वन-स्टॉप शोल्डर क्लिनिक में 12 महीनों में 175 मरीजों का सफल उपचार
लखनऊ। फ्रोजन शोल्डर से जूझ रहे मरीजों के लिए SGPGIMS के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में संचालित वन-स्टॉप शोल्डर क्लिनिक राहत का माध्यम बन रहा है। फिजिकल मेडिसिन एवं रिहैबिलिटेशन विभाग द्वारा प्रत्येक मंगलवार संचालित इस क्लिनिक में पिछले 12 महीनों में 175 मरीजों का उपचार किया गया है।

क्लिनिक में अल्ट्रासाउंड-गाइडेड तकनीक के माध्यम से मरीजों की जांच और कम इनवेसिव उपचार किया जाता है। इसके बाद मरीजों को व्यवस्थित रिहैबिलिटेशन कार्यक्रम के तहत विशेषज्ञों की निगरानी में व्यायाम कराया जाता है तथा घर पर किए जाने वाले व्यायाम के लिए भी आवश्यक निर्देश दिए जाते हैं। इस तरह जांच, उपचार और पुनर्वास की सुविधा एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही है।
फ्रोजन शोल्डर, जिसे एडहेसिव कैप्सुलाइटिस भी कहा जाता है, में कंधे में लगातार दर्द और जकड़न रहती है। इसके कारण कपड़े पहनने, बाल बनाने और हाथ ऊपर उठाने जैसे सामान्य कार्य भी कठिन हो सकते हैं। डॉक्टरों के अनुसार समय पर जांच और उचित पुनर्वास से लंबे समय तक रहने वाली कंधे की जकड़न को कम करने में मदद मिल सकती है।
क्लिनिक की खासियत यह है कि कई मरीजों में MRI की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे उपचार की लागत कम करने और जांच में होने वाली देरी से बचने में मदद मिलती है। उपचार में स्टेरॉयड का उपयोग भी आवश्यकता के अनुसार सीमित रखा जाता है, जिससे मधुमेह से पीड़ित मरीजों के उपचार में विशेष सावधानी बरती जा सकती है।
SGPGIMS के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. सिद्धार्थ राय ने बताया कि क्लिनिक का उद्देश्य फ्रोजन शोल्डर के मरीजों को एक ही स्थान पर सम्पूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है। अल्ट्रासाउंड आधारित जांच, लक्षित कम इनवेसिव उपचार और व्यवस्थित रिहैबिलिटेशन को एक साथ अपनाने से उपचार को प्रभावी और सुरक्षित बनाने में मदद मिल रही है।

एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख प्रो. अरुण के. श्रीवास्तव ने कहा कि इस तरह की एकीकृत व्यवस्था से मरीजों की सुविधा बढ़ने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यक्षमता में भी सुधार होता है। SGPGIMS के निदेशक प्रो. आर. के. धीमन ने अल्ट्रासाउंड-गाइडेड उपचार को रिहैबिलिटेशन मेडिसिन में महत्वपूर्ण प्रगति बताया।
क्लिनिक में उपचार करा चुके मरीजों ने एक ही स्थान पर समन्वित देखभाल मिलने को सुविधाजनक बताया है। कई मरीजों में उपचार के कुछ ही सप्ताह के भीतर दर्द और कंधे की गति में सुधार देखा गया है।
लगातार कंधे में दर्द, जकड़न या हाथ उठाने में परेशानी से जूझ रहे लोगों को समय पर चिकित्सकीय जांच कराने की सलाह दी गई है।







































