बारिश में कीचड़ बना ग्रामीणों के जी का जंजाल
ग्रामीणों का ऐलान—‘रोड नहीं तो वोट नहीं’*
जंगल विभाग की रोक से रास्ता निर्माण अधर में, स्कूली बच्चों और मरीजों की बढ़ी दुश्वारियां*
मिहींपुरवा। विकासखंड मिहींपुरवा अंतर्गत ग्राम पंचायत मुर्तिहा के मजरा कौब्बाभारी में बारिश ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जंगल से होकर गुजरने वाला कच्चा रास्ता बरसात में कीचड़ से पूरी तरह बदहाल हो गया है। रास्ते पर जगह-जगह फिसलन और दलदल जैसी स्थिति होने से स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों का आवागमन बेहद मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जंगल विभाग की ओर से रास्ते पर निर्माण कार्य की अनुमति नहीं मिलने के कारण वर्षों से समस्या जस की तस बनी हुई है। बारिश के दिनों में स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि पैदल चलना भी किसी चुनौती से कम नहीं रहता। बच्चों को कीचड़ भरे रास्ते से होकर स्कूल जाना पड़ता है, जबकि बीमार मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है।
समस्या से नाराज ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान श्री प्रसाद की अगुवाई में विरोध जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से रास्ते की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि वर्षों से मूलभूत सुविधा के लिए परेशान किया जा रहा है और अब उनकी समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
ग्राम प्रधान श्री प्रसाद ने कहा, “हमारी समस्या कहीं नहीं सुनी जाती। ग्रामीण लंबे समय से रास्ते की समस्या झेल रहे हैं। बारिश में बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। यदि गांव में आवागमन के लिए सड़क ही नहीं होगी तो विकास की बातें बेकार हैं। अब ग्रामीणों की एक ही मांग है—रोड नहीं तो वोट नहीं।”
प्रधान के इस बयान के बाद ग्रामीणों ने भी एक स्वर में सड़क निर्माण की मांग उठाते हुए कहा कि जब तक रास्ते की समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक उनकी परेशानी दूर नहीं होगी।ग्रामीणों का कहना है कि जंगल क्षेत्र के नियमों का पालन करते हुए प्रशासन और वन विभाग को ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिससे आवागमन भी सुचारु हो और वन क्षेत्र के नियम भी प्रभावित न हों। ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप कर रास्ते को आवागमन योग्य बनाने की मांग की है।अब सवाल यह है कि जिस रास्ते से बच्चों की पढ़ाई, मरीजों का इलाज और ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी जुड़ी है, वह रास्ता आखिर कब तक बारिश में कीचड़ और दुश्वारियों में तब्दील रहेगा?













































