में ये और अधिक प्रगाढ़ होंगे। एक तरफ पूरा देश बलूचिस्तान से लेकर पीओके तक गृहयुद्ध की चपेट में है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी हुकूमत अपनी वैश्विक साख बचाने के लिए विदेशी राष्ट्रों के सामने गुहार लगा रही है।
















































