केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शामिल हुए। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर आयोजित इस बैठक में पार्टी की चुनावी दिशा, संगठनात्मक मजबूती और आगामी राजनीतिक लक्ष्य पर चर्चा हुई। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शाह ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठन की असली ताकत बताया और उनका अभिवादन किया। शाह ने अपने भाषण में भरोसा जताया कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार फिर बनेगी और इस बारे में किसी तरह की दुविधा नहीं है। बैठक के दौरान उन्होंने पिछले चुनावों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कार्यकर्ताओं को एक बार फिर उसी स्तर का प्रदर्शन करने के लिए तैयार रहने का संदेश दिया।
अयोध्या की घटना का उल्लेख कर विपक्ष पर निशाना: अपने संबोधन में अमित शाह ने तीस अक्टूबर की तारीख और वर्ष 1990 में अयोध्या में रामभक्तों पर चली गोलियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि जिन लोगों ने रामभक्तों पर गोलियां चलवाई थीं, वे आज सरकार बनाने की बात किस मुंह से करते हैं। शाह ने भाजपा की ओर से राम मंदिर निर्माण को अपनी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया और कहा कि एक तरफ रामभक्तों पर गोलियां चलाई गईं, जबकि दूसरी तरफ भाजपा ने राम मंदिर बनवाया। उन्होंने दावा किया कि जनता इस घटना को नहीं भूलेगी और विपक्ष की तीसरी पीढ़ी को भी इसके लिए माफी नहीं मिलेगी। शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने सरकार की चिंता किए बिना विवादित ढांचे को ध्वस्त कराया था। उन्होंने उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार को अंगद के पैर की तरह मजबूत बताते हुए कहा कि उसे कोई हटा नहीं सकता।
मत चोरी के आरोपों पर संसद में चर्चा की चुनौती: अमित शाह ने विपक्ष की ओर से चुनाव में मत चोरी के आरोप लगाए जाने पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि चुनावी मुकाबला हारने के बाद अब अंपायर पर आरोप लगाए जा रहे हैं और मतदान में गड़बड़ी का दावा किया जा रहा है। शाह ने कहा कि भाजपा संसद में इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष से विशेष सत्र बुलाकर बहस करने की चुनौती दी और कहा कि चर्चा के दौरान हर बात का जवाब दिया जाएगा। इस बयान के जरिए गृह मंत्री ने चुनावी आरोपों पर संसद में खुली बहस की पेशकश की। उनका कहना था कि विपक्ष को आरोप लगाने के बजाय सदन में आकर अपने सवाल रखने चाहिए, जहां भाजपा उनका एक-एक करके जवाब देने के लिए तैयार है।
20214 और 2017 के चुनावों का दिया उदाहरण: गृह मंत्री ने पार्टी के पुराने चुनावी सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश में भाजपा के पास केवल 44 विधायक थे और संगठन निराशा के दौर से गुजर रहा था। शाह ने बताया कि उन्होंने तहसील स्तर तक जाकर संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया। इसके बाद वर्ष 2014 के चुनाव में पार्टी ने 41 प्रतिशत मत हासिल किए और ७३ सीटें जीतीं। उन्होंने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया और कहा कि नोटबंदी के दौरान अखिलेश यादव रातभर सो नहीं पाए थे। शाह के अनुसार, उस चुनाव में भाजपा ने 40 प्रतिशत मतों के साथ 312 सीटों पर जीत दर्ज की थी। उन्होंने इन चुनावी नतीजों को पार्टी के संगठनात्मक प्रयासों और जनसमर्थन का उदाहरण बताते हुए कार्यकर्ताओं से फिर ऐसा ही प्रदर्शन करने का आह्वान किया।
सत्ता में वापसी पर समान नागरिक संहिता लागू करने की घोषणा: अमित शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार लगातार तीसरी बार बनने पर राज्य में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। उन्होंने इस घोषणा को आगामी विधानसभा चुनाव के संदर्भ में सामने रखा और कार्यकर्ताओं से पार्टी को फिर सत्ता में लाने के लिए जुटने की अपील की। शाह ने अपने भाषण में पुराने चुनावी नतीजों, संगठन की मजबूती और भविष्य की राजनीतिक योजनाओं को जोड़ते हुए कहा कि अब पिछले प्रदर्शन को दोहराने का समय आ गया है। उनका संदेश स्पष्ट था कि पार्टी को आगामी चुनाव में लगातार तीसरी जीत हासिल करने के लक्ष्य के साथ काम करना है। समान नागरिक संहिता लागू करने का वादा भी इसी चुनावी अभियान के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेगा।
योगी आदित्यनाथ समेत वरिष्ठ नेता बैठक में शामिल: प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के साथ पार्टी संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक में वरिष्ठ राज्य नेतृत्व, जिला अध्यक्षों और प्रमुख पदाधिकारियों ने भाग लिया। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठनात्मक प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई, जमीनी स्तर पर पार्टी की पहुंच की समीक्षा की गई और आगे के लिए चुनावी लक्ष्य निर्धारित करने पर जोर दिया गया। भाजपा इस बैठक के जरिए अपने संगठनात्मक रोडमैप को स्पष्ट करने और प्रदेशभर में चुनावी तैयारियों को गति देने की दिशा में काम कर रही है। अमित शाह का संबोधन इसी तैयारी का अहम हिस्सा रहा, जिसमें उन्होंने कार्यकर्ताओं को तीसरी बार सरकार बनाने के लक्ष्य के प्रति एकजुट रहने का संदेश दिया।














































