उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव पर तीखा जुबानी हमला करते हुए कहा कि गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले लोग परिस्थितियों के अनुसार अपनी परिभाषाएं भी बदलते रहते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शुरुआत में इन लोगों द्वारा ‘P’ की परिभाषा ‘पिछड़ा’ के रूप में गढ़ी गई थी। इसके कुछ समय बाद वे अपनी राजनीतिक सहूलियत देखकर ‘P’ की परिभाषा ‘पंडित’ से करने लगे। सीएम योगी ने आगे कहा कि यदि इनका यही रवैया रहा तो एक दिन ये लोग ‘P’ की परिभाषा ‘पाकिस्तान’ से भी कर देंगे।
तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों का संदर्भ: मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि प्रदेश में अपने पिछले 9 वर्षों के शासनकाल के दौरान वे तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के निधन के बाद आयोजित आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल हुए हैं। उन्होंने बताया कि निधन होने वाले ये तीनों ही पूर्व मुख्यमंत्री अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े हुए थे। सीएम योगी ने कहा कि जब श्रद्धेय बाबूजी कल्याण सिंह का निधन हुआ था, तो वह दुखद क्षण उनके लिए पूरी तरह असहनीय था। उन्होंने अपनी सरकार द्वारा दिए गए सम्मान को रेखांकित करते हुए विपक्षी दलों के रवैये की तुलना की।
कल्याण सिंह के निधन का स्मरण: सीएम योगी ने याद दिलाया कि बाबूजी कल्याण सिंह के निधन की खबर मिलते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पूर्व निर्धारित सारे कार्यक्रम रद्द करके तुरंत लखनऊ पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के अलावा वह स्वयं और उनकी पूरी कैबिनेट अंतिम संस्कार के दौरान वहां निरंतर मौजूद रही थी। राज्य सरकार ने उनके अंतिम संस्कार को पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ संपन्न कराया था। भाजपा ने अपने वरिष्ठ नेता को विदाई देने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। परंतु विपक्षी दलों का आचरण इस दुखद घड़ी में काफी निराशाजनक और आपत्तिजनक रहा था।
मायावती का शिष्टाचार और सपा की चुप्पी: सीएम योगी ने बसपा प्रमुख के रुख की सराहना करते हुए कहा कि सामान्य राजनीतिक शिष्टाचार के तहत मायावती ने खुद आकर बाबूजी कल्याण सिंह को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की थी। लेकिन इसके ठीक उलट समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेताओं ने न तो प्रत्यक्ष रूप से जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी और न ही अपने शब्दों से कोई संवेदना व्यक्त की। सीएम योगी ने सपा के इस आचरण को अत्यंत शर्मनाक बताते हुए सार्वजनिक मंच से सवाल उठाया कि किसी दिवंगत बड़े नेता का इससे बड़ा अपमान और क्या हो सकता है।
जातीय व सनातन अपमान करार: समाजवादी पार्टी द्वारा संवेदना न जताए जाने को बेहद गंभीर मुद्दा बनाते हुए सीएम योगी ने कहा कि यह केवल बाबूजी का व्यक्तिगत अपमान नहीं था। उन्होंने कहा कि यह सीधे तौर पर एक जातीय अपमान था और साथ ही हर सनातन हिंदू का भी भारी अपमान था। सीएम योगी के अनुसार कल्याण सिंह ने अपना पूरा जीवन समाज और सनातन धर्म के लिए समर्पित कर दिया था, ऐसे में उनके निधन पर सपा की चुप्पी उनकी नकारात्मक सोच को दर्शाती है। उन्होंने सपा पर महापुरुषों और जननेताओं के अनादर का सीधा आरोप लगाया।
सपा की नीतियों पर तीखे सवाल: अपने वक्तव्य के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव और उनकी पार्टी की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जो लोग जीवन भर पिछड़ों और सनातनियों के नाम पर राजनीति करते हैं, वे ही उनके नेताओं के निधन पर संवेदना तक व्यक्त नहीं करते। गिरगिट की तरह बार-बार रंग बदलना और परिभाषाएं बदलना सपा की पुरानी आदत बन चुकी है। सीएम योगी ने कहा कि जनता अब ऐसे लोगों के दोहरे चरित्र और रंग बदलने की राजनीति को अच्छी तरह समझ चुकी है और सही समय पर इसका करारा जवाब देगी।















































