उत्तर प्रदेश में कौशल विकास को रोजगार से सीधे जोड़ने के लिए योगी सरकार ने नई योजना को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना को स्वीकृति प्रदान की गई। इसके तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों में नौ क्षेत्रों के माध्यम से प्रशिक्षण और रोजगार की एकीकृत व्यवस्था तैयार की जाएगी। सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को कुशल श्रमशक्ति उपलब्ध कराने वाला प्रमुख केंद्र बनाना है, ताकि यहां के युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप तैयार किया जा सके। योजना में केवल प्रशिक्षण देने के बजाय युवाओं को देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों में उपलब्ध रोजगार अवसरों से जोड़ने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
तकनीकी और गैर-तकनीकी पृष्ठभूमि वाले युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण: योजना में अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि के युवाओं की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। मानविकी और वाणिज्य जैसे गैर-तकनीकी विषयों से पढ़ाई करने वाले युवाओं को आधारभूत कौशल सिखाए जाएंगे, जबकि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, पॉलिटेक्निक और अभियांत्रिकी की पृष्ठभूमि वाले युवाओं को तकनीकी कौशल उन्नयन का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही देश के अन्य राज्यों और विदेशों में रोजगार की मांग को देखते हुए आवश्यकता आधारित भारतीय भाषाओं और विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इस व्यवस्था से युवाओं को रोजगार के लिए जरूरी तकनीकी ज्ञान, संवाद क्षमता और कार्यक्षेत्र से जुड़ी दक्षताएं हासिल करने में मदद मिलेगी। प्रशिक्षण कार्यक्रमों को स्थानीय औद्योगिक गतिविधियों और बाजार की वास्तविक जरूरतों के अनुसार तैयार करने की योजना है।
लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, गौतमबुद्ध नगर और झांसी में बनेंगे केंद्र: योजना के पहले चरण में पांच प्रमुख स्थानों पर कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। लखनऊ में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की ओर से केंद्र विकसित होगा। कानपुर में सार्वजनिक-निजी सहभागिता के आधार पर केंद्र स्थापित किया जाएगा। गोरखपुर में गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण, गौतमबुद्ध नगर में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के संयुक्त सहयोग तथा झांसी में बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण के माध्यम से केंद्र विकसित किया जाएगा। प्रत्येक केंद्र के लिए 10 से 25 एकड़ तक उपयुक्त और भारमुक्त भूमि की व्यवस्था की जाएगी। केंद्रों को निकटवर्ती राजमार्ग या द्रुतगामी मार्ग से जोड़ने के लिए दो वर्ष के भीतर चार लेन की सड़क संपर्क सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान भी किया गया है।
नौ क्षेत्रों के जरिए पूरे प्रदेश में पहुंचेगी योजना: कौशल विकास और रोजगार व्यवस्था को प्रदेशव्यापी बनाने के लिए जिलों और मंडलों को नौ क्षेत्रों में बांटा गया है। पहले क्षेत्र में गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद और हापुड़, दूसरे में सहारनपुर मंडल के साथ बुलंदशहर, बागपत और मेरठ तथा तीसरे में मुरादाबाद और बरेली मंडल शामिल होंगे। चौथे क्षेत्र में आगरा और अलीगढ़ मंडल, पांचवें में लखनऊ और अयोध्या मंडल तथा छठे में कानपुर और प्रयागराज मंडल को रखा गया है। सातवें क्षेत्र में चित्रकूट, विंध्याचल और झांसी मंडल, आठवें में वाराणसी और आजमगढ़ मंडल तथा नौवें में गोरखपुर, बस्ती और देवीपाटन मंडल शामिल होंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रत्येक क्षेत्र की औद्योगिक जरूरतों और रोजगार की संभावनाओं को पहचानकर युवाओं को स्थानीय मांग के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है।
छात्रावास और रोजगार सहायता केंद्रों से मिलेगा सहारा: योजना में प्रशिक्षणार्थियों के लिए छात्रावास की सुविधा देने और प्रशिक्षण परिसर में ही सेवायोजन कार्यालय तथा रोजगार उपलब्ध कराने वाली इकाई स्थापित करने की व्यवस्था की जाएगी। देश और विदेश में नियुक्ति के क्षेत्र में काम करने वाली मान्यता प्राप्त और प्रतिष्ठित एजेंसियों के साथ समन्वय कर प्रशिक्षित युवाओं को उपयुक्त रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। केंद्रों का विकास और संचालन सार्वजनिक-निजी सहभागिता पर आधारित डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन एवं हस्तांतरण मॉडल के तहत या सरकारी संस्थाओं के माध्यम से किया जा सकेगा। इस व्यवस्था के जरिए प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को नौकरी तलाशने के लिए अलग-अलग स्थानों पर भटकने की जरूरत कम करने और प्रशिक्षण के बाद रोजगार संबंधी सहायता एक ही परिसर में उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।
1,725 करोड़ रुपये के बजट से निगरानी और तकनीकी व्यवस्था होगी मजबूत: योजना पर अगले तीन वर्षों में 1,725 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। जरूरत के मुताबिक निजी विकासकर्ताओं और प्रशिक्षण प्रदाताओं को वित्तीय व्यवहार्यता अंतर सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी। योजना की निगरानी राज्य, जिला और परियोजना स्तर पर की जाएगी, ताकि केंद्रों की स्थापना, संचालन, वित्तीय प्रबंधन, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और रोजगार संबंधी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। संबंधित विभागों, उद्योगों और औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के बीच समन्वय स्थापित कर योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने की व्यवस्था होगी। इसके अतिरिक्त डिजिटल निगरानी पट्ट, आंकड़ों के विश्लेषण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकी सुविधाओं का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी भागीदार चुना जाएगा, ताकि कौशल प्रशिक्षण, रोजगार संबंधी गतिविधियों और परियोजना की प्रगति की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सके।














































