शिव योग: 30 अक्टूबर 2026 को रात 8 बजकर 42 मिनट तक
शिव योग को वैदिक ज्योतिष में शुभ योग माना जाता है। 30 अक्टूबर को यह योग रात 8 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। इसके बाद सिद्ध योग शुरू होगा। शिव योग के दौरान भगवान शिव की पूजा, मंत्र जाप, ध्यान, साधना और धार्मिक कार्यों को विशेष महत्त्व दिया जाता है। इस योग में मन को शांत रखने, विचारों में स्पष्टता लाने और आध्यात्मिक कार्यों पर ध्यान देने की परंपरा है।
शिव योग कैसे बनता है?
वैदिक ज्योतिष में नित्य योग की गणना सूर्य और चंद्रमा की निरयन देशांतर स्थितियों के योग से की जाती है। इस गणना के आधार पर कुल 27 नित्य योग निर्धारित किए गए हैं। शिव योग इन्हीं में से एक है। इसका नाम शिव होने के कारण इसे धार्मिक साधना और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए अनुकूल माना जाता है।
शिव योग के प्रभाव और उपाय
इस योग को सामान्यतः शुभ माना जाता है, इसलिए इसे विशेष हानिकारक योग नहीं माना जाता। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, इस समय पूजा-पाठ, ध्यान और आत्मचिंतन पर ध्यान देना लाभकारी रहता है। उपाय के रूप में भगवान शिव को स्वच्छ जल अर्पित करें, महामृत्युंजय मंत्र या पंचाक्षरी मंत्र ॐ नमः शिवाय का जाप करें और क्रोध तथा कटु वाणी से बचें।
सिद्ध योग: 30 अक्टूबर 2026 को रात 8 बजकर 42 मिनट से 31 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 32 मिनट तक
शिव योग समाप्त होने के बाद सिद्ध योग आरंभ होगा। यह योग 31 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। वैदिक ज्योतिष में सिद्ध योग को शुभ कार्यों, नई योजनाओं की शुरुआत, अध्ययन, साधना और लक्ष्य प्राप्ति के लिए अनुकूल माना जाता है। इस योग में एकाग्रता के साथ काम करना, अधूरे कार्य पूरे करना और योजनाओं को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाना शुभ माना जाता है।
सिद्ध योग कैसे बनता है?
सिद्ध योग 27 नित्य योगों में से एक है। इसकी गणना सूर्य और चंद्रमा की निरयन देशांतर स्थितियों के आधार पर होती है। जब उनकी संयुक्त स्थिति निर्धारित गणना के अनुसार सिद्ध योग के खंड में आती है, तब यह योग बनता है।
सिद्ध योग के प्रभाव और उपाय
परंपरागत ज्योतिषीय मान्यता में सिद्ध योग को कार्यों में सफलता, एकाग्रता और योजनाओं को पूरा करने के लिए अनुकूल माना जाता है। इस योग में किए गए कामों में अनुशासन और निरंतरता बनाए रखना महत्त्वपूर्ण है। उपाय के रूप में भगवान विष्णु या अपने इष्टदेव की पूजा करें, जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं और किसी भी महत्त्वपूर्ण कार्य को शुरू करने से पहले उसकी पूरी तैयारी करें।
रवि योग: 31 अक्टूबर 2026 को सुबह 7 बजकर 12 मिनट से 1 नवंबर को सुबह 5 बजकर 40 मिनट तक
31 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 12 मिनट पर रवि योग शुरू होगा। यह योग 1 नवंबर को सुबह 5 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। इस प्रकार 31 अक्टूबर की सुबह से अगले दिन सुबह तक रवि योग का प्रभाव रहेगा। वैदिक ज्योतिष में रवि योग को शुभ योगों में गिना जाता है। इसे धार्मिक कार्यों, अध्ययन, योजनाबद्ध प्रयासों और महत्त्वपूर्ण कामों के लिए अनुकूल माना जाता है।
रवि योग कैसे बनता है?
