यूरोपीय भूमध्यसागरीय भूकंपीय केंद्र (ईएमएससी) की रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार को इंडोनेशिया के फ्लोरेस क्षेत्र में 5.9 तीव्रता का भूकंप आया। वैज्ञानिकों के अनुसार इस ताजा भूकंप का केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई में दर्ज किया गया था। यह नया झटका फ्लोरेस के पास आए 7.7 तीव्रता के बड़े भूकंप के बाद महसूस किया गया है। कुछ दिन पहले आए उस तीव्र भूकंप ने दर्जनों लोगों की जान ले ली थी और भारी तबाही मचाई थी। इस नए झटके के बाद से ही पूरे क्षेत्र में एक बार फिर अफरा-तफरी मच गई है।
पहले भूकंप का मुख्य केंद्र इससे पहले 15 अगस्त को फ्लोरेस द्वीप के पास 7.7 तीव्रता का एक अत्यंत शक्तिशाली भूकंप आया था। इसका केंद्र पूर्वी नुसा तेंगारा के एंडे से लगभग 68 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पश्चिम में स्थित था। यह एक उथला भूकंप था, जिसके कारण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ और सैकड़ों घरों को नुकसान पहुंचा। इसके कारण पूरे द्वीप पर संचार और परिवहन जैसी कई अन्य समस्याएं खड़ी हो गईं। इस आपदा ने स्थानीय निवासियों के सामान्य जीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया था।
चार कस्बों में भारी तबाही पूर्वी इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप पर 15 अगस्त के भूकंप से कम से कम 73 लोगों की मौत हुई और हज़ारों लोगों को भागना पड़ा। एएफपी से बात करते हुए बचाव अधिकारी फथुर रहमान ने बताया कि पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध इस द्वीप के चार कस्बों में मौतें दर्ज की गई हैं। सबसे ज़्यादा प्रभावित नागेकेओ रीजेंसी जाते समय नाव से फथुर ने बताया कि 73 लोगों की मौत हुई है, छह लोग घायल हैं और दो लोग अभी भी मलबे में दबे हुए हैं। इस सूचना के सामने आते ही बचाव अभियान को और तेज कर दिया गया।
सुनामी और इंफ्रास्ट्रक्चर का नुकसान इस आपदा में कई स्कूलों, स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी इमारतों को काफी क्षति पहुंची है। भूकंप के झटकों के तुरंत बाद समुद्र में सुनामी की छोटी लहरें उठीं, जिनकी अधिकतम ऊंचाई लगभग 1.61 मीटर दर्ज की गई। तटीय इलाके के कुछ हिस्सों के लिए जारी की गई सुनामी की चेतावनी को स्थिति सामान्य होने पर बाद में हटा लिया गया। हालांकि इमारतों के ध्वस्त होने से सार्वजनिक सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई थीं, जिन्हें बहाल करने की कोशिशें लगातार जारी हैं।
बेघर हुए हजारों निवासी इंडोनेशियाई अधिकारियों द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस आपदा में 73 लोगों की मौत और 900 से ज़्यादा लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। इस भीषण तबाही में लगभग 60,000 लोग बेघर हो गए हैं और सहायता शिविरों में शरण लेने पर मजबूर हैं। पहले मुख्य भूकंप के बाद से अब तक 3,000 से ज़्यादा अफ़्टरशॉक्स दर्ज किए गए हैं। इन लगातार झटकों के कारण स्थानीय लोग बेहद सतर्क हैं और अपने क्षतिग्रस्त घरों में वापस जाने से डर रहे हैं।
बचाव अभियान में चुनौतियां क्षेत्र में हुए भारी भूस्खलन और मुख्य सड़कों के टूटने के कारण राहत और बचाव दल को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस भौगोलिक बाधा की वजह से कई दूरस्थ स्थानों पर राहत सामग्री और मेडिकल सहायता समय पर नहीं पहुंच पा रही है। मलबे में दबे अपनों को खोजने के लिए लोग अभी भी खुद प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन और राहत एजेंसियां विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सभी प्रभावितों तक सहायता पहुंचाने के काम में जुटी हुई हैं।
















