रवि योग की गणना सूर्य और चंद्रमा से संबंधित नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर की जाती है। जब चंद्रमा का नक्षत्र सूर्य के नक्षत्र से निर्धारित शुभ दूरी पर होता है, तब रवि योग बनता है। 31 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 12 मिनट पर आर्द्रा नक्षत्र समाप्त होकर पुनर्वसु नक्षत्र शुरू होगा। इसी समय रवि योग का आरंभ भी बताया गया है।
रवि योग के प्रभाव और उपाय
रवि योग को पारंपरिक मान्यताओं में शुभ माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, अध्ययन, आत्मचिंतन और योजनाबद्ध तरीके से काम करने पर ध्यान दिया जा सकता है। उपाय के रूप में सुबह सूर्यदेव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें, आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य मंत्र का जाप करें और अपने कार्यों में अनुशासन बनाए रखें।
31 अक्टूबर 2026 को दोपहर तक रहने वाला योग
31 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे तक सिद्ध योग और रवि योग दोनों प्रभावी रहेंगे। सिद्ध योग शाम 5 बजकर 32 मिनट तक तथा रवि योग 1 नवंबर की सुबह 5 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। इसलिए 31 अक्टूबर की सुबह से दोपहर तक इन दोनों योगों का समय रहेगा।
गुरु-शनि षडाष्टक योग: 31 अक्टूबर 2026 से बनेगा, इन राशियों पर पड़ेगा प्रभाव
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, 31 अक्टूबर 2026 को गुरु ग्रह कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। इस समय गुरु अतिचारी गति से चल रहे हैं, यानी उनकी गति सामान्य की तुलना में तेज है। गुरु के राशि परिवर्तन के साथ गुरु और शनि के बीच षडाष्टक योग बनेगा। इस योग में गुरु और शनि एक-दूसरे से छठे और आठवें भाव में स्थित होंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस स्थिति का प्रभाव कुछ राशियों के पारिवारिक जीवन, आर्थिक मामलों, शिक्षा, स्वास्थ्य और कार्यक्षेत्र पर पड़ सकता है। कन्या, मकर और मीन राशि के जातकों को इस अवधि में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
गुरु-शनि का षडाष्टक योग कैसे बनता है?
वैदिक ज्योतिष में जब दो ग्रह एक-दूसरे से छठे और आठवें भाव में स्थित होते हैं, तो उनके बीच षडाष्टक योग बनता है। गुरु ज्ञान, शिक्षा, धर्म, समृद्धि और विस्तार के कारक माने जाते हैं, जबकि शनि कर्म, अनुशासन, परिश्रम, जिम्मेदारी और विलंब से जुड़े हैं। इन दोनों ग्रहों की षडाष्टक स्थिति को ज्योतिषीय दृष्टि से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। गुरु के सिंह राशि में प्रवेश करने के बाद गुरु और शनि की भावगत स्थिति के आधार पर इस योग का प्रभाव देखा जाता है।
कन्या राशि
कन्या राशि के जातकों को षडाष्टक योग के दौरान आर्थिक लेन-देन में सावधानी बरतनी चाहिए। धन उधार देने या किसी बड़े वित्तीय निर्णय से पहले सभी पहलुओं की जांच करें, क्योंकि लापरवाही से पैसा फंसने की स्थिति बन सकती है। विद्यार्थियों का ध्यान पढ़ाई से भटक सकता है, इसलिए नियमित अध्ययन के साथ योग और ध्यान को दिनचर्या में शामिल करें। नौकरी करने वाले लोग कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियों से जुड़े दस्तावेजों को ध्यान से जांचें। उपाय: भगवान विष्णु की पूजा करें और विष्णु मंत्र का जाप करें।
मकर राशि
मकर राशि के स्वामी शनि हैं, लेकिन गुरु के साथ उनका षडाष्टक योग बनना इस राशि के जातकों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। पारिवारिक जीवन में तनाव बढ़ने से बचाने के लिए अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें और छोटी बातों को विवाद का रूप न लेने दें। आर्थिक मामलों में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए बजट बनाकर खर्च करें। विद्यार्थियों को गलत संगति से दूर रहना चाहिए, अन्यथा पढ़ाई और समय दोनों प्रभावित हो सकते हैं। स्वास्थ्य के प्रति भी सतर्क रहें और तले-भुने भोजन का सेवन सीमित रखें। उपाय: भगवान शिव की पूजा करें और शिव मंत्रों का नियमित जाप करें।
मीन राशि
मीन राशि के जातकों के लिए गुरु और शनि का षडाष्टक योग आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने का संकेत देता है। अनियोजित खर्च बजट बिगाड़ सकते हैं, इसलिए निवेश करने से पहले पूरी जानकारी जुटाएं और जल्दबाजी में कोई बड़ा वित्तीय निर्णय न लें। विद्यार्थियों को अच्छे परिणाम प्राप्त करने के लिए शिक्षकों और अनुभवी लोगों का मार्गदर्शन लेना चाहिए। विदेश से जुड़े कारोबार में काम करने वाले लोग दस्तावेजों और लेन-देन की शर्तों की बारीकी से जांच करें। घर के बड़े-बुजुर्गों के साथ बातचीत में संयम रखें और अनावश्यक विवाद से बचें। उपाय: केले, पीली दाल या पीले वस्त्रों का जरूरतमंदों को दान करें और भगवान विष्णु की पूजा करें।













































